अमेरिका में यहूदी समुदाय काफी प्रभावशाली है
अमेरिका की राजनीति में यहूदी समुदाय की भूमिका
US Israel Relations: साल 1948 में इजरायल को एक स्वतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया। इस घोषणा के महज 11 मिनट बाद ही अमेरिका ने नए देश को आधिकारिक मान्यता दे दी थी। तब से लेकर आज तक अमेरिका, इजरायल का सबसे बड़ा रणनीतिक, सैन्य और कूटनीतिक सहयोगी बना हुआ है। 1967 की छह दिवसीय जंग हो, क्षेत्रीय संघर्ष हों या हाल के वर्षों में बढ़ा पश्चिम एशियाई तनाव अमेरिका ने इजरायल को सैन्य सहायता, हथियार, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर लगातार समर्थन दिया है।
इसी सहयोग के बल पर इजरायल ने ऐसे क्षेत्र में अपनी मजबूत स्थिति बनाई, जहां लंबे समय तक कई पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंध तनावपूर्ण रहे। हालांकि, हाल के दिनों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ बयान चर्चा में रहे। ट्रंप ने कहा था कि अगर उनका समर्थन नहीं होता तो इजरायल मुश्किल में पड़ सकता था। एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया बातचीत में उन्होंने इजरायली नेतृत्व को लेकर सख्त टिप्पणियां भी कीं।
एक इंटरव्यू के दौरान ट्रंप ने यह भी कहा था, “वे (इजरायल) वही करते हैं जो मैं कहता हूं।” ऐसे बयान राजनीतिक बहस को जरूर जन्म देते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स मानते हैं कि अमेरिका-इजरायल संबंध इतने गहरे हैं कि किसी एक नेता के बयान से उनमें तुरंत बड़ा बदलाव आना आसान नहीं है। सिर्फ अमेरिका ने नहीं, इजरायल ने भी अमेरिका को बहुत कुछ दिया। इतिहास पर नजर डालें तो यह रिश्ता केवल एकतरफा नहीं रहा।
वे (इजरायल) वही करते हैं जो मैं कहता हूं: ट्रंप। AP
1950 और 1960 के दशक में जब पश्चिम एशिया के कई हिस्सों में सोवियत प्रभाव बढ़ रहा था, तब अमेरिका को क्षेत्र में एक स्थिर और भरोसेमंद सहयोगी की जरूरत थी। इजरायल धीरे-धीरे उस भूमिका में उभरा। समय के साथ इजरायल अमेरिका के लिए पश्चिम एशिया में एक अहम रणनीतिक साझेदार, तकनीकी सहयोगी और सुरक्षा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
अमेरिका की राजनीति में यहूदी समुदाय की अहम भूमिका
दोनों देशों के रिश्तों में यहूदी समुदाय की भूमिका भी अहम मानी जाती है। अमेरिका में यहूदी समुदाय को आर्थिक, मीडिया, शिक्षा और राजनीतिक क्षेत्रों में प्रभावशाली माना जाता है। अमेरिका-इजरायल संबंधों को मजबूत करने में कई प्रो-इजरायल समूह और लॉबिंग संगठन सक्रिय भूमिका निभाते हैं, जिनमें अमेरिकन इजरायल पब्लिक अफेयर्स कमिटी (AIPAC) प्रमुख मानी जाती है।
अमेरिका में बड़ी यहूदी आबादी रहती है और चुनावी राजनीति में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकन, दोनों दल लंबे समय से इजरायल को समर्थन देने की नीति अपनाते रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, चुनावी फंडिंग, जनमत और विदेश नीति पर अलग-अलग हित समूहों का असर पड़ता है, जिसकी वजह से इजरायल से जुड़ी नीति अमेरिकी राजनीति का अहम मुद्दा बनी रहती है।
अमेरिका में मौजूद यहूदी समुदाय के लोगों की फोटो। istock
इवैंजेलिकल समुदाय और इजरायल का धार्मिक जुड़ाव
अमेरिका में ईसाई इवैंजेलिकल समुदाय का एक बड़ा वर्ग इजरायल को धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानता है। इस समुदाय के कई लोग बाइबिल की भविष्यवाणियों के संदर्भ में इजरायल के अस्तित्व को विशेष महत्व देते हैं। अमेरिका में इवैंजेलिकल मतदाता प्रभावशाली राजनीतिक समूह माने जाते हैं और चुनावी राजनीति में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। विश्लेषकों का मानना है कि कई अमेरिकी नेता इस वर्ग की प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हैं, जिससे इजरायल के प्रति समर्थन का सामाजिक और राजनीतिक आधार मजबूत बना रहता है।
इवैंजेलिकल समुदाय की फाइल फोटो। istock
अमेरिका क्यों मानता है कि इजरायल उसकी रणनीति का हिस्सा है?
