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स्मार्टफोन कैसे देता है 'भूकंप' का अलर्ट? इस तरह जीवन रक्षक साबित होती है जेब में रखी यह टेक्नोलॉजी

आखिर एक छोटा सा फोन जमीन के अंदर होने वाली इतनी बड़ी हलचल को कैसे भांप लेता है? क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एक छोटा सा स्मार्टफोन इतनी बड़ी घटना को होने से पहले कैसे भांप लेता है? आइए आपको इस टेक्नोलॉजी के बारे में डिटेल से बताते हैं।

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स्मार्टफोन में भूकंप का अलर्ट मिलने के पीछे कई सारे फैक्टर्स काम करते हैं।
Authored by: Gaurav Tiwari
Updated Jun 27, 2026, 16:49 IST
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भूकंप एक ऐसी प्राकृतिक आपदा है जिसकी सटीक भविष्यवाणी करना फिलहाल विज्ञान के लिए भी संभव नहीं है। लेकिन, पिछले कुछ सालों में एक तकनीक ने लाखों लोगों को भूकंप के तेज झटके महसूस होने से चंद सेकेंड पहले अलर्ट करके उनकी जान बचाई है। हैरान करने वाली बात यह है कि इसके लिए किसी भारी-भरकम वैज्ञानिक उपकरण की नहीं, बल्कि आपके हाथ में मौजूद स्मार्टफोन की जरूरत होती है।

आखिर एक छोटा सा फोन जमीन के अंदर होने वाली इतनी बड़ी हलचल को कैसे भांप लेता है? यह लाखो करोड़ों लोगों के लिए आश्चर्य का टॉपिक है। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर एक छोटा सा स्मार्टफोन इतनी बड़ी घटना को होने से पहले कैसे भांप लेता है। आइए आपको इस टेक्नोलॉजी के बारे में डिटेल से बताते हैं।

स्मार्टफोन का 'सीक्रेट सेंसर': एक्सीलेरोमीटर (Accelerometer)

आज के समय में आने वाले लगभग हर एक स्मार्टफोन में एक छोटा सा सेंसर होता है जिसे एक्सीलेरोमीटर कहते हैं। इसका आम काम यह ट्रैक करना है कि आपका फोन सीधा है या तिरझा है। यह सेंसर फोन की गति और वाइब्रेशन (कंपन) के प्रति बेहद संवेदनशील होता है।

जब जमीन में भूकंप की तरंगें उठती हैं, तो यह सेंसर उन्हें तुरंत रिकॉर्ड कर लेता है। टेक्नोलॉजी की भाषा में कहें तो आपका फोन एक मिनी-सीस्मोमीटर (भू-कंपन मापी) की तरह काम करने लगता है।

तरंगों का खेल: P-वेव्स vs S-वेव्स

आपको बता दें कि भूकंप आने पर जमीन के अंदर से मुख्य रूप से दो तरह की तरंगें निकलती हैं जिनका नाम P-वेव्स और S-वेव्स हैं। आइए आपको इन दोनों तरंगो के अंतर के बारे में बताते हैं।

P-वेव्स (Primary Waves): यह भूकंप की पहली तरंगें होती हैं। ये बहुत तेज गति से चलती हैं लेकिन काफी कमजोर होती हैं। इंसान इन्हें आमतौर पर महसूस नहीं कर पाते, लेकिन आपके फोन का एक्सीलेरोमीटर इन्हें तुरंत पकड़ लेता है।

S-वेव्स (Secondary Waves): ये तरंगें P-वेव्स के पीछे-पीछे आती हैं। इनकी गति धीमी होती है, लेकिन ये बहुत खतरनाक और विनाशकारी होती हैं। यही वो तरंगें हैं जो इमारतों को हिला देती हैं।

स्मार्टफोन टेक्नोलॉजी का पूरा गेम इसी टाइम गैप (समय के अंतर) पर टिका है। फोन P-वेव को डिटेक्ट करता है और S-वेव के पहुंचने से पहले आपको सावधान कर देता है।

नेटवर्क की ताकत: कैसे बनता है 'क्राउडसोर्स नेटवर्क'?

