Explained: कितना ताकतवर है ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड, जिसे यूरोप ने घोषित किया आतंकी संगठन?
रिवोल्यूशनरी गार्ड का उदय ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति से हुआ, जिसे शिया धर्मगुरुओं के नेतृत्व वाले राज्य की सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया था और बाद में इसे संविधान में शामिल किया गया। नियमित सेना के साथ मिलकर काम करते हुए, इसने 1980 के दशक के लंबे और विनाशकारी ईरान-इराक युद्ध के दौरान लगातार प्रभाव और ताकत को हासिल किया।
- Authored by: अमित कुमार मंडल
- Updated Feb 1, 2026, 03:31 PM IST
ईरान का पैरामिलिट्री रिवोल्यूशनरी गार्ड फिर चर्चा में है। यब देश की धर्मतांत्रिक व्यवस्था के भीतर सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में से एक बन गया है। यह सीधे सर्वोच्च नेता आयतोल्लाह खामेनेई को रिपोर्ट करता है और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को नियंत्रित करने के साथ-साथ देश की सीमाओं से परे भी अभियान चलाता है। ये बेहद कुख्यात है और देश के अंदर चल रहे किसी भी आंदोलन को कुचलने के लिए जाना जाता है। लेकिन इस पर अब अमेरिका के साथ ही यूरोप की भी टेढ़ी निगाहे हैं। इस महीने की शुरुआत में ईरान में हुए राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शनों के हिंसक दमन में इसकी भूमिका के कारण यूरोपीय संघ ने इसे आतंकवादी समूह घोषित कर दिया है।
1979 की क्रांति में इसकी जड़ें
रिवोल्यूशनरी गार्ड का उदय ईरान की 1979 की इस्लामी क्रांति से हुआ, जिसे शिया धर्मगुरुओं के नेतृत्व वाले राज्य की सुरक्षा का दायित्व सौंपा गया था और बाद में इसे संविधान में शामिल किया गया। नियमित सेना के साथ मिलकर काम करते हुए, इसने 1980 के दशक के लंबे और विनाशकारी ईरान-इराक युद्ध के दौरान लगातार प्रभाव और ताकत को हासिल किया। आज, गार्ड विशाल खातम अल-अनबिया निर्माण समूह को नियंत्रित करता है और सड़क निर्माण, बंदरगाह प्रबंधन, दूरसंचार और यहां तक कि लेजर नेत्र शल्य चिकित्सा सेवाओं जैसी परियोजनाओं में शामिल है। यानी ये संगठन पूरी तरह मालामाल है।
अमेरिका के खिलाफ प्रतिरोध की धुरी को दिया आकार
विदेशी अभियान इसके मिशन का केंद्र हैं। गार्ड की विदेशी शाखा, कुद्स फोर्स ने ईरान द्वारा इजराइल और अमेरिका के खिलाफ प्रतिरोध की धुरी कहे जाने वाले गठबंधन को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसने सीरिया के पूर्व राष्ट्रपति बशर असद, लेबनान के हिज्बुल्लाह, यमन के हौती विद्रोहियों और अन्य सहयोगी समूहों का खुलकर समर्थन किया है। खास तौर पर 2003 में अमेरिका के नेतृत्व में इराक पर आक्रमण के बाद, जिससे तेहरान का क्षेत्रीय प्रभाव बढ़ गया।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, कुद्स फोर्स ने इराकी लड़ाकों को अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ इस्तेमाल किए जाने वाले अत्यधिक घातक सड़क-किनारे बम बनाने और तैनात करने का प्रशिक्षण दिया था। कुद्स फोर्स पर ईरानी खुफिया एजेंसियों के साथ मिलकर विदेशों में असंतुष्टों और कथित दुश्मनों का पीछा करने के लिए आपराधिक नेटवर्क की भर्ती करने का भी संदेह है। इजराइल-हमास संघर्ष शुरू होने के बाद से इजराइल ने उन नागरिकों को हिरासत में लिया है जिन पर ईरानी निर्देशों पर साइटों की निगरानी करने या तोड़फोड़ करने का आरोप है। तेहरान ने इन आरोपों का खंडन किया है। यह भी व्यापक रूप से माना जाता है कि कुद्स फोर्स पश्चिम एशिया में तस्करी नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
खुफिया भूमिका और विदेशी गिरफ्तारियां
कुद्स फोर्स की अपनी खुफिया शाखा है, जिसका संबंध दोहरी नागरिकता वाले व्यक्तियों और पश्चिमी देशों से संबंध रखने वाले व्यक्तियों की जासूसी के आरोपों में गिरफ्तारी और सजा से रहा है, अक्सर बंद कमरे में सुनवाई के दौरान ऐसा होता है। पश्चिमी सरकारों ने ईरान पर ऐसे बंदियों का इस्तेमाल राजनयिक वार्ताओं, विशेष रूप से अपने परमाणु कार्यक्रम से संबंधित वार्ताओं में दबाव बनाने के लिए करने का आरोप लगाया है।
इजराइल के साथ संघर्ष से दबाव बढ़ा
गाजा में युद्ध की शुरुआत करने वाले हमास के 7 अक्टूबर, 2023 को इजराइल पर हमले के बाद से गार्ड की लंबे समय से चली आ रही "प्रतिरोध की धुरी" पर सबसे गंभीर दबाव पड़ा है। ईरान समर्थित हमास पर इजरायल का लगातार हमला जारी है, वहीं इजरायल ने ईरान समर्थित अन्य समूहों पर भी हमले किए हैं, जिससे हिजबुल्लाह काफी कमजोर हो गया है और यमन में हौती विद्रोहियों के ठिकानों पर बार-बार हमले किए गए हैं। सीरिया में दिसंबर 2024 में असद सरकार के पतन से तेहरान और गार्ड ने एक महत्वपूर्ण सहयोगी खो दिया। तब से इजरायल और ईरान के बीच मिसाइल हमले होते रहे हैं, जिनकी निगरानी गार्ड द्वारा की जाती है। जून में इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक व्यापक हवाई अभियान चलाया। पहले ही दिन गार्ड के वरिष्ठ कमांडर मारे गए, जिससे उसका नेतृत्व अस्त-व्यस्त हो गया। इन हमलों में गार्ड द्वारा संचालित बैलिस्टिक मिसाइल सुविधाओं, प्रक्षेपण स्थलों और वायु रक्षा प्रणालियों को भी नष्ट कर दिया गया।
विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भूमिका
घरेलू स्तर पर ईरान की सत्ताधारी प्रणाली द्वारा अशांति को दबाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले मुख्य उपायों में से एक बासिज (Basij) है, जो गार्ड के नियंत्रण में एक स्वयंसेवी बल है। 28 दिसंबर को भड़के विरोध प्रदर्शनों के फुटेज में बासिज के सदस्य राइफल, लाठी और पेलेट गन से लैस दिखाई दे रहे हैं। उन्हें प्रदर्शनकारियों पर हमला करते और शहर की सड़कों पर उनका पीछा करते देखा गया है। बासीज के एक प्रमुख कमांडर ने तो सरकारी टेलीविजन पर आकर माता-पिता से अपने बच्चों को घर के अंदर रखने का आग्रह किया और अपने सदस्यों से विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।