TMC-Congress Merger Buzz: पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के साथ ही टीएमसी के बुरे दिनों की शुरुआत भी हो गई। 15 सालों से राज्य की गद्दी पर आसीन ममता बनर्जी की कुर्सी क्या गई उनके अपनों ने भी साथ छोड़ दिया। न सिर्फ 80 जीते विधायकों में से 60 ने उनसे बगावत कर ली, बल्कि 20 से ज्यादा सांसदों ने भी बागी तेवर दिखा दिए। इन बागियों में कभी तृणमूल के लिए जोर-शोर से नारे लगाने वाली सयानी घोष भी हैं। हालांकि इन सबके बीच पश्चिम बंगाल और दिल्ली के राजनीतिक गलियारों से बड़ी खबर सामने आई है। विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स ने दावा किया है कि संकट का सामना कर रही टीएमसी का कांग्रेस में विलय हो सकता है। इसी को लेकर ममता बनर्जी और कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की दिल्ली में बैक-टू बैक बैठकें हुई हैं। वहीं, आज अभिषेक बनर्जी राहुल गांधी और सोनिया गांधी से मिलने के लिए 10 जनपथ पहुंचे हैं।
क्या पार्टी के विलय को लेकर ही ममता बनर्जी और सोनिया गांधी के बीच हुई बैठक?
हाल ही में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी से मुलाकात की थी। वहीं, सोमवार को इंडिया गठबंधन के नेताओं की बैठक में ममता बनर्जी ने कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों के बीच काफी देर तक मंथन और विमर्श हुआ था। बैठक के बाद सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की गले मिलते हुए एक तस्वीर भी सामने आई थीं। इसके अगले दिन पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने राजधानी दिल्ली के 10 जनपथ रोड स्थित सोनिया गांधी के आवास पर उनसे दोबारा मुलाकात की थी। 24 घंटे में बैक-टू-बैक इन दो मुलाकातों के बाद बंगाल से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में टीएमसी के भविष्य को लेकर अटकलें लगने लगी हैं। दावा किया जा रहा है कि 10 जनपथ स्थित आवास पर हुई बैठक में कांग्रेस में टीएमसी के विलय को लेकर भी चर्चाएं हुई हैं।
इंडिया गठबंधन की बैठक में गले मिलतीं सोनिया गांधी और ममता बनर्जी।
क्या विलय को तैयार हैं ममता बनर्जी?
इसके साथ ही विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि ममता बनर्जी ने पार्टी के वर्तमान हालातों को देखते हुए सोनिया गांधी के प्रस्ताव पर सहमति भी जता दी है। लेकिन मामला अभिषेक बनर्जी की मांग को लेकर फंस गया है। सूत्रों का दावा है कि अभिषेक बनर्जी ने विलय के लिए शर्त रखते हुए ममता बनर्जी के लिए राज्यसभा में नेता विपक्ष का पद मांग लिया है। बता दें कि वर्तमान में ये पद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के पास है।
विलय की अटकलों पर नेता क्या कह रहे?
सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात और कांग्रेस में टीएमसी के विलय की अटकलों को लेकर टाइम्स नाउ नवभारत ने दिग्गज कांग्रेसी नेता अधीर रंजन चौधरी से बात की। इस दौरान जब उनसे इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि राजनीतिक पार्टियों के नेता आपस में मिलते रहते हैं,TMC के नेताओं से पहले भी हमारी बात होती रही है। हालांकि उन्होंने टीएमसी के विलय को लेकर सीधी कोई जानकारी नहीं दी। उन्होंने ये जरूर कहा कि कांग्रेस के अंदर टीएमसी का विलय होगा इसकी जानकारी मुझे नही है, मुझे लगता है ऐसा फैसला लेने के लिए प्रदेश के कार्यकर्ताओं और नेताओं से बात जरूर की जाएगी।टाइम्स नाउ नवभारत पर इसे भी पढ़ें- 12 साल...12 ऐतिहासिक फैसले, मोदी सरकार में कितनी बदली देश की तस्वीर?