सिर्फ एक फोन के हिलने से गूगल (Google) या एप्पल (Apple) अलर्ट जारी नहीं करते हैं। भूकंप का सटीक अलर्ट देने के लिए क्राउडसोर्सिंग (Crowdsourcing) का इस्तेमाल किया जाता है। इस क्राउडसोर्सिंग में कई सारे फैक्टर काम करते हैं।

1. लोकल डिटेक्शन (Local Detection): किसी इलाके में भूकंप की P-वेव्स आते ही वहां मौजूद सैकड़ों एंड्रॉइड या आईफोन के सेंसर्स एक साथ वाइब्रेशन को रिकॉर्ड करते हैं।

2. क्लाउड सर्वर को डेटा ट्रांसफर: सभी प्रभावित फोन्स तुरंत अपने लोकेशन डेटा के साथ इस सिग्नल को गूगल या संबंधित कंपनी के केंद्रीय सर्वर (Cloud Server) पर भेजते हैं।

3. डेटा एनालिसिस और वेरिफिकेशन: सर्वर का एल्गोरिदम देखता है कि क्या एक ही समय पर, एक ही इलाके के हजारों फोन्स में एक जैसा कंपन हुआ है? अगर हां, तो यह पुष्टि हो जाती है कि यह कोई सामान्य दुर्घटना नहीं बल्कि भूकंप है।

4. ब्लास्ट अलर्ट (Blast Alert): भूकंप के केंद्र (Epicenter) से दूर रहने वाले लोगों के पास S-वेव्स (खतरनाक तरंगों) के पहुंचने से कुछ सेकेंड पहले उनके फोन पर तेज सायरन के साथ फुल-स्क्रीन अलर्ट भेज दिया जाता है।

चेतावनी कितनी पहले मिल सकती है?

स्मार्टफोन का भूकंप अलर्ट फीचर आपको कितने पहले अलर्ट देगा यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप भूकंप के केंद्र (Epicenter) से कितनी दूरी पर हैं। यदि आप केंद्र के बहुत पास हैं, तो चेतावनी मिलने का समय बहुत कम या बिल्कुल नहीं हो सकता। लेकिन यदि आप कुछ दूरी पर हैं, तो 5 से 30 सेकंड तक का समय मिल सकता है। कुछ मामलों में इससे भी अधिक समय मिल सकता है। यही कुछ सेकंड जान बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।

चेतावनी मिलते ही क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों के अनुसार, अलर्ट मिलते ही घबराने के बजाय तुरंत सुरक्षा उपाय अपनाने चाहिए।
  • झुक जाएं और बचने की कोशिश करें।
  • किसी मजबूत मेज या टेबल के नीचे छिप जाएं।
  • उसे मजबूती से पकड़कर रखें।
  • खिड़कियों, भारी अलमारियों और गिरने वाली वस्तुओं से दूर रहें।
  • यदि बाहर हैं, तो इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूरी बनाएं।

किन देशों में उपलब्ध है यह टेक्नोलॉजी

भूकंप अर्ली वार्निंग सिस्टम कई देशों में सक्रिय रूप से इस्तेमाल किए जा रहे हैं, जिनमें शामिल हैं:
  • जापान
  • अमेरिका
  • मेक्सिको
  • ताइवान
  • दक्षिण कोरिया
  • चीन के कुछ क्षेत्र
इन देशों में चेतावनी मोबाइल फोन के अलावा टीवी, रेडियो, सार्वजनिक सायरन और अन्य संचार माध्यमों से भी भेजी जाती है।

अपने फोन में कैसे चालू करें यह सेटिंग?

अगर आप एंड्रॉइड यूजर हैं, तो अपने फोन की Settings में जाएं ➔ Safety & Emergency या Location पर टैप करें ➔ Earthquake Alerts को खोजें और इसे ON कर दें। इसके लिए आपके फोन का इंटरनेट और लोकेशन ऑन होना जरूरी है।

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