भारत में चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर कई सवाल उठते रहे हैं। इन सवालों में सबसे संवेदनशील और राजनीतिक रूप से गर्म मुद्दा रहा है- वोटर लिस्ट से मतदाताओं के नाम हटाना। खासकर जब यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर होती है, तो इसके पीछे राजनीतिक मंशा की आशंका जताई जाती है और विपक्ष इसे लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर हमला मानता है। बिहार में चुनाव आयोग की ओर से जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान इसी तरह के दावे किए जा रहे हैं। विपक्ष के नेता राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी दल SIR की प्रक्रिया और जल्दबाजी पर सवाल उठा रहे हैं। चुनाव आयोग पर वोट चोरी का आरोप लगाते हुए गलत तरीके से वोटर लिस्ट से नाम काटने का दावा कर रहे हैं। वहीं चुनाव आयोग, जो देश की सर्वोच्च चुनावी संस्था है, का यह दावा है कि मतदाता सूची से नाम हटाना एक नियमित और तकनीकी प्रक्रिया है, जिसका मकसद सूची को संशोधित और त्रुटिरहित बनाना होता है। आयोग के मुताबिक, यह काम एक तय प्रक्रिया के तहत किया जाता है। आइए जानते हैं कि वोटर लिस्ट से मतदाताओं का नाम कब कटता है और कौन कटवा सकता है, किसके पास यह अधिकार है?
किस स्थिति में कटता है वोटर लिस्ट से नाम
भारत में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मतदाता सूची यानी वोटर लिस्ट का संशोधित होते रहना बेहद जरूरी है। मतदाता सूची से नाम हटाना एक संवेदनशील और कानूनी प्रक्रिया है, जिसे तय नियमों और प्रक्रियाओं के तहत ही किया जा सकता है। वोटर लिस्ट से किसी व्यक्ति का नाम हटाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं-जैसे कि उसकी मृत्यु हो जाना, उस व्यक्ति का किसी अन्य विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरण होना, आदि।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के कौन-कौन से कारण हो सकते हैं:-
- व्यक्ति की मृत्यु हो चुकी हो
- मतदाता ने अपना पता या निर्वाचन क्षेत्र बदल लिया हो (शिफ्टिंग)
- कोई व्यक्ति दो जगहों पर पंजीकृत हो (डुप्लीकेट एंट्री)
- व्यक्ति अब भारतीय नागरिक न हो
- मतदाता फर्जी तरीके से सूची में दर्ज हो गया हो
वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए कौन आवेदन कर सकता है?
चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया फॉर्म 7 के माध्यम से की जाती है। यह फॉर्म व्यक्ति स्वयं भी भर सकता है, या किसी मृत व्यक्ति के परिजन, बीएलओ या कोई नागरिक भी दे सकता है यदि उसे लगता है कि सूची में गलत एंट्री हुई है। फॉर्म भरने के बाद दस्तावेजों का सत्यापन होता है और संबंधित बीएलओ द्वारा रिपोर्ट दी जाती है। अगर सबकुछ नियमों के अनुसार पाया जाता है, तो नाम हटा दिया जाता है। नाम हटाने का अनुरोध निम्नलिखित लोग कर सकते हैं:-
- स्वयं मतदाता – यदि वह स्थान परिवर्तन कर रहा है या नाम स्वेच्छा से हटवाना चाहता है
- परिवार का कोई सदस्य – अगर किसी की मृत्यु हो चुकी है
- कोई भी नागरिक – अगर उसे लगता है कि कोई व्यक्ति फर्जी तरीके से पंजीकृत है
- बीएलओ और चुनाव अधिकारी – नियमित सत्यापन के दौरान
form 7 (3)
नाम हटाने की प्रक्रिया क्या है?
