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क्या हिंदी पट्टी राज्यों की राह पर कर्नाटक कांग्रेस... सिद्दारमैया और शिवकुमार की खींचतान में डूब न जाए ग्रैंड ओल्ड पार्टी की नइया?

Karnataka CM Post Conflict: कर्नाटक में मुख्यमंत्री बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। उपमुख्यमंत्री शिवकुमार खेमे के तीन विधायकों और एक मंत्री ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इसके बाद शिवकुमार का एक बयान सामने आया जिसमें उन्होंने कहा कि सभी 140 विधायक मंत्री, मुख्यमंत्री बनने लायक हैं।

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Photo : Times Now Digital
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार
Authored by: Anurag Gupta
Updated Nov 21, 2025, 16:53 IST
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Karnataka CM Post Conflict: ग्रैंड ओल्ड पार्टी कांग्रेस एक बार फिर उसी राह पर आकर खड़ी हो गई, जहां उसे दो रास्ते दिखाई दे रहे हैं। एक रास्ता पुराना और आजमाया हुआ है, जबकि दूसरा वो है, जिस पर ढाई घर चलने की बातें होती रही हैं। कांग्रेस पार्टी पर दिलचस्पी रखने वाले लोग ढाई घर की कहानी बखूबी समझते हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ और राजस्थान में इसकी झलक देखी है, लेकिन मध्य प्रदेश में हुई खींचतान के बाद पार्टी को वहां धरातल में जाते भी देखा। हिंदी पट्टी राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान) में कांग्रेस की स्थिति को आप सभी ने देखा है और कुछ ऐसा ही आलम अब कर्नाटक में दिखाई दे रहा है। आए दिन CM बदलाव की अटकलें तेज हो जाती हैं। कर्नाटक कांग्रेस के विधायक बेंगलुरू से दिल्ली आ जाते हैं और समय-समय पर नवंबर क्रांति का मुद्दा भी उठने लगता है जिसके बाद मुख्यमंत्री सिद्दारमैया का रटा रटाया बयान सामने आता है कि मैं सत्ता में बना रहूंगा और अपना पांच वर्ष का कार्यकाल पूरा करूंगा।

कांग्रेस में फिर छाई, वर्चस्व की लड़ाई

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी नेताओं के बीच जारी खींचतान पहली बार नहीं देखी है। कर्नाटक में सिद्दारमैया और शिवकुमार के बीच की खींचतान कांग्रेस आलाकमान की चौखट तक आ पहुंची है। शिवकुमार गुट के कुछ विधायकों ने दिल्ली में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की तो दूसरी ओर सिद्दारमैया ने अगला बजट पेश करने का दावा करते हुए अपनी मंशा जाहिर की।

कांग्रेस ने 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में कामयाबी हासिल करने के बाद सिद्दारमैया को सत्ता सौंप दी थी जिसकी वजह से प्रदेशाध्यक्ष डीके शिवकुमार खफा हो गए और कांग्रेस उन्हें मनाने में जुट गई। शिवकुमार मान भी गए और वह प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए उपमुख्यमंत्री भी बन गए, लेकिन अब शिवकुमार समर्थक पावर शेयरिंग के ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले को लेकर कांग्रेस आलाकमान पर दबाव बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

ढाई घर वाली लड़ाई दिल्ली तक आई

कर्नाटक में मुख्यमंत्री के तौर पर सिद्दारमैया का ढाई साल का कार्यकाल गुरुवार को पूरा हो गया और उसी दिन शिवकुमार के चार समर्थक, जिनमें से एक सिद्दारमैया सरकार में मंत्री भी हैं, दिल्ली पहुंचे, जहां मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद से नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को और हवा मिल गई। कांग्रेस विधायकों की खरगे संग मुलाकात को लेकर शिवकुमार का बयान भी सामने आया। समाचार एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में शिवकुमार ने कहा, ''सभी अपने नेताओं से मिलने के हकदार हैं। आप उन्हें रोक नहीं सकते, आप उन्हें मना नहीं कर सकते, क्योंकि बहुत से लोग मंत्रियों के साथ जा रहे हैं। उनमें से कुछ मुख्यमंत्री के साथ जा रहे हैं। उन्हें कौन रोकेगा? कोई उन्हें नहीं रोकेगा...।"

'सभी 140 विधायक CM बनने लायक'

शिवकुमार ने सिद्दारमैया को कार्यकाल पूरा करने के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सभी 140 विधायक मंत्री, मुख्यमंत्री बनने के लायक हैं। वह सबकुछ बन सकते हैं... मुख्यमंत्री ने कहा कि वह 5 साल पूरे करेंगे। मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं। हम सब उनके साथ काम करेंगे। शिवकुमार ने आगे बताया, ''मुझे डिनर के बारे में पता नहीं है। डिनर चल रहा था। वह एक नए प्रदेशाध्यक्ष, 4-5 उपमुख्यमंत्री बनाना चाहते थे। सभी मीटिंग पिछले ढाई साल से चल रही हैं। यह कोई नई बात नहीं है। उन्हें और मीटिंग करने दें।''

कैबिनेट फेरबदल या CM पद से सिद्दारमैया की रवानगी?

एक तरफ शिवकुमार समर्थकों ने खरगे संग बैठक की। हालांकि, बैठक में क्या बातचीत हुई? इसकी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। दूसरी तरफ सिद्दारमैया कैबिनेट फेरबदल की बात बार-बार दोहरा रहे हैं और मुख्यमंत्री बदलाव की अटकलों को बकवास करार दे रहे हैं। हालिया बयान में सिद्दारमैया ने कहा, ''आलाकमान ही कैबिनेट फेरबदल करता है। क्या उन्होंने कुछ कहा?... शिवकुमार, मुझे और सभी को सुनना होगा कि आलाकमान क्या कहता है... मैं अगला बजट खुद पेश करूंगा, मैं आगे भी जारी रखूंगा, मैं कल मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात करूंगा।''

क्या देवराज अर्स का रिकॉर्ड तोड़ पाएंगे सिद्दारमैया

कर्नाटक में अगर मुख्यमंत्री बदला जाता है तो सिद्दारमैया सबसे ज्यादा समय तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड कायम नहीं कर पाएंगे। उनकी राह पर शिवकुमार सबसे बड़े रोड़े साबित हो रहे हैं और अगर सिद्दारमैया को देवराज अर्स का रिकॉर्ड तोड़ना है तो कम से कम जनवरी 2026 तक मुख्यमंत्री के पद पर बने रहना होगा।

हिंदी पट्टी राज्यों से सीखें कांग्रेस

कांग्रेस को अपने विगत अनुभवों से सीख लेते हुए कर्नाटक कांग्रेस के भीतर जारी अंतर्कलह को समाप्त करना होगा, क्योंकि राज्य में ढाई साल बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ऐसे में पार्टी को एकजुट कर रखने की जरूरत है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में जारी खींचतान के बाद जब कांग्रेस चुनावों में गई तो सत्ता बरकरार रखने में कामयाबी नहीं मिली थी। हालांकि, शिवकुमार गांधी परिवार के करीबी हैं और वह धैर्यपूर्वक अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन समय-समय पर उनके समर्थक दबाव भी बना रहे हैं।

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