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ट्रंप-जिनपिंग मुलाकात, किन मुद्दों पर बनी बात और किन पर है टकराव, पहले दिन की बैठक से क्या निकला

चीन और अमेरिका के बीच व्यापार और तकनीक बड़ा मुद्दा है। चीन के साथ अमेरिका का व्यापार असंतुलन बहुत ज्यादा है जबकि उन्नत प्रौद्योगिकी (एआई, सेमिकंडक्टर, माइक्रोचिप, इलेक्ट्रिकल व्हीकल) में अमेरिका बहुत आगे है। अमेरिका, चीनी बाजारों तक अपनी ज्यादा पहुंच चाहता है। वह चाहता है कि चीन उसके ज्यादा से ज्यादा उत्पादों को खरीदे।

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Photo : AP
चीन की यात्रा पर डोनाल्ड ट्रंप।
Written by: Alok Rao
Updated May 15, 2026, 13:19 IST

Trump China Visit: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड चीन यात्रा पर हैं। उनका यह दौरा 15 मई को समाप्त हो रहा है। गुरुवार को बीजिंग में ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में उनकी चीन के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ शिष्टमंडल स्तर की वार्ता हुई। दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों के शीर्ष नेताओं की इस बैठक पर विश्व भर की नजरें लगी हुई हैं। चुनौतियों के बीच दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को पहले से ज्यादा स्थिर एवं सहयोगपूर्ण बनाने की कोशिश की है। हालांकि, कई ऐसे मुद्दे हैं जिन पर दोनों देशों के बीच टकराव, गतिरोध और असहमति है जबकि कुछ मुद्दों पर वह आगे बढ़ने के लिए सहमत दिखे हैं। ट्रंप और जिनपिंग के बीच यह बैठक ऐसे समय हुई जब ईरान युद्ध के चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाएं हिल गई हैं। तेल एवं गैस की किल्लत होने से हर जगह महंगाई बढ़ रही है। ताईवान को लेकर अमेरिका और चीन में विवाद है। दोनों देशों के बीच व्यापार असंतुलन, एआई और सेमीकंडक्टर चिप जैसी उन्नत प्रौद्योगिकी को लेकर प्रतिस्पर्धा है।

टेक और ट्रेड

चीन और अमेरिका के बीच व्यापार और तकनीक बड़ा मुद्दा है। चीन के साथ अमेरिका का व्यापार असंतुलन बहुत ज्यादा है जबकि उन्नत प्रौद्योगिकी (एआई, सेमिकंडक्टर, माइक्रोचिप, इलेक्ट्रिकल व्हीकल) में अमेरिका बहुत आगे है। अमेरिका, चीनी बाजारों तक अपनी ज्यादा पहुंच चाहता है। वह चाहता है कि चीन उसके ज्यादा से ज्यादा उत्पादों को खरीदे। चीन को लुभाने के लिए ट्रंप अपने साथ एलन मस्क, टिम कुक और जेनसेन हुआन जैसे टेक एवं एआई के दिग्गजों को अपने साथ लेकर आए। चीन का एआई चिप, सेमीकंडक्टर में हाथ तंग है। बीजिंग अमेरिका से इन उन्नत टेक्नॉलजियों तक अपनी पहुंच चाहता है। तो वहीं ट्रंप चाहते हैं कि चीन उनके ऊर्जा उत्पाद, उसके किसानों के सोयाबीन और अन्य उत्पाद खरीदे ताकि व्यापार असंतुलन में थोड़ी कमी लाई जा सके। टेक और ट्रेड के इन सभी मुद्दों पर दोनों देशों के बीच बातचीत हुई है लेकिन वार्ता के पहले दिन अभी इस पर कोई अंतिम सहमति और समझौता नहीं हो सका है। 15 मई को ट्रंप और जिनिपिंग के बीच होने वाली बातचीत में इस पर सहमति बनने की उम्मीद जताई जा रही है।

