बिहार में नई सरकार का हुआ गठन। तस्वीर-टाइम्स नाउ नवभारत
Nitish Kumar Cabinet Full List: बिहार में गुरुवार को नई सरकार का गठन हो गया। जनता दल-यूनाइटेड के सुप्रीमो नीतीश कुमार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने मुख्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई। नीतीश के अलावा बिहार मंत्रपरिषद के लिए 26 नवनिर्वाचित विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई गई। सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा को एक बार फिर से डिप्टी सीएम बनाया गया है। मंत्रिपरिषद में महिलाओं मुस्लिम सहित नए चेहरों को भी जगह दी गई है। शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा सहित एनडीए के सभी बड़े नेता और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री उपस्थित थे। नीतीश कैबिनेट में शामिल मंत्री किस सीट से जीतकर पहुंचे हैं और उन्होंने किसे हराया, इसके बारे में हम यहां जानेंगे-
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दिग्गज नेता सम्राट चौधरी तारापुर सीट से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। इस सीट पर सम्राट ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता अरुण कुमार को 45 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। इस सीट पर सम्राट चौधरी को 122480 वोट मिले। चौधरी को बीजेपी में शामिल हुए अभी महज 7 साल पूरे हुए हैं। वो पहले प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष बने और पिछली सरकार में उपमुख्यमंत्री थे। मुंगेर के लखनपुर गांव में जन्में सम्राट चौधरी के पिता शकुनी चौधरी छह बार विधायक और सांसद रहे हैं। उनकी मां पार्वती देवी भी तारापुर सीट से विधायक रही हैं।
भाजपा नेता विजय कुमार सिन्हा लखीसराय सीट से जीते हैं। इस सीट पर सिन्हा ने कांग्रेस के अमरेश कुमार को 24 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। विजय कुमार सिन्हा नीतीश कुमार की पिछली सरकार में दूसरे उपमुख्यमंत्री थे। उन्होंने लखीसराय सीट से पांचवीं बार जीत दर्ज की है. इस सीट पर उन्होंने कांग्रेस के अमरेश कुमार को 24 हजार से अधिक वोटों से हराया था। सिन्हा का जन्म लखीसराय के तिलकपुर गांव में हुआ था। वो आरएसएस और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े रहे हैं।
जद-यू नेता विजय कुमार चौधरी सराय रंजन सीट से जीते हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद के अरबिंद कुमार सहनी को 20 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। वैसे तो यह चौधरी की सातवीं जीत है। इस बार उन्हें और बड़ी जिम्मेवारी मिलने के आसार से क्षेत्र के लोग गदगद हैं। विजय कुमार चौधरी ने 1982 के उपचुनाव में दलसिंहसराय से जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। 2010 में राजद के रामाश्रय सहनी को 17,557 मतों से पराजित किया था। उस समय जदयू भाजपा एक साथ थी।
जनता दल यूनाइटेड के नेता बीजेंद्र प्रसाद यादव सुपौल सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने कांग्रेस के मिनातुल्लाह रहमानी को करीब आठ हजार वोटों से हराया। वे लालू प्रसाद यादव से लेकर नीतीश कुमार तक, हर सरकार में मंत्री रहे हैं। उन्होंने 1990 से लगातार सात बार विधायक का चुनाव जीता है। विजेंद्र यादव को नीतीश कुमार का करीबी माना जाता है और जनता दल (यूनाइटेड) में उनका काफी सम्मान है। उन्होंने बिहार की राजनीति में अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
जद-यू नेता श्रवण कुमार ने बिहार की नालंदा सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट पर उन्होंने कांग्रेस के कौशलेंद्र कुमार को 33 हजार से ज्यादा वोटों से हराया। श्रवण कुमार का जन्म 20 अगस्त 1957 को नालंदा जिले के एक कुर्मी परिवार में हुआ था। पिता का नाम हरि सिंह है। अपनी शुरुआती पढ़ाई नालंदा में की और 1977 में एस.पी.एम. कॉलेज, बिहारशरीफ से इंटरमीडिएट (12वीं) की डिग्री हासिल की। राजनीति और सामाजिक सेवा में सक्रिय होने से पहले उन्होंने कृषि और सामाजिक कार्य को अपना पेशा बनाया था।
