Akash Anand: हाल के समय में जेन Z और युवा पीढ़ी जिस तरह से सामने आई है और अपने मुद्दों को जिस मुखरता एवं प्रभावी ढंग से उठाकर दबाव बनाया है, उससे राजनीतिक दलों में एक खलबली मची है। राजनीतिक दल अब इस युवा पीढ़ी को हल्के में लेने का जोखिम नहीं उठाना चाहते। इस पीढ़ी को पार्टी से जोड़ने के लिए विशेष रणनीतिक तैयार की जा रही है और युवा चेहरों को आगे किया जा रहा है, उन्हें कमान सौंपी जा रही है लेकिन बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ फिलहाल ऐसा होता नहीं दिख रहा है। बसपा सुप्रीमो मायावती ने 3 सितंबर को एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद के पर कतर दिए। आकाश को अपना उत्तराधिकारी बता चुकीं मायावती की नजर में वह अभी 'परिपक्व' नहीं हुए हैं। मायावती की नजर में आकाश में अभी 'नादानी' है, इसलिए यूपी विधानसभा चुनाव को देखते हुए वह उन्हें बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपेंगी।
राष्ट्रीय संयोजक पद से आकाश को हटाया?
यह पहली बार नहीं है जब मायावती ने आकाश को पार्टी में हाशिये पर धकेला है। इससे पहले भी वह उन्हें पार्टी के पद से हट चुकी हैं। हालांकि, चुनावी जानकार इसके पीछे बसपा सुप्रीमो की एक रणनीति मान रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि यूपी चुनाव अकेले अपने दम पर लड़ने का ऐलान कर चुकीं मायावती आने वाले दिनों में राजनीतिक रूप से कोई चौंकाने वाली घोषणा कर सकती हैं। बसपा के सूत्रों के मुताबिक मायावती ने उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक पद से हटा दिया है, हालांकि इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि पिछले दिनों लखनऊ में बसपा पदाधिकारियों की एक बैठक हुई लेकिन आकाश इस बैठक में नहीं आए। इस बैठक में आकाश के छोटे भाई ईशान आनंद शामिल हुए। खास बात यह है कि ईशान उस कुर्सी पर बैठे जो आम तौर पर आकाश के लिए आरक्षित रहती है।
X पर आकाश ने अपना बॉयो बदला
सूत्रों का कहना है कि अपने साथ हुए इस बर्ताव को आकाश ने गंभीरता से लिया है और गुरुवार रात उन्होंने X के अपने बॉयो को बदल दिया। इसमें उन्होंने खुद को बसपा का एक आम कार्यकर्ता और बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के विचारों से प्रेरित बताया। X का अपना बॉयो बदलकर आकाश एक तरह से अपनी नाखुशी जाहिर कर चुके हैं। बसपा के महासचिव मेवालाल ने कहा कि 'बैठक के बाद जारी प्रेस विज्ञप्ति में सदेश स्पष्ट है।' पार्टी के एक अन्य नेता ने कहा कि 'पार्टी से क्या आकाश को हटाया गया है, इसके बारे में बहन जी ने कुछ स्पष्ट नहीं किया। आकाश जी पार्टी के एक कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहेंगे।'
Mayawati and Akash Anand
बैठक के बाद मायावती का बयान
बैठक के बाद जारी बयान में मायावती ने कहा, 'जिस तरह आदरणीय श्री कांशीराम जी ने अपने परिवार के सदस्यों और अन्य रिश्तेदारों को पार्टी के काम में सहयोग करने की अनुमति दी थी, लेकिन चुनाव लड़ने या सरकार बनने पर उन्हें कोई पद देने के पक्ष में नहीं थे, उसी संकल्प पर मैं भी पूरी तरह कायम हूं। इसी के तहत मैंने आकाश आनंद को पार्टी में काम करने की अनुमति दी है। हालांकि, इस मामले में आकाश आनंद को अभी और परिपक्व होने की जरूरत है। जब तक ऐसा नहीं होता, तब तक उन्हें पार्टी की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देना उचित नहीं होगा। यह जरूरी है, ताकि विरोधियों की रणनीतियों के कारण चुनाव में पार्टी को नुकसान न हो।'
यूपी में होनी थीं आकाश की जनसभाएं
पिछले साल मई में मायावती ने आकाश आनंद को बीएसपी का मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक बनाया था। इसके तीन महीने बाद उन्होंने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया। इससे संकेत मिला था कि सार्वजनिक तौर पर हुए मतभेद के बाद आकाश की पार्टी में औपचारिक रूप से वापसी हो गई है। पिछले महीने बीएसपी में आकाश की दोबारा सक्रिय भूमिका की शुरुआत के तहत 31 वर्षीय आकाश ने 10 अगस्त को हाथरस और 25 अगस्त को जेवर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठक को संबोधित किया। उन्होंने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए दोनों सीटों पर बीएसपी उम्मीदवारों के नामों का ऐलान भी किया। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने अक्टूबर-नवंबर में आकाश की राज्यभर में कई जनसभाएं कराने की योजना बनाई थी, जिसकी नजर 2027 के विधानसभा चुनाव पर थी।
लोकसभा चुनाव से पहले उत्तराधिकारी घोषित किया
ताजा घटनाक्रम पिछले दो वर्षों में आकाश और उनकी बुआ मायावती के बीच उतार-चढ़ाव भरे राजनीतिक रिश्ते का एक और अध्याय है। 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले आकाश को मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किया गया था। उन्हें खास तौर पर उत्तर प्रदेश में बीएसपी के चुनाव अभियान की कमान भी सौंपी गई थी। हालांकि, मई 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले सीतापुर में एक जनसभा के दौरान कथित तौर पर दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद मायावती ने आकाश को बीएसपी के राष्ट्रीय समन्वयक पद से हटा दिया था और उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित करने का फैसला भी वापस ले लिया था। उन्हें चुनाव प्रचार से भी दूर कर दिया गया था। कुछ दिनों बाद मायावती ने सार्वजनिक रूप से आकाश पर अपने ससुर और उस समय बीएसपी के वरिष्ठ नेता रहे अशोक सिद्धार्थ के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि आकाश ने पार्टी हितों के बजाय परिवार के हितों को प्राथमिकता दी।
पिछले साल मार्च में आकाश को बीएसपी से कुछ समय के लिए निष्कासित भी कर दिया गया था। हालांकि, पार्टी नेतृत्व के प्रति खेद जताने और वफादारी का भरोसा दिलाने के बाद उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल कर लिया गया।
BSP flag
कौन हैं ईशान?
सूत्रों के मुताबिक, लंदन की वेस्टमिंस्टर यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई करने वाले ईशान ने अपनी स्कूली शिक्षा नोएडा और दिल्ली से की है। बीएसपी सूत्रों के अनुसार, ईशान परिवार द्वारा संचालित होटलों के प्रबंधन का काम भी देखते हैं। पार्टी नेताओं के बीच ईशान की बैठक में मौजूदगी को मायावती की ओर से भविष्य के लिए एक और नेतृत्व तैयार करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। ईशान पहली बार जनवरी 2025 में सार्वजनिक रूप से नजर आए थे। वह लखनऊ स्थित बीएसपी मुख्यालय में मायावती के जन्मदिन के मौके पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद थे। अगले दिन भी वह इसी स्थान पर उत्तर प्रदेश बीएसपी इकाई की बंद कमरे में हुई बैठक में शामिल हुए थे। हालांकि, इसके बाद से उन्हें पार्टी के किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं देखा गया है।