अमेरिका लंबे समय से यह मानता रहा है कि इजरायल की सुरक्षा उसके व्यापक रणनीतिक और राष्ट्रीय हितों से जुड़ी हुई है। अमेरिकी नीति दस्तावेजों और सार्वजनिक बयानों में इजरायल की सैन्य बढ़त बनाए रखने पर लगातार जोर दिया जाता रहा है। इसी वजह से जब भी इजरायल को ईरान, हिज्बुल्लाह या हमास जैसे समूहों से सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने की बात आती है, तब अमेरिका सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग देता दिखाई देता है।
इजरायल की कितनी मदद करता है अमेरिका?
इजरायल की रक्षा क्षमताओं में अमेरिका लंबे समय से अहम साझेदार रहा है। आयरन डोम, डेविड्स स्लिंग और एरो जैसे मिसाइल रक्षा सिस्टम इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था के प्रमुख हिस्से हैं, जिनमें अमेरिकी वित्तीय और तकनीकी सहयोग महत्वपूर्ण माना जाता है।
इजरायली वायुसेना के बेड़े में शामिल एफ-35, एफ-15 और एफ-16 जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान अमेरिकी तकनीक और रक्षा सहयोग से जुड़े हैं। इनके रखरखाव, अपग्रेड और स्पेयर सपोर्ट का रणनीतिक महत्व माना जाता है। अमेरिका और इजरायल के बीच वर्षों से उन्नत हथियार, गाइडेड म्यूनिशन, हेलिकॉप्टर और सैन्य प्लेटफॉर्म से जुड़े समझौते होते रहे हैं। हालांकि, यह कहना कि अमेरिकी समर्थन रुकते ही इजरायल तुरंत सैन्य रूप से निष्क्रिय हो जाएगा, यह कहना ठीक नहीं है। इजरायल के पास अपनी मजबूत रक्षा इंडस्ट्री, घरेलू उत्पादन क्षमता और तकनीकी आधार भी मौजूद है, लेकिन लंबे समय तक अमेरिकी समर्थन में बड़ी कमी आने पर उसकी सैन्य क्षमता, संचालन की गति और रणनीतिक बढ़त पर असर पड़ सकता है।
इजरायली सेना के बेड़े में शामिल हैं कई खतरनाक अमेरिकी लड़ाकू हथियार। istock
सिर्फ हथियार नहीं, अमेरिका इजरायल का कूटनीतिक कवच भी
सिर्फ सैन्य क्षेत्र ही नहीं, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी इजरायल का प्रमुख सहयोगी माना जाता है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कई मौकों पर अमेरिका ने अपने रुख के जरिए इजरायल का समर्थन किया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह समर्थन इजरायल की वैश्विक कूटनीतिक स्थिति के लिए भी महत्वपूर्ण रहा है। यदि भविष्य में अमेरिकी नीति में बड़ा बदलाव आता है, तो इसका असर इजरायल की सैन्य रणनीति, विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर पड़ सकता है। हालांकि इसका प्रभाव कई क्षेत्रीय और वैश्विक कारकों पर भी निर्भर करेगा।
ट्रंप-नेतन्याहू की फाइल फोटो। AP
मोटे तौर पर देखें तो अमेरिका और इजरायल का रिश्ता सिर्फ दोस्ती या सैन्य साझेदारी तक सीमित नहीं है। इसमें इतिहास, धर्म, रणनीति, राजनीति, तकनीक और वैश्विक शक्ति संतुलन सभी शामिल हैं।
इजरायल आज एक मजबूत सैन्य और तकनीकी ताकत है, लेकिन अमेरिकी सहयोग उसे अतिरिक्त सुरक्षा, रणनीतिक बढ़त और वैश्विक समर्थन देता है। दूसरी ओर, अमेरिका के लिए भी इजरायल पश्चिम एशिया में एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है।