भाजपा नेता मंगल पांडे इस बार सिवान सीट से जीते हैं। इस सीट पर इन्होंने राजद के अवध बिहार चौधरी को 9370 वोटों से हराया। छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर सीवान के भिरगू बलिया गांव के रहने वाले मंगल पांडेय का राजनीतिक जीवन 1987 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़ने के साथ शुरू हुआ। दो साल बाद 1989 में वे भाजपा के प्राथमिक सदस्य बने। 1992 में उन्हें भाजपा सीवान इकाई की कार्यकारी समिति का सदस्य चुना गया। 1995 में वे सारण क्षेत्र भाजयुमो प्रभारी बने और 1997 में उन्हें भाजयुमो का राज्य सचिव बनाया गया।
बिहार भाजपा अध्यक्ष दिलीप कुमार जायसवाल को विधान परिषद कोटे से नीतीश कैबिनेट में शामिल किया गया है। वह भाजपा के एमएलसी हैं। पिछले साल सम्राट चौधरी को डिप्टी सीएम बनाए जाने के बाद उनकी जगह जायसवाल को बिहार भाजपा का अध्यक्ष बनाया गया। दिलीप कुमार जायसवाल एम.एससी., एमबीए, पीएच.डी., एम.फिल. हैं। उन्होंने वर्ष 1998 में बीएनएम विश्वविद्यालय मधेपुरा से पीएच.डी. की है। डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल राजनीति में बहुत समय से हैं। मुख्य रूप से एक सामाजिक कार्यकर्त्ता के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी। हालांकि, वे पार्टी से शुरू से जुड़े रहे हैं। पहली बार वे 2009 में पूर्णिया, अररिया व किशनगंज के स्थानीय प्राधिकरण से विधान परिषद चुने गए थे।
डॉ. अशोक चौधरी जद-यू कोटे से बिहार विधान परिषद के सदस्य हैं। जदयू में आने से पूर्व अपनी राजनीति की शुरुआत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से की थी। वे साल 2000 में पहली बार बिहार के बरबीघा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बने और इसके साथ ही उन्हें तत्कालीन राबड़ी मंत्रिमंडल में कारा राज्य मंत्री बनाया गया था। बाद में अशोक चौधरी को 2013 में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी का अध्यक्ष भी बनाया गया था। उन्होंने 2018 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस छोड़कर जनता दल (यूनाइटेड) का दामन थाम लिया था।[
जनता दल यूनाइटेड की नेता लेशी सिंह धमदाहा सीट से विजयी हुई हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद के संतोष कुमार को 55159 वोटों से हराया। धमदाहा सीमांचल की अहम विधानसभा सीट रही है. यहां 2015 से जनता दल यूनाइडेट का वर्चस्व रहा है। 2020 में लेशी सिंह ने आरजेडी के दिलीप कुमार यादव को 33,954 वोटों से हराया था। 2015 में भी लेशी सिंह ने आरएलएसपी के शिवशंकर ठाकुर को 30 हज़ार से ज़्यादा वोटों से हराया था। लेशी सिंह बिहार महिला आयोग की अध्यक्ष भी रही हैं।
जद-यू नेता मदन सहनी बहादुरपुर सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद के भोला यादव को 12011 वोटों से हराया। वर्ष 2025 के विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री सह जदयू के प्रत्याशी मदन सहनी को सर्वाधिक मत अपनी पंचायत खराजपुर नहीं ओझौल पंचायत से प्राप्त हुए जो उनकी जीत का आधार बना।
भाजपा नेता नितिन नबीन बांकीपुर सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद नेता रेखा कुमारी को 51936 वोटों से हराया। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में नितिन नवीन बांकीपुर विधानसभा सीट से भारी मतों से विजयी हुए हैं। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी आरजेडी प्रत्याशी रेखा कुमारी को 51,936 मतों से पराजित किया है। पार्टी ने उन्हें तीसरी बार मंत्री बनने का मौका दिया है। नितिन पहले भी भारी मतों से चुनाव जीतते आए हैं। 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव सिन्हा को करीब 84 हजार मतों से चुनाव हराया था।
