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Assembly Election Analysis: रिकॉर्ड मतदान से किसे फायदा? क्या कहता है असम, केरल और पुडुचेरी का पिछला ट्रेंड

Assembly Election Analysis: विधानसभा चुनाव 2026 (Assembly Elections 2026) के दौरान असम, केरल और पुडुचेरी में मतदाताओं में गजब का उत्साह देखने को मिला। असम में 85.38%, केरल में 78.03% और पुडुचेरी में 89.83% वोटिंग हुई है।

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असम में 85%, केरल में 77% और पुडुचेरी में 89% वोटिंग
Curated by: Shishupal Kumar
Updated Apr 10, 2026, 16:53 IST

Assembly Election Analysis: 9 अप्रैल को दो राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों (Assembly Elections 2026) के लिए वोटिंग हुई। असम, केरल और पुडुचेरी- इन तीनों जगहों पर रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग हुई। मतदान प्रतिशत बढ़ने के साथ ही राजनीतिक दलों की धड़कनें भी बढ़ गई हैं। असम में 85.38%, केरल में 78.03% और पुडुचेरी में 89.83% वोटिंग ने राजनीतिक पंडितों को भी चौंका दिया है। कारण स्पष्ट है- जब भी मतदान प्रतिशत बढ़ता है, तो एक अलग ही ट्रेंड दिखने को मिलता है और लैंडस्लाइड विक्ट्री का समीकरण बनने लगता है, लेकिन हर बार ऐसा हो, यह जरूरी नहीं है।

अपने-अपने दावे

मतदान प्रतिशत बढ़ने पर जहां विपक्षी पार्टी कांग्रेस खुश दिख रही है, उसे उम्मीद है कि असम, केरल और पुडुचेरी में उसकी सरकार बन सकती है, क्योंकि मतदान प्रतिशत, सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है।

  • असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने कहा कि विधानसभा चुनाव में जबरदस्त मतदान ’’सामान्य बात नहीं है बल्कि ऐतिहासिक’’ है। शर्मा ने कहा कि इस चुनाव का परिणाम हमारे लोगों के चेहरों पर उम्मीद, गर्व और खुशी के रूप में पहले से ही दिखाई दे रहा है।
  • कांग्रेस की असम इकाई के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने राज्य में बदलाव के लिए बड़ी संख्या में मतदान करने के लिए लोगों को धन्यवाद दिया। गोगोई ने एक बयान में कहा कि लोगों ने "नए बोर-असम’’ (नए और ग्रेटर असम) और नए नेतृत्व की उम्मीद में मतदान किया। उन्होंने कहा, ’’अब निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है कि वह इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) की सुरक्षा सुनिश्चित करे और चार मई को मतों की सटीक गिनती कराए।’’
  • मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता सी एन मोहनन ने मतदाता सूचियों में पुनरीक्षण को इस वृद्धि का कारण बताया। उन्होंने कहा, ’’मृत या पलायन कर चुके लोगों के नाम हटाए जाने के कारण मतदान प्रतिशत में वृद्धि हुई है।’’
  • कांग्रेस नेता दीप्ति मैरी वर्गीज ने कहा कि इस प्रवृत्ति का गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, "आमतौर पर यह प्रवृत्ति देखी जाती है कि जब मतदान प्रतिशत बढ़ता है, तो यह यूडीएफ के लिए अनुकूल हो जाता है।’’
  • भाजपा नेता के.एस. शैजू ने इस वृद्धि को जमीनी स्तर पर मतदाताओं के व्यवहार से जोड़ा। उन्होंने कहा, ’’हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि इस बार अधिक महिला मतदाता मतदान करने आई हैं।’’ उन्होंने अपनी पार्टी की संभावनाओं के बारे में भी विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ’’महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी भाजपा के पक्ष में होगी।’’

असम में क्या कहता है वोटिंग का पैटर्न?

