NEET Exam Paper Leak: जिस परीक्षा के जरिए देश के युवा डॉक्टर बनने का सपना देखते और साकार करते हैं वही आज सवालों के घेरे में है। एक बार फिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की नाकामी के चलते नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट-अंडरग्रैजुएट (नीट-यूजी) 2026 परीक्षा का पेपर लीक हो गया और उसका खामियाजा देश के 22 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है। इस मामले में अब तक नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। वहीं, सरकार ने सीबीआई को पेपर लीक की जांच की जिम्मेदारी दे दी है, जिससे कि इस मामले की तह तक जाकर जांच की जा सके और जिम्मेदारों को सलाखों के पीछे लाया जा सके। हालांकि देश में यह पहली बार नहीं है जब नीट या कोई और पेपर लीक हुआ हो, देश में पेपर लीक का पूरा इतिहास रहा है। ऐसे में पेपर लीक की जांच के बीच यह जानना बेहद जरूरी है कि जब किसी परीक्षा में इस तरह की धांधली या पेपर लीक का मामला सामने आता है तो इससे निपटने के लिए क्या कानून बनाए गए हैं? कानूनी तौर पर इस तरह के पेपर लीक के आरोपियों को किस तरह की सजा देने के प्रावधान हैं? आइए विस्तार से समझते हैं...
आखिर क्यों लाना पड़ा नया कानून?
भारत में किसी परीक्षा का पेपर लीक होना कोई नई समस्या नहीं है। पिछले एक दशक का इतिहास उठाकर देखें तो अखिल भारतीय स्तर से लेकर राज्य स्तरीय परीक्षाओं तक कई बड़ी परीक्षाएं विवादों में रहीं। कहीं परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया,कहीं ओएमआर शीट बदलने का आरोप लगा,तो कहीं परीक्षा केंद्रों की मिलीभगत सामने आई। इन घटनाओं की जांच में पैसे का खेल भी बड़े पैमाने पर निकल कर सामने आया। जिसके बाद सरकार एक ऐसा केंद्रीय कानून लेकर आई,जिसमें जेल,भारी जुर्माना, संपत्ति जब्ती और गैर-जमानती कार्रवाई जैसे कठोर प्रावधान शामिल किए गए।NEET Exam Paper Leak
2024 में चेती सरकार और लाया गया अब तक का सबसे कठोर एंटी-पेपर लीक कानून
पिछले कुछ वर्षों में बार-बार हुए पेपर लीक की घटनाओं पर लगाम लगाने और पेपर लीक माफिया पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार 2024 में एक नया और बेहद सख्त कानून लेकर आई थी, जिसका नाम है सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024। यह कानून 21 जून 2024 से लागू हुआ और इसका उद्देश्य संगठित नकल माफिया,पेपर लीक गैंग और परीक्षा धांधली के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। अब सवाल यह है कि इस कानून में आखिर ऐसा क्या है जिसे अब तक का सबसे कठोर एंटी-पेपर लीक कानून कहा जा रहा है? इस कानून के तहत दोषियों को कितनी सजा हो सकती है? क्या इसमें पेपर पाने वाले छात्रों के लिए भी जेल का प्रावधान है? साथ ही यह किन परीक्षाओं पर लागू होता है?आइए विस्तार से समझते हैं।कानून किन परीक्षाओं पर लागू होता है?
यह कानून केंद्र सरकार और उसकी एजेंसियों द्वारा आयोजित सार्वजनिक परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें प्रमुख रूप से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC),कर्मचारी चयन आयोग (SSC),रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB),IBPS और बैंकिंग परीक्षाएं,नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित परीक्षाएं जैसे NEET,JEE,CUET, NET शामिल हैं। यहां यह जान लेना बेहद जरूरी है कि राज्य सरकारों की परीक्षाएं इस कानून के दायरे में नहीं आतीं। हालांकि कई राज्यों ने अपने स्तर पर अलग एंटी-पेपर लीक कानून बना रखे हैं।
NEET Exam Paper Leak
परीक्षा में धांधली के कौन-कौन से कामों को अपराध माना जाएगा?
