भारत की राजधानी दिल्ली में AI Summit 2026 का आयोजन हो रहा है। दिल्ली में होने जा रही यह समिट जितनी दुनिया भर के लिए महत्वपूर्ण है, उससे ज्यादा ग्लोबल साउथ के लिए यह महत्व रखती है। अभी तक तीन AI Summit हो चुकी हैं, लेकिन ग्लोबल साउथ में भारत पहला देश है, जहां इस समिट का आयोजन हो रहा है। इसी वजह के इसकी चर्चा और महत्व दोनों काफी बढ़ गया है। इसका महत्व कितना है, ये इस बात से समझिए कि UN महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने इसे लेकर कहा कि भारत वैश्विक मामलों में प्रभाव रखने वाली एक बेहद सफल उभरती अर्थव्यवस्था है और यह एआई शिखर सम्मेलन के लिए उपयुक्त स्थान है।
क्या है AI Summit?
AI Summit एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन होता है, जिसमें दुनिया भर के देशों के प्रतिनिधि, टेक कंपनियां, नीति-निर्माता, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं। इसका मकसद एआई तकनीक के विकास, उसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग, नियमों, नैतिक मानकों और वैश्विक सहयोग की रूपरेखा तय करना होता है। हाल के वर्षों में एआई के तेज विकास- खासतौर पर जनरेटिव एआई-के बाद कई देशों ने मिलकर वैश्विक स्तर पर इसके जोखिम और अवसरों पर चर्चा शुरू की।
AI Summit के मुख्य उद्देश्य है:-
- AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को बढ़ावा देना
- तकनीक के दुरुपयोग-जैसे डीपफेक, साइबर हमले या स्वायत्त हथियार-को रोकने के उपाय तलाशना
- विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी असमानता कम करना
- वैश्विक स्तर पर एक साझा नीतिगत ढांचा तैयार करना
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पहले कहां-कहां हुआ AI Summit का आयोजन?
वैश्विक स्तर पर एआई गवर्नेंस और सुरक्षा को लेकर औपचारिक शिखर बैठकों की शुरुआत 2023 से हुई। भारत से पहले तीन प्रमुख देशों में उच्च-स्तरीय AI Summit आयोजित हो चुके हैं, जहां एआई के जोखिम, नियमन और वैश्विक सहयोग जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई थी।
- पहली एआई समिट (First AI Summit)- सबसे पहले नवंबर 2023 में ब्रिटेन के लंदन में AI Safety Summit आयोजित हुई। इस बैठक का मुख्य फोकस उन्नत एआई मॉडलों से जुड़े संभावित खतरों पर था। इसमें एआई से होने वाले दुरुपयोग, साइबर सुरक्षा, डीपफेक, जैविक या सैन्य जोखिम, और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर सहमति बनी। कई देशों ने एआई सेफ्टी रिसर्च और साझा मानकों पर साथ काम करने की प्रतिबद्धता जताई।
- दूसरी एआई समिट (Second AI Summit)- इसके बाद मई 2024 में दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में अगला शिखर सम्मेलन हुआ। यहां चर्चा का दायरा सुरक्षा से आगे बढ़कर एआई गवर्नेंस, पारदर्शिता, कंपनियों की जवाबदेही और एआई सिस्टम की विश्वसनीयता तक पहुंचा। टेक कंपनियों से यह अपेक्षा की गई कि वे अपने उन्नत मॉडलों के जोखिम आकलन को सार्वजनिक करें और सुरक्षा उपायों को मजबूत करें।
- तीसरी एआई समिट (Third AI Summit)- तीसरा प्रमुख सम्मेलन 2024 में फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित हुआ। यहां एआई के आर्थिक अवसर, नवाचार, स्टार्टअप इकोसिस्टम, डेटा संरक्षण और नैतिक मानकों पर जोर दिया गया। यूरोप ने एआई रेगुलेशन, डिजिटल अधिकारों और मानवीय मूल्यों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात रखी।
ग्लोबल साउथ के लिए क्यों महत्वपूर्ण है दिल्ली समिट 2026?
अब जब एआई समिट का आयोजन भारत जैसे देशों में हो रहा है, तो इसका महत्व और बढ़ गया है। इससे यह संकेत मिलता है कि एआई पर वैश्विक बहस केवल अमेरिका, यूरोप या विकसित देशों तक ही सीमित नहीं रहेगी, इसमें विकासशील देशों खासकर ग्लोबल साउथ की हिस्सेदारी बढ़ेगी। इसमें विकासशील देशों की चिंताओं- जैसे डिजिटल विभाजन, रोजगार, डेटा संप्रभुता और समावेशी विकास-को भी प्रमुखता से जगह मिलेगी। ग्लोबल साउथ उन देशों का समूह है जो आर्थिक विकास, तकनीकी पहुंच, जलवायु न्याय, वित्तीय सहायता और वैश्विक नीति निर्माण में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग करते हैं। ये देश मुख्य रूप से एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका में स्थित है। UN महासचिव AI में ग्लोबल साउथ की भूमिका पर कहते हैं कि एआई से पूरी दुनिया को लाभ होना चाहिए, न कि यह केवल विकसित देशों या दो महाशक्तियों के लिए आरक्षित विशेषाधिकार हो। उन्होंने कहा- "मैं इस शिखर सम्मेलन के आयोजन के लिए भारत को हार्दिक बधाई देता हूं। यह अत्यंत आवश्यक है कि एआई का विकास हर किसी के लाभ के लिए हो और ’ग्लोबल साउथ’ के देश भी एआई के लाभ का हिस्सा बनें।"
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AI Summit Delhi 2026 भारत के लिए कितना अहम?
आज की तारीख में जब AI को बिजली के आविष्कार के बाद सबसे बड़े परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकी के रूप में देखा जा रहा है, तब भारत का इसमें भागीदार बनाना काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। यह उच्च स्तरीय कार्यक्रम 16 से 20 फरवरी तक आयोजित होने वाला है जो "लोग, धरती और प्रगति के तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों पर आधारित है। यह शिखर सम्मेल भव्य भारत मंडपम में आयोजित होगा, जहां नीति-निर्माता, उद्योग जगत के दिग्गज और प्रौद्योगिकी नवोन्मेषक एकत्र होंगे। भारत के लिए यह वैश्विक शिखर सम्मेलन इस बात को रेखांकित करता है कि वह केवल भागीदार नहीं, बल्कि एआई युग के नियमों, मानकों और अवसरों को आकार देने वाला प्रमुख निर्माता बनना चाहता है। सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) सचिव एस. कृष्णन ने इस समिट को लेकर कहते हैं- "हमारा मुख्य संदेश यह है कि एआई का विकास जन-केंद्रित और समावेशी होना चाहिए। एआई संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुंच होनी चाहिए और लोगों को इस प्रक्रिया के केंद्र में रखा जाना चाहिए।"
कौन-कौन सी बड़ी हस्तियां होंगी शामिल?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा सहित कई वैश्विक नेता सम्मेलन में भाग लेंगे। 45 से अधिक देशों के मंत्रिस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होंगे। संयुक्त राष्ट्र महासचिव और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी भी विचार-विमर्श में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी सम्मेलन को संबोधित करेंगे, एक्सपो का दौरा करेंगे और प्रमुख मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) के साथ संवाद करेंगे। सम्मेलन में सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, डेमिस हसाबिस, डारियो अमोदेई और ब्रैड स्मिथ जैसे प्रमुख वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गज भी शामिल होंगे।