सबसे पहले बात असम की। असम विधानसभा का चुनाव इस बार चर्चा के केंद्र में रहा है। मुख्यमंत्री हिमंता के विवादित बयानों से लेकर कांग्रेस के आरोपों तक, यह चुनाव राजनीतिक गलियारों में सबसे हॉट टॉपिक रहा है। असम में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। यहां वोट प्रतिशत में सात से आठ प्रतिशत की बढ़ोतरी सरकार को पलट देती है। लेकिन इस बार सिर्फ साढ़े तीन प्रतिशत की वृद्धि दिख रही है, जो असम में वर्तमान सरकार की वापसी के ही संकेत हैं।

असम में विधानसभा चुनाव 2021 में 82.42 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो 2016 के 84.7 प्रतिशत से कम था। तब सरकार बीजेपी की थी और फिर 2021 में भी बीजेपी ही दोबारा सत्ता में आई। लेकिन 2016 में यह मतदान प्रतिशत 2011 के 76 प्रतिशत के मुकाबले लगभग 8 प्रतिशत ज्यादा था। 2011 में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन जैसे ही मतदान प्रतिशत में 8 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई, कांग्रेस की सरकार चली गई।

9 अप्रैल को हुए मतदान की डिटेल

9 अप्रैल को हुए मतदान की डिटेल

केरल में क्या कहता है पिछला समीकरण?

केरल की अगर हम बात करें, तो यहां मामला पलट सकता है। आमतौर पर मतदान में हल्की-सी वृद्धि भी यहां सरकार पलट देती है। केरल में मतदान प्रतिशत हमेशा से ही अच्छा रहा है। 70-75 प्रतिशत मतदान यहां आम है। केरल में एक से तीन प्रतिशत तक मतदान की वृद्धि सरकार पलट देती है। इस बार केरल में 78.03 प्रतिशत वोटिंग हुई है। 2021 के विधानसभा चुनाव में केरल में 76 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, मतलब इस बार 2 प्रतिशत अधिक मतदान हुआ है। यह 2 प्रतिशत बढ़ा हुआ मतदान सत्ता परिवर्तन का संकेत दे रहा है। यही कारण है कि कांग्रेस यहां बढ़े हुए मतदान प्रतिशत से उत्साहित दिख रही है।

पुडुचेरी में मतदान प्रतिशत से क्या निकल रहा है समीकरण?

पुडुचेरी में इस समय भाजपा गठबंधन की सरकार है। इस बार पुडुचेरी में मतदान प्रतिशत 90 प्रतिशत रहा है, जो क्षेत्र के भारत में विलय के बाद 1964 में हुए पहले चुनाव में दर्ज मतदान प्रतिशत के बाद अब तक का सर्वाधिक है। यहां की राजनीति आमतौर पर तमिलनाडु से प्रभावित रही है। बढ़ा हुआ मतदान प्रतिशत सत्ता परिवर्तन की ओर इशारा कर रहा है, लेकिन हमेशा से ऐसा ही नहीं रहा है। 1969 (81.59%) और 1974 (85.32%)- इन दोनों वर्षों में जहां मतदान प्रतिशत में वृद्धि के साथ ही सत्ता परिवर्तन हुआ, तो वहीं 2006 (86%) में रिकॉर्ड वोटिंग के बाद भी कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी। केंद्र-शासित प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या लगभग 9.50 लाख है। इनमें 5.03 लाख महिला मतदाता हैं, जो 4.46 लाख पुरुष मतदाताओं से अधिक हैं। कुल 30 विधानसभा सीटों में से 23 पुडुचेरी क्षेत्र, पांच कराईकल और एक-एक माहे तथा यनम में हैं।

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चुनाव आयुक्त भी गदगद

असम, केरल और पुडुचेरी की कुल 296 विधानसभा सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें कुल 5.31 करोड़ से अधिक मतदाता शामिल थे। मतदान के संबंध में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा, "असम, केरल और पुडुचेरी में 2026 के विधानसभा चुनाव न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे लोकतांत्रिक जगत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि हैं।

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