वहीं, सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की मुलाकात और उन्हें गले लगाने को लेकर अधीर रंजन ने कहा कि सोनिया गांधी अगर ममता बनर्जी को गले लगा रही हैं तो इसमें क्या गलत है। अगर सोनिया गांधी अपने पति के हत्यारे को माफ कर सकती हैं तो कोई नेता अगर उनके गले लग रहा है तो वो भी गले लगायेंगी।
TMC नेता कुणाल घोष बोले- विलय पर पार्टी का आएगा बयान
वहीं, TMC नेता कुणाल घोष ने कहा कि सुष्मिता देब ने रिजाइन किया है। इससे पहले जवाहर सरकार और सुखेंदु अधिकारी भी रिजाइन कर चुके हैं। लोक सभा में जो दूसरे सांसद हैं, उन्हें भी रिजाइन कर देना चाहिए। जहां तक कांग्रेस और TMC के मर्जर की बात है, उस पर मैं कुछ नहीं कह सकते। जो भी कहना होगा पार्टी की तरफ से कहा जाएगा।
भाजपा ने ले लिए मजे
वहीं, राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच बैठक पर भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है। प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा kf कांग्रेस का नारा है आपदा में अवसर खोजना। मौके पर चौका मारना। आज जिस प्रकार का विकास हमने देखा है। TMC का मतलब बन चुका है,टुकड़ों में कांग्रेस। हर एक घंटे में उनका कोई सांसद छोड़कर जा रहा है। ये इसलिए हो रहा है क्योंकि पुत्र मोह, परिवार मोह, भतीजा मोह में इन्होंने पार्टी गंवा दी। पहले विधायक गए, फिर लोकसभा के सांसद गए, राज्यसभा के सांसद जा रहे हैं...अगर राहुल और अभिषेक एक साथ आते हैं तो अच्छा है। 2 युवा नेता का उत्तर प्रदेश में तो काम नहीं हुआ लेकिन यहां अभिषेक और राहुल नई फिल्म बना सकते हैं।
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28 साल पहले कांग्रेस से ही हुईं थी अलग...
ममता बनर्जी के राजनीतिक इतिहास की बात करें तो आज से करीब 28 साल पहले ममता बनर्जी कांग्रेस की कद्दावर और दिलेर नेता हुआ करती थीं। 1984 में जब उन्होंने कांग्रेस के निशान पर पहली बार लोकसभा का चुनाव जीता था तब वे सबसे युवा सांसद बनी थीं। उनके कद का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने उन्हें कई बार मंत्री तक बनाया। हालांकि बाद में ममता बनर्जी ने अपनी राजनीति के केंद्र में बंगाल को चुना और कांग्रेस से अपनी राहें अलग करते हुए 1 जनवरी 1998 को अपनी अलग पार्टी बनाई। इसे उन्होंने नाम दिया अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी)। इसके बाद फिर वाम मोर्चे को बंगाल से भगाकर उन्होंने 2011 में पहली बार बंगाल टीएमसी की सरकार बनाई। इसके बाद राज्य में लगातार 15 सालों तक टीएमसी की सरकार रही,लेकिन 2026 में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत हासिल तक सूबे से टीएमसी को उखाड़ फेंका। सत्ता जाने के साथ ही टीएमसी अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है और ऐसे में अब एक बार फिर उसके उसी कांग्रेस में विलय की बातें चल रही हैं, जहां से अलग होकर ममता बनर्जी ने पार्टी बनाई थी।
अब आगे क्या?
फिलहाल TMC और कांग्रेस के विलय को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, राहुल गांधी और अभिषेक बनर्जी के बीच बढ़ती राजनीतिक सक्रियता ने अटकलों का बाजार जरूर गर्म कर दिया है। यदि भविष्य में ऐसा कोई कदम उठता है तो यह न सिर्फ बंगाल बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा घटनाक्रम होगा। फिलहाल सभी की नजरें दिल्ली में चल रही इन राजनीतिक बैठकों और उनके संभावित परिणामों पर टिकी हैं।
