Bihar Elections 2025: बिहार में चुनावी रण सज चुका है। सत्तापक्ष और विपक्ष के योद्धा अपनी सेनाओं को एकजुट रखने और मजबूत करने की कवायद में जुटे हुए हैं। तभी मान-मनौव्वल का दौर बीच-बीच में चलता रहता है। पहले सत्ताधारी राजग में शामिल उपेंद्र कुशवाहा नाराज हुए तो उन्हें मनाया गया और ऐसा ही आलम महागठबंधन में भी देखने को मिला जब विकासशील इंसान पार्टी (VIP) मुखिया मुकेश सहनी ने महागठबंधन से बाहर निकलने की योजना बना ली, लेकिन कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद स्थितियां बदली और मुकेश सहनी का पारा ठंडा हुआ। वरना मुकेश तो निकल ही लिए थे।
मुकेश सहनी जरूरी या मजबूरी?
मुकेश सहनी मुख्यत: मल्लाह, निषाद और सहनी समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनकी बिहार में लगभग 9 फीसदी आबादी है और 25 से 30 विधानसभा क्षेत्रों पर इनका असर दिखाई देता है जिनमें दरभंगा, खगड़िया, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, पटना जिले के गंगा किनारे के इलाके इत्यादि शामिल हैं। पिछले विधानसभा चुनाव (Assembly Election 2020) से पहले मुकेश सहनी राजद से नाराज होकर राजग में चले गए थे और राजग में रहते हुए विधानसभा चुनाव लड़ा। उस वक्त मुकेश सहनी ने 11 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे जिसमें से चार को ही चुनावी विजय हासिल हुई थी।
महत्वाकांक्षाओं ने बिगाड़ा खेल
बिहार विधानसभा की 243 सीटों में से मुकेश सहनी के पास सिर्फ चार विधायक थे और उनके दम पर राजग में उनकी महत्वाकांक्षाएं बढ़ने लगी। देखते ही देखते मुकेश सहनी के तीन विधायक भाजपा में चले गए और मुकेश सहनी को दरकिनार कर दिया गया जिससे नाराज होकर मुकेश सहनी महागठबंधन में शामिल हो गए, पर उनकी मांगों ने महागठबंधन के साथियों की नाराजगी बढ़ा दी।
डिप्टी CM का पद या राज्यसभा की चाहत
यूं तो मुकेश सहनी डिप्टी सीएम की चाहत रखते हैं और अपनी इच्छा वो प्रकट भी कर चुके हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि वह सीटों से समझौता तो कर सकते हैं, लेकिन डिप्टी सीएम पद से नहीं जिस पर कांग्रेस ने वीटो लगा दिया। कांग्रेस का मानना था कि वो महागठबंधन की दूसरी बड़ी पार्टी है और वह कैसे डिप्टी सीएम पद मांग सकते हैं।
लंबी दौर की वार्ताओं के बाद मतभेद सुलझाया गया और मुकेश सहनी को मनाया गया। सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारियां आ रही हैं कि मुकेश सहनी को राज्यसभा की एक सीट देने का वादा किया गया है।
राहुल ने रुठे सहनी को कैसे मनाया
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राहुल गांधी के हस्तक्षेप के बाद मुकेश सहनी को मना लिया गया है। सूत्र ने बताया कि सहनी ‘महागठबंधन’ में उचित स्थान न दिए जाने से नाराज थे और उन्होंने लगभग नाता तोड़ लिया था। उन्होंने बताया कि पिछले दो दिन में वीआईपी और राजद के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है।
कैसे हुई राहुल गांधी से बात
सूत्र ने बताया कि सहनी ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य से संपर्क किया। भट्टाचार्य ने इसके बाद राहुल गांधी से इस मुद्दे पर संपर्क किया और इस बात पर जोर दिया कि वीआईपी को समायोजित किया जाना चाहिए। सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी ने इस मामले पर राजद के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा की और सहनी से भी बात की। उन्होंने कहा कि इस हस्तक्षेप के बाद वीआईपी प्रमुख ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर ‘महागठबंधन’ में बने रहने की प्रतिबद्धता जताई।
'किंगमेकर' की भूमिका
बिहार में मुकेश सहनी की भूमिका किंगमेकर वाली हो सकती है। साल 2023 के जातीय सर्वे के मुताबिक, मल्लाह, सहनी और निषाद समुदायों की बिहार की आबादी में हिस्सेदारी लगभग 9 फीसदी है। ऐसे में तेजस्वी यादव और राहुल गांधी उन्हें गठबंधन में बनाए रखना चाहते हैं, क्योंकि सहनी की गैरहाजिरी में 25 से 30 सीटों पर वोट बैंक बिखर सकता है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मुकेश सहनी को कितनी सीटें दी जाती हैं।