us China

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चीन के बाजार पर चर्चा

रिपोर्टों में अमेरिकी ट्रेड प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर के मुताबिक बैठक में अमेरिकी किसानों के उत्पादों एवं बीफ खरीदने पर चर्चा हुई। दरअसल, अमेरिकी किसान अपने सोयाबीन, बीफ और पोल्ट्री के लिए चीन के बाजार तक ज्यादा पहुंच चाहते हैं लेकिन इस पर कोई डील की घोषणा नहीं हुई। व्हाइट हाउस का कहना है कि अमेरिकी कंपनियों के लिए चीनी बाजारों का विस्तार करने और अमेरिका में चीन का निवेश बढ़ाने पर बात हुई। चीन की समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक शी ने अपने अमेरिकी समकक्ष से कहा कि चीन अपने बाजारों तक अमेरिका को व्यापक पहुंच देगा। जिनिपंग ने बताया कि कृषि, स्वास्थ्य और पर्यटन के क्षेत्र यदि दोनों देश अपना सहयोग बढ़ाते हैं तो यह अमेरिका और चीन दोनों के लिए लाभकारी होगा।

ताइवान: सबसे संवेदनशील मुद्दा

ट्रंप दौरे के समय ताइवान मुद्दे पर चीन ने बहुत अधिक संवेदनशीलता दिखाई है। ट्रंप का दौरा शुरू होने से पहले चीन ने अमेरिका के लिए 'लक्ष्मण' रेखा खींच दी। अमेरिका में चीन स्थित दूतावास ने साफ कर दिया कि वह चार मुद्दों पर कोई बात नहीं करेगा। इसमें पहला ही ताइवान का मुद्दा है। चीन ने अमेरिका को आगाह करते हुए कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ताइवान मुद्दे को नहीं उठाएंगे। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने यदि इस मुद्दे को उठाया तो बात बिगड़ जाएगी। चीन की यूएस से झगड़ा हो जाएगा। इसका असर भी देखने को मिला बीजिंग में जब पत्रकारों ने ट्रंप से ताइवान मुद्दे पर उनकी राय जाननी चाही तो उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। वह चुप रहे। बैठक के दौरान जिनपिंग ने कथित रूप से कहा कि चीन और अमेरिका संबंधों में ताइवान का सवाल सबसे अहम है। यदि इसे सही ढंग से पेश नहीं किया गया तो दोनों देशों में या तो झगड़ा हो जाएगा या दोनों देश संघर्ष की तरफ बढ़ जाएंगे।

ईरान और ऊर्जा संकट पर भी चर्चा

ट्रंप इस बैठक में ईरान संघर्ष और वैश्विक तेल बाजार स्थिरता पर चीन का सहयोग चाहते थे। ट्रंप ने कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो वे होर्मुज जलडमरूमध्य को खुला रखने में मदद करना चाहेंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को बयान जारी कर 'व्यापक और स्थायी युद्धविराम' की मांग की। साथ ही कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मांग के अनुरूप समुद्री व्यापार मार्ग जल्द खोले जाने चाहिए। तेल कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति मार्गों में बाधा से चीन की आयात लागत बढ़ी है, जबकि दुनिया भर में महंगाई पर भी असर पड़ा है। ट्रंप का मानना है कि चीन, ईरान पर अपना प्रभाव इस्तेमाल कर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति को स्थिर रखने में मदद कर सकता है। व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति बाधित न हो, इसके लिए यह जलडमरूमध्य खुला रहना चाहिए। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि शी जिनपिंग ने अमेरिकी तेल खरीद बढ़ाने में रुचि दिखाई ताकि चीन की खाड़ी देशों और होर्मुज मार्ग पर निर्भरता कम हो सके।

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चीन ने सीमित रखा ईरान मुद्दा

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बीजिंग पहुंचने से पहले कहा था कि वॉशिंगटन चाहता है कि चीन ईरान संकट के समाधान में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाए। हालांकि, चीन खुद को एक कूटनीतिक मध्यस्थ के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह सीधे तौर पर संघर्ष में गहराई से शामिल होने से बच रहा है। दिलचस्प बात यह रही कि चीन की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में ईरान मुद्दे को काफी कम महत्व दिया गया। चीनी बयान मुख्य रूप से व्यापार, ताइवान और द्विपक्षीय स्थिरता पर केंद्रित रहे, जबकि मध्य पूर्व का केवल संक्षिप्त उल्लेख किया गया। इस बीच, बीजिंग में आयोजित राजकीय भोज के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 24 सितंबर को व्हाइट हाउस आने का निमंत्रण दिया। अब दोनों देशों के बीच आगे और बातचीत होने की उम्मीद है, ताकि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं व्यापार समझौते में वह बड़ी सफलता हासिल कर सकें जो इस बैठक में नहीं मिल पाई।

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