- फॉर्म 7 भरना होता है: वोटर लिस्ट से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 भरना होता है। यह फॉर्म आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीके से भर सकते हैं।
- ऑनलाइन: https://voters.eci.gov.in/ पर जाइए, वहां फॉर्म-7 उपलब्ध है, उसे भर दीजिए।
- ऑफलाइन: संबंधित बीएलओ या चुनाव कार्यालय से फॉर्म लेकर
- सपोर्टिंग डॉक्यूमेंट: मृत्यु प्रमाण पत्र (यदि व्यक्ति मृत है), पता परिवर्तन का प्रमाण (अगर क्षेत्र बदला है), अन्य आवश्यक प्रमाण पत्र
- सत्यापन प्रक्रिया: बीएलओ द्वारा फील्ड विजिट और दस्तावेज़ों का सत्यापन किया जाता है। अगर सब कुछ सही पाया गया, तो नाम हटाने की प्रक्रिया पूरी कर दी जाती है।
कैसे भरें चुनाव आयोग का फॉर्म-7
सबसे पहले, फॉर्म 7 प्राप्त करें। यह फॉर्म आप अपने नजदीकी चुनाव कार्यालय, चुनाव आयोग की वेबसाइट या मतदाता सेवा केंद्र से प्राप्त कर सकते हैं। कई जगह यह फॉर्म डिजिटल रूप में भी उपलब्ध होता है। फॉर्म में दिए गए सभी विवरण सावधानीपूर्वक भरें। इसमें आपकी व्यक्तिगत जानकारी जैसे नाम, पता, मतदाता पहचान संख्या, और संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का विवरण देना होता है। इसके अलावा, फॉर्म में हटाने या संशोधन का कारण स्पष्ट करना जरूरी होता है। यदि फॉर्म नाम हटाने के लिए है तो संबंधित कारण का प्रमाणपत्र या दस्तावेज संलग्न करें। फॉर्म भरने के बाद इसे संबंधित बूथ स्तर अधिकारी या नजदीकी चुनाव कार्यालय में जमा करें। आप इसे व्यक्तिगत रूप से जमा कर सकते हैं या डाक द्वारा भी भेज सकते हैं। इसके ऑनलाइन जमा करने की सुविधा भी है।
Form 7 Guidlines Hindi
बिना सबूत नहीं कटता नाम
चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि किसी का नाम बिना पूर्व सूचना के या गलत आधार पर न हटाया जाए। इसके लिए संबंधित व्यक्ति को कारण बताओ नोटिस भेजा जाता है, ताकि उसे अपनी बात रखने का मौका मिले। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अगर किसी मतदाता ने नया पता चुन लिया है और वह किसी अन्य क्षेत्र में वोटर बन गया है, तो उसे पुराने क्षेत्र की वोटर लिस्ट से नाम हटवाना अनिवार्य होता है। ऐसा न होने पर डुप्लीकेट रजिस्ट्रेशन माना जाएगा, जो कानूनी रूप से गलत है।
बिहार में जारी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन और विवाद
बिहार में SIR के दौरान 65 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। जिसे लेकर विपक्ष चुनाव आयोग की आलोचना कर रहा है, वोट चोरी का दावा कर रहा है। SIR के दौरान सबसे बड़ी समस्या यह रही है कि इस अभियान में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया इतनी व्यापक और तीव्र गति से हुई कि कई लोग अपने नाम हटाए जाने की शिकायत कर रहे हैं, खासकर उन इलाकों में जहां सूचनाओं का आदान-प्रदान ठीक से नहीं हो पाया। कई मतदाताओं ने बताया कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के सूची से नाम हटा दिया गया, जिससे वे आगामी चुनावों में वोट देने से वंचित रह सकते हैं। इसके अलावा, कई बार तकनीकी दिक्कतों और गलतियों के कारण भी मतदाता सूची में त्रुटियां दर्ज हुई हैं। कुछ स्थानों पर मतदाता नाम हटाने के मामले अदालतों तक भी पहुंच गए हैं।