इस कानून में सिर्फ प्रश्नपत्र लीक करना ही अपराध नहीं माना गया है, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी लगभग हर तरह की धांधली को अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
- अगर कोई व्यक्ति परीक्षा शुरू होने से पहले प्रश्नपत्र या उत्तर कुंजी बाहर पहुंचाता है, तो यह सीधा आपराधिक अपराध होगा। फिर यह काम करने वाला व्यक्ति कर्मचारी हो,एजेंसी से जुड़ा व्यक्ति हो या बाहरी गिरोह, सभी पर कार्रवाई होगी।
- परीक्षा के बाद ओएमआर शीट बदलने या नंबर बढ़ाने के लिए डेटा में बदलाव की हर कोशिश गंभीर अपराध है।
- अगर कोई व्यक्ति किसी उम्मीदवार की जगह परीक्षा देता है, फर्जी अभ्यर्थी बैठाया जाता है या बाहर से उत्तर भेजे जाते हैं, तो यह भी कानून के तहत अपराध है।
- फर्जी परीक्षा पोर्टल बनाना,सर्वर हैक करना, डेटा चोरी करना या नकली वेबसाइट के जरिए छात्रों को ठगना भी अब इसी कानून के दायरे में आता है।
- अगर परीक्षा केंद्र, प्रिंटिंग प्रेस, टेक्निकल एजेंसी या कोई सर्विस प्रोवाइडर पेपर लीक में शामिल पाया जाता है, तो उस पर भी कड़ी कार्रवाई होगी।
- परीक्षा की गोपनीय जानकारी पैसों या फायदे के लिए साझा करना भी अपराध माना गया है।
dharmendra pradhan
परीक्षा में किसी भी धांधली के दोषियों को कितनी सजा?
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में परीक्षाओं में धांधली करने के किसी भी तरह के अपराध को गैर जमानती बनाया गया है। इसके तहत अगर कोई व्यक्ति पेपर लीक,OMR शीट से छेड़छाड़,आंसर-की लीक या परीक्षा में अनुचित साधनों का उपयोग करते पकड़ा जाता है, तो उसे कम से कम 3 साल की जेल की सजा हो सकती है। वहीं सजा को पांच साल तक के लिए बढाया भी जा सकता है। इसके अलावा, आरोपी पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है। वहीं अगर आरोपी जुर्माना नहीं चुका पाता तो ऐसे में भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस, 2023) के प्रावधानों के अनुसार जेल की सजा में इजाफा किया जा सकता है।
संगठित गिरोह या माफिया के लिए सख्त सजा
वहीं, अगर किसी पेपर लीक की जांच में यह साबित हो जाता है कि इसके पीछे कोई गैंग,सिंडिकेट या शिक्षा माफिया है तो ऐसे में और भी सख्त सजा का प्रावधान किया गया है। संगठित गिरोह या माफिया के लिए सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 में 5 से 10 साल तक की जेल की सजा और कम से कम 1 करोड़ रुपये जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
कंपनियों और एजेंसियों पर भी कार्रवाई के लिए कानून
वहीं, अगर परीक्षा कराने वाली निजी कंपनी,टेक्निकल एजेंसी,प्रिंटिंग प्रेस या डेटा प्रोसेसिंग फर्म परीक्षा में धांधली या पेपर लीक की दोषी पाई जाती है,तो उसके लिए भी सख्त नियम बनाए गए हैं। ऐसी एजेंसियों पर 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा, इन्हें चार साल तक के लिए ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है। इतना ही नहीं कानून में परीक्षा दोबारा कराने का पूरा खर्च उसी संस्था से वसूला जा सकता है। वहीं, अगर कंपनी का निदेशक या अधिकारी शामिल पाया जाता है,तो उसे भी जेल हो सकती है।
कानून में जमानत का क्या प्रावधान है?
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण)अधिनियम, 2024 के तहत अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती (Non-Bailable)बनाया गया है। ऐसे में पुलिस या जांच एजेंसी बिना वारंट गिरफ्तारी कर सकती है और आरोपी को सीधे जमानत का अधिकार नहीं होगा। इसके अलावा ऐसे मामलों में समझौते के आधार पर केस वापस लेने की भी अनुमति नहीं है।