भाजपा नेता रामकृपाल यादव दानापुर सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद नेता रित लाल यादव को 29133 वोटों से हराया। एक समय पर वे लालू यादव के बेहद करीबी और उनके 'छोटे भाई' के रूप में जाने जाते थे। जब लालू यादव को कोर्ट ने सजा सुनाई तो राजद ने राम कृपाल यादव को टिकट नहीं दिया। तब रामकृपाल ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरकर पाटिलपुत्र सीट से जीत हासिल की। बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थामा और केंद्र में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री बने।
नीतीश सरकार में शपथ लेने वाले मंत्रियों में संतोष कुमार सुमन का भी नाम हैं, जो इस बार न विधानसभा चुनाव लड़े और न ही विधायक बने। वो अपनी पार्टी के विधानपार्षद हैं। उनकी पार्टी से 5 विधायक हैं, लेकिन फिर भी लॉटरी उनकी ही लगी। सुमन पढ़े-लिखे नेता माने जाते हैं। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया, UGC-NET पास किया और मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी की डिग्री ली है। राजनीति में आने से पहले वे लेक्चरर और सामाजित कार्य करते रहे हैं।
भाजपा नेता सुनील कुमार बिहार शरीफ सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने कांग्रेस के ओमैर खान को 29168 वोटों से हराया। डॉ. सुनील कुमार इस सीट से लगातार पांच बार जीते हैं। उन्होंने पहले तीन बार 2005, 2010 जनता दल यूनाइटेड के टिकट पर जीत हासिल की थी और फिर पार्टी बदलकर 2015 और 2020 में भारतीय जनता पार्टी के बैनर पर चुनाव जीता।
जद-यू नेता मोहम्मद जमा खान चैनपुर सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद नेता बृज किशोर बिंद को 8363 वोट से हराया। जनता दल यूनाइटेड के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हैं. कैमूर जिले के चैनपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक जमा खान का सफर बहुजन समाज पार्टी के इकलौते विधायक से लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल में शामिल होने तक लंबा दौर रहा है. जमा खान का प्रारंभिक जीवन और पढ़ाई उत्तर प्रदेश और बिहार से भी जुड़ी है। बिहार के कैमूर जिले के चैनपुर के नौघरा में जमा खान का मुस्लिम परिवार में जन्म हुआ था।
भाजपा नेता संजय सिंह टाइगर बिहार की आरा सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने सीपीआई-एमएल उम्मीदवार कुयामुद्दीन अंसारी को 19581 वोटों से हराया। इससे पहले 2010 में भोजपुर के संदेश विधनसभा से चुनाव जीतकर वह विधायक बने थे। भाजपा में प्रखर वक्ता और समर्पित कार्यकर्ता के रूप में पहचान रखने वाले संजय सिंह टाइगर ने संघ के माध्यम से राजनीति में इंट्री ली। बड़े भाई स्व.धर्मपाल सिंह ने 1990 से 2000 तक जनता पार्टी(जेपी) और जनता दल से शाहपुर के विधायक रहे। संजय बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की विचारधारा से प्रभावित थे और उससे जुड़कर राष्ट्र सेवा में जुट गए।
भाजपा नेता अरुण शंकर प्रसाद ने खजौली सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट पर उन्होंने राजद के ब्रज किशोर यादव को 13126 वोटों से हराया। राजनीतिक पृष्ठभूमि 2015 में यह सीट राजद के खाते में गई थी, लेकिन 2020 में बीजेपी ने फिर वापसी करके यह सीट हासिल की और 2025 में भी मतदाताओं ने उसी भरोसे को दोहराया है।
भाजपा नेता सुरेंद्र मेहता बछवाड़ा सीट से विजयी हुए। इस सीट पर उन्होंने कांग्रेस के शिव प्रकाश गरीब दास को 15841 वोटों से हराया। उन्होंने वर्ष 2001 में तेघड़ा प्रखंड के क्षेत्र संख्या 17 से जिला परिषद सदस्य के रूप में चुनाव जीतकर अपनी सक्रिय राजनीतिक जीवन की शुरुआत कर दी। वर्ष 2005 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर तत्कालीन बरौनी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में वे मामूली अंतर से चुनाव हार जाने के बाद भी पार्टी के सक्रिय कार्य करता के रूप में बने रहे।
