History of India-Russia Relations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की लगातार धमकियों के बीच भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रूस के साथ रक्षा और ऊर्जा संबंधों को मजबूत करने के मिशन पर जुटे हैं। हालांकि उनकी यह यात्रा पहले से निर्धारित थी, लेकिन मौजूदा हालात में इसका महत्व और भी बढ़ गया है। डोभाल ही नहीं, विदेश मंत्री एस जयशंकर के भी इस महीने के अंत में मास्को जाने की उम्मीद है। एक तरफ ट्रंप की धमकियां और दूसरी तरफ भारत की रूस से लगातार बढ़ती दोस्ती, संकेत साफ है कि भारत, अमेरिका के दबाव में अपने सदियों पुराने दोस्त को छोड़ने को तैयार नहीं है। रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के साथ भारत-रूस साझेदारी की एक बार फिर अग्निपरीक्षा है। दोनों देशों के बीच दोस्ताना आज का नहीं है, बल्कि दशकों पुराना है। जब से भारत को आजादी मिली है, तब से रूस जो उस वक्त सोवियत संघ था, रिश्ता लगातार मजबूत होता गया है। जानने की कोशिश करते हैं कि भारत-रूस संबंध कितने पुराने हैं और किस तरह ये दोस्ती लगातार परवान चढ़ी है।
कितना पुराना भारत-रूस संबंधों का इतिहास?
रूस के साथ भारत के संबंध सिर्फ तेल व्यापार तक ही सीमित नहीं हैं। दोनों देशों ने अप्रैल 1947 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे, यानि भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति से भी पहले। और तब से दोनों देशों के बीच बेहद घनिष्ठ संबंध रहे हैं। भारत पर आए हर संकट के समय रूस डटकर हमारे साथ खड़ा रहा। वर्षों से भारत और रूस एक-दूसरे का समर्थन करते रहे हैं। उदाहरण के लिए, 1965 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान रूस, जो उस समय सोवियत संघ था, मध्यस्थता की भूमिका निभाई और 1966 में ताशकंद शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जहां एक शांति संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
1971 युद्ध में चरम पर पहुंचे थे भारत-सोवियत संबंध
इसके अलावा, 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध के दौरान रूस ने नई दिल्ली का समर्थन किया, जो संभवतः भारत-सोवियत संबंधों के चरम का प्रतीक था। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और सोवियत संघ के बीच 1971 की मैत्री और सहयोग संधि, अमेरिकी राजनयिकों द्वारा चीन के साथ अपने संबंधों को सामान्य करने की खातिर भारत की सुरक्षा को नजरअंदाज करने का परिणाम थी। तब रूस ने भारत की रक्षा की खातिर अपने परमाणु जहाजों को तैनात कर दिया था जिससे अमेरिका को झुकना पड़ा।
अमेरिका के जवाब में रूस ने परमाणु हथियार से लैस बेड़े को रवाना कर दिया था। रूस के इस बेड़े में अच्छी-खासी संख्या में परमाणु जहाज और पनडुब्बियां थीं। ऐसे में ब्रिटेन और अमेरिका को पीछे हटना पड़ा। रूस की ताकत देख ब्रिटिश जहाजों को मेडागास्कर में ही रोक दिया गया और अमेरिकी जहाज बंगाल की खाड़ी में एंट्री नहीं कर सके। इसी युद्ध में बांग्लादेश का जन्म हुआ था।
शीत युद्ध के बाद भी भारत और रूस ने अपने संबंधों को जारी रखा, 2000 से जब एक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर हुए और बाद में 2010 में इसे अपग्रेड किया गया, दोनों देशों के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन आयोजित होते रहे हैं। भारत और रूस वर्ष 2021 से 2+2 बैठकें, विदेश और रक्षा मंत्रियों के साथ संयुक्त बैठकें भी आयोजित कर रहे हैं।
भारत-रूस संबंध और इसका भविष्य
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच भी भारत ने मास्को के साथ अपने संबंध बनाए रखे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल जुलाई में व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात की थी। दरअसल, विदेश मंत्री सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने भारत-रूस संबंधों को पिछली आधी सदी से वैश्विक राजनीति में एक स्थिर संबंध बताया है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में रूस के खिