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श्रीनगर में पोस्टर, 2,900 KG विस्फोटक, AK-47, कैसे जम्मू-कश्मीर पुलिस ने फरीदाबाद में किया आंतकी नेटवर्क का पर्दाफाश

जांच एजेंसियों को लगता है कि डॉक्टर और फरीदाबाद में विस्फोटक रखने वाले शख्स के तार आपस में जुड़े हुए हैं और ये दोनों किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा हैं। इनके सीमा पार से मदद मिलने की भी आशंका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये उत्तर भारत में किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे।

Faridabad

फरीदाबाद में आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश। तस्वीर-PTI

Faridabad Terror Network: दिल्ली से सटे फरीदाबाद में बीते रविवार को करीब 360 किलोग्राम विस्फोटक (अमोनियम नाइट्रेट), एक एके-47, गोला-बारूद की बरामदगी ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। यहां धौज थाना क्षेत्र में फतेहपुर के तगा गांव में किराए के एक कमरे में विस्फोटक और हथियार छिपाकर रखे गए थे। विस्फोटक के इस जखीरे से पर्दा तब उठा जब जम्मू-कश्मीर पुलिस ने बीते रविवार को इंटेलिजेंस ब्यूरो और फरीदाबाद पुलिस की मदद से गांव में छापा मारा और कमरे की तलाशी ली। जांच एजेंसियों को शक है कि यह विस्फोटक दिल्ली ब्लास्ट में इस्तेमाल हुए नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। आतंक के इस नेटवर्क का भंडाफोड़ सहारनपुर से एक कश्मीरी डॉक्टर की गिरफ्तारी के कुछ दिनों बाद हुआ है। इस डॉक्टर पर श्रीनगर में आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में पोस्टर लगाने का आरोप है।

जांच एजेंसियों को लगता है कि डॉक्टर और फरीदाबाद में विस्फोटक रखने वाले शख्स के तार आपस में जुड़े हुए हैं और ये दोनों किसी बड़े आतंकी नेटवर्क का हिस्सा हैं। इनके सीमा पार से मदद मिलने की भी आशंका है। जांच एजेंसियों का मानना है कि ये उत्तर भारत में किसी बड़े आतंकी हमले को अंजाम देने की साजिश रच रहे थे। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक जम्मू कश्मीर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने विस्फोटक की बरामदगी को एक बड़ी कामयाबी बताया। अधिकारी ने कहा कि इससे एक बड़ा आतंकवादी हमला टल गया। यहां यह जानना जरूरी है कि आतंक के इस नेटवर्क के बारे में पुलिस को कैसे संदेह हुआ और जम्मू-कश्मीर पुलिस आखिर फरीदाबाद कैसे पहुंची?

श्रीनगर पोस्टर्स से मिले अहम सुराग

न्यूज 18 की रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि आतंक की साजिश के तार कश्मीर से जुड़े हुए लगते हैं क्योंकि बीते 27 अक्टूबर को आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के समर्थन में श्रीनगर के कई इलाकों में पोस्टर देखे गए। पोस्टर्स नजर आने के बाद स्थानीय पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू की। जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने जब सीसीटीवी फुटेज खंगाले तो उन्हें आदिल राथर पोस्टर चिपकाता हुआ नजर आया। इसके नौ दिन बाद यानी छह नवंबर को इसकी लोकेशन उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में मिली। इसके बाद आदिल को यहां गिरफ्तार कर लिया गया।

सरकार मेडिकल कॉलेज में काम करता था आदिल

जांचकर्ताओं का कहना है कि आदिल पिछले साल के अक्टूबर महीने तक अनंतनाग के एक सरकार मेडिकल कॉलेज में काम करता था। पुलिस ने जब इसके लॉकर की तलाशी ली तो उसे वहां से कथित रूप से एक असाल्ट राइफल मिली। राइफल को लॉकर में छिपाकर रखा गया था। पुलिस ने आदिल को लेकर जब जांच आगे बढ़ाया तो उसका अंसार गजवत उल हिंद (एजीएच) से कनेक्शन सामने आया। एजीएच एक आतंकवादी संगठन है जो कि कश्मरी में शरिया कानून और भारत में जिहाद छेड़ने की सोच रखता है। ये चीजें सामने आने के बाद पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस को लगा कि राथर और उसके सहयोगी घाटी में एजीएच को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं।

  • फरीदाबाद के धौज गांव से बरामद हुए विस्फोटक और हथियार
  • अक्टूबर में श्रीनगर में दिखे जैश के समर्थन वाले पोस्टर
  • फुटेज में पोस्टर चिपकाता हुआ दिखाई दिया आदिल राथर
  • अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज में काम करता था आदिल
  • आदिल के लॉकर में छिपाकर रखी गई राइफल हुई बरामद

फिर मुजम्मिल शकील का नाम सामने आया

जम्मू एवं कश्मीर पुलिस ने इस दिशा में अपनी जांच को जब आगे बढ़ाया तो डॉ. मुजम्मिल शकील का नाम सामने आया। शकील भी डॉक्टर है। समझा जाता है कि वह भी आदिल के साथ जुड़ा हुआ है। खुफिया इनपुट पर काम करते हुए जम्मू एवं कश्मीर पुलिस स्थानीय अधिकारियों के साथ शकील के फरीदाबाद स्थित किराए के मकान पर छापा मारा। इस छापेमारी में वहां से जितनी विस्फोटक सामग्री एवं हथियार बरामद हुए उसे देखकर पुलिस सन्न रह गई। धौज गांव में जम्मू कश्मीर पुलिस ने इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) और फरीदबाद पुलिस के साथ मिलकर शकील के किराए वाले घर की गहन तलाशी ली।

अमोनियम नाइट्रेट से भरे 14 बैग बरामद हुए

रिपोर्टं में पुलिस अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि इस ऑपरेशन में अमोनियम नाइट्रेट से भरे 14 बैग बरामद हुए। इनका वजन करीब 100 किलोग्राम था। इसके अलावा मौके से 84 जिंदा कारतूस, एक एके-47 राइफल, 20 टाइमर और पांच लीटर रसायन मिले। कुल मुलाकर शकील के ठिकाने से आईईडी बनाने में इस्तेमाल होने वाले 48 सामान जब्त हुए। न्यूज 18 की रिपोर्ट में स्थानीय और जांच से जुड़े सूत्रों के हवाले से कहा गया कि शकील यहां के जिस अल-फलाह अस्पताल में काम कर रहा था, उसकी स्थापना कथित रूप से खाड़ी देश से आई फंडिंग से हुई। इस अस्पताल का निर्माण दानदाता परिवार के एक सदस्य की याद में किया गया।

  • धौज गांव में शकील के ठिकाने से अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी खेप बरामद
  • 14 बैग में रखा गया था अमोनियम नाइट्रेट, इसका वजन 100 किलोग्राम
  • 84 जिंदा कारतूस, एक एके-47 राइफल, 20 टाइमर, 5 लीटर रसायन जब्त
  • अल-फलाह अस्पताल की स्थापना खाड़ी देश से आई फंडिंग से हुई
  • अस्पताल में काम करते हैं ज्यादातर मुस्लिम समुदाय के लोग

मुस्लिम समुदाय से हैं अस्पताल के ज्यादातर लोग

बताया जाता है कि अस्पताल के ज्यादातर कर्मचारी और शिक्षण कार्य से जुड़े लोग मुस्लिम समुदाय से हैं। शीर्ष खुफिया सूत्रों का कहना है कि यहां काम करने वाले लोग हो सकता है कि 'स्लीपर सेल' के रूप में काम कर रहे हों। दिल्ली से फरीदाबाद की नजदीकी और धौज जैसा अर्ध-शहरी इलाका इस तरह के 'स्लीपर सेल' को छिपने के लिए एक मुफीद ठिकाना बनाता है। सुरक्षा एजेंसियों की रडार में आए बिना यहां से आतंकी नेटवर्क संचालित करना आसान हो जाता है।

ज्यादा मात्रा में आईईडी तैयार किया जा सकता है

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती फॉरेंसिक जांच से यह स्पष्ट हो चुका है कि बरामद सामग्रियां विस्फोट करने वाली हैं, इनकी आगे की जांच की जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक मौके से मिले अमोनियम नाइट्रेट और अन्य सामग्रियों के इस्तेमाल से अत्यंत तीव्रता वाले और ज्यादा मात्रा में आईईडी तैयार किया जा सकता है और इनके विस्फोट बड़े पैमाने पर तबाही मचाई जा सकती है। ये विस्फोटक कहां से आए और इसे यहां तक पहुंचाने में किन लोगों की संलिप्तता रही है, जांचकर्ता इसकी जांच कर रहे हैं। इस आतंकी नेटवर्क के लिए फंड कहां से आता था, यह भी जांच के दायरे में है। आरोपियों के खिलाफ आर्म्स एक्ट एंड द अनलॉफुल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज हुए हैं। अब जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के ऑपरेशनल ढांचे को पूरी तरह से निष्क्रिय करने में जुटी हैं।

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आलोक कुमार राव
आलोक कुमार राव Author

19 वर्षों से मीडिया जगत में सक्रिय आलोक राव ने प्रिंट, न्यूज एजेंसी, टीवी और डिजिटल चारों ही माध्यमों में काम किया है। इस लंबे अनुभव ने उन्हें समाचारो... और देखें

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