ईरान का 60 हजार डॉलर का इनाम, सैकड़ों सैनिक और हथियारबंद लोग भी अमेरिका को उस एरिया में घुसने से नहीं रोक पाए, जहां US का पायलट छिपा था। जिस पायलट को ईरान 24 घंटे में अपने ही देश में ढूंढ नहीं पाया, उसे अमेरिका न सिर्फ खोजने में कामयाब रहा, बल्कि बचाकर ईरान से ले जाने में भी सफल रहा है। इस दौरान अमेरिका ने सैनिक तो एक भी नहीं खोए, लेकिन उसका एक C-130 परिवहन विमान और दो ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर गंवाना पड़ा। अब सवाल यह है कि अमेरिका ने इस ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया? कितने सैनिक लगे, कितने विमान लगे, अमेरिका कैसे अपने सैनिक तक पहुंचा? आइए जानते हैं सबकुछ...
अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए कैसे चला रेस्क्यू ऑपरेशन?
ईरान में गिराए गए अमेरिकी लड़ाकू विमान के एक पायलट को अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन बलों ने शनिवार रात एक बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण अभियान के जरिए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार इस कार्रवाई से जुड़े वर्तमान और पूर्व अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि इस ऑपरेशन के दौरान कमांडो दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक दाखिल हुए। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ने आधी रात के बाद सोशल मीडिया पर पोस्ट कर इस बचाव अभियान की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि घायल पायलट को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया है। पायलट को कुछ चोटें आई हैं, लेकिन उनकी स्थिति अब स्थिर है और इस मिशन में किसी अमेरिकी सैनिक की मौत नहीं हुई। इस मिशन में अमेरिकी वायुसेना और नौसेना का अहम रोल रहा। इस ऑपरेशन को कई अमेरिकी लड़ाकू विमान, परिवहन विमान, हेलीकॉप्टर्स और सैकड़ों कमांडों ने मिलकर अंजाम तक पहुंचाया।
अमेरिकी नौसेना के F/A-18 सुपर हॉर्नेट (@CENTCOM)
ईरान में कहां फंसा था अमेरिकी पायलट
ईरान में क्रैश हुए F-15E Strike Eagle के जब दोनों पायलट ने इजेक्ट किया तो ईरानी सीमा में गिरा। मेन पायलट को अमेरिका ने पहले ही बचा लिया था। दूसरा पायलट फंसा था। जो पहाड़ी इलाके में केवल एक पिस्तौल के सहारे 24 घंटे से अधिक समय तक छिपकर ईरानी बलों से बचते रहा।
जैसे ही अमेरिकी बल उस अधिकारी तक पहुंचे, वहां गोलीबारी शुरू हो गई। अंततः SEAL Team Six के स्पेशल ऑपरेशन कमांडो की मदद से अधिकारी को सुरक्षित निकाल लिया गया।
ईरानी सेना को कैसे CIA ने दिया चकमा?
फाइटर जेट से इजेक्ट होने के बाद अमेरिकी पायलट एक पहाड़ी दरार (क्रेविस) में छिप गए थे। उस समय उनकी सही लोकेशन न तो उन्हें बचाने की कोशिश कर रही अमेरिकी सेना को पता थी और न ही उन्हें पकड़ने की कोशिश कर रही ईरानी सेना को। एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के अनुसार, Central Intelligence Agency (CIA) ने ईरानी बलों को भ्रमित करने के लिए एक विशेष रणनीति शुरू की। इस योजना के तहत यह संदेश फैलाया गया कि एयरमैन को पहले ही बचा लिया गया है और उसे जमीनी काफिले के जरिए देश से बाहर ले जाया जा रहा है। अंततः CIA ने उस अधिकारी के छिपे होने की सही जगह का पता लगा लिया और यह जानकारी पेंटागन को दी, जिसके बाद अमेरिकी सेना ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
यूएसएस अब्राहम लिंकन (फोटो- @CENTCOM)
जान बचाने के लिए लगातार चलते रहा पायलट
एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी के अनुसार, घायल एयरमैन ने 24 घंटे से अधिक समय तक ईरानी बलों से बचते हुए खुद को सुरक्षित रखा। इस दौरान वह एक समय करीब 7,000 फीट ऊंची पहाड़ी रिजलाइन तक पैदल चढ़ गया था, ताकि अपनी स्थिति बदल सके और पकड़े जाने से बच सके।
अमेरिकी हमलावर विमानों ने उस इलाके के पास पहुंच रहे ईरानी काफिलों को दूर रखने के लिए बम गिराए और फायरिंग की, जिससे वे उस स्थान तक न पहुंच सकें, जहां एयरमैन छिपा हुआ था। जब अमेरिकी कमांडो घायल एयरमैन के पास पहुंचे, तो उन्होंने बचाव स्थल के आसपास सुरक्षा बनाए रखने के लिए हथियारों से फायरिंग की, लेकिन ईरानी बलों के साथ सीधी मुठभेड़ नहीं हुई। एयरमैन के पास अपनी लोकेशन बताने के लिए एक विशेष बीकन और सुरक्षित संचार उपकरण मौजूद था, जिससे वह बचाव अभियान चला रही टीम के संपर्क में रह सके। हालांकि, उसने अपने बीकन का इस्तेमाल बहुत सीमित रखा, क्योंकि उसे आशंका थी कि ईरानी बल भी उस सिग्नल को पकड़ सकते हैं और उसकी लोकेशन का पता लगा सकते हैं।
अमेरिकी इतिहास का सबसे कठिन मिशन
यह मिशन अमेरिकी विशेष बलों के इतिहास के सबसे कठिन और जटिल अभियानों में से एक माना जा रहा है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच करीब दो दिनों तक चले तनावपूर्ण और जोखिम भरे प्रयासों के बाद पूरा हुआ, जिसमें घायल अधिकारी तक सबसे पहले पहुंचने की होड़ लगी हुई थी। CNN के राष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक Alex Plitsas इस ऑपरेशन पर कहा कि ने कहा कि चालक दल के सदस्य को बचाने का अभियान अमेरिकी सेना के इतिहास के सबसे खतरनाक और चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में से एक माना जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस मिशन ने अमेरिकी एयरमैन को ईरानी शासन के लिए संभावित “मोलभाव का हथियार” बनने से बचा लिया।