भाजपा नेता नारायण प्रसाद इस बार नौतन सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने कांग्रेस के अमित कुमार को 22072 सीट से हराया। नारायण प्रसाद तेली (साहू) समाज से आते हैं और इस समुदाय में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। उन्होंने वर्ष 2001 में जिला परिषद क्षेत्र संख्या 36 से जिला परिषद का चुनाव लड़े और जीत दर्ज कर पहली बार जनप्रतिनिधि चुने गए। वर्ष 2009 में वे नौतन विधानसभा सीट के उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने। इस जीत से उन्हें जिले की राजनीति में एक मुकाम मिली।
भाजपा नेता रमा निषाद औराई सीट से विजयी हुई हैं। इस सीट पर उन्होंने विकासशील इंसान पार्टी के भोगेंद्र सहनी को 57206 वोटों से हराया। रमा निषाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी काफी मजबूत है। वे मुजफ्फरपुर लोकसभा क्षेत्र के पूर्व सांसद अजय निषाद की पत्नी और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैप्टन जय नारायण निषाद की बहू हैं। उनका परिवार लंबे समय से राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पति अजय निषाद दो बार मुजफ्फरपुर से सांसद रह चुके हैं।
भाजपा नेता लखेंद्र कुमार कौशल पातेपुर सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद की प्रेमा चौधरी को 22380 वोटों से हराया। 2020 के चुनाव में लखेंद्र ने राजद के शिवचंद्र राम को हराया था. इससे पहले 2015 में इस सीट पर राजद और 2010 के चुनाव में बीजेपी ने यहां जीत दर्ज की थी. कुल मिलाकर बीते डेढ़ दशक में इस सीट पर बीजेपी और राजद उम्मीदवार में कड़ी टक्कर रही है.
भाजपा नेता श्रेयसी सिंह ने जमुई सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट पर उन्होंने राजद के मोहम्मद शमशाद आलम को 54498 वोटों से हराया। 34 वर्षीय निशानेबाज श्रेयसी सिंह जमुई विधानसभा क्षेत्र से 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा के टिकट पर विधायक चुनी गई। निशानेबाजी की डबल ट्रैप स्पर्धा में 2018 में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और 2014 में रजत समेत कई बड़े मंचों पर पदक जीत चुकी हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री दिग्विजय सिंह और पूर्व सांसद पुतुल कुमारी की यह बेटी पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए राजनीति की दुनिया आज खुद भी सशक्त हस्ताक्षर हैं।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता संजय कुमार ने बखरी सीट से जीत दर्ज की है। इस सीट पर उन्होंने भाकपा उम्मीदवार सूर्यकांत पासवान को 17318 वोट से हराया। पिछले चुनाव की बात करें तो सूर्यकांत पासवान ने बीजेपी के रामशंकर पासवान को महज 777 मतों से हराया था। सूर्यकांत पासवान को 72177 वोट हासिल हुआ था, वहीं रामशंकर को 71400 मत मिला था। साल 2015 में राजद के उपेंद्र पासवान ने बीजेपी के रामानंद राम को हराया था।
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के नेता संजय कुमार सिंह महुआ सीट से विजयी हुए। इस सीट पर उन्होंने राजद नेता मुकेश कुमार रौशन को 44997 वोटों से हराया। लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव भी महुआ सीट से उम्मीदवार थे। इस सीट पर तेजस्वी को न केवल हार मिली बल्कि तीसरे नंबर पर रहे। इसी साल मई महीने में तेज प्रताप को राष्ट्रीय जनता दल से बाहर कर दिया गया था।
दीपक प्रकाश, जो राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे हैं, नीतीश कुमार की नई सरकार में मंत्री बनाए गए हैं. यह नियुक्ति खास इसलिए है क्योंकि दीपक प्रकाश ने हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था और वे किसी सदन के सदस्य भी नहीं हैं. उन्हें छह महीने के भीतर विधान परिषद या विधानसभा का सदस्य बनना होगा ताकि मंत्री पद पर बने रह सकें।
भाजपा नेता डॉ. प्रमोद कुमार मोतिहारी सीट से विजयी हुए हैं। इस सीट पर उन्होंने राजद नेता देवा गुप्ता को 13563 वोट से हराया। इस विधानसभा सीट से पिछले तीन विधानसभा चुनाव से भाजपा के प्रमोद कुमार जीतते रहे हैं। प्रमोद कुमार से पहले दो बार माहेश्वर सिंह विधायक रहे हैं। प्रमोद कुमार लगातार चौथी बार चुनावी मैदान में हैं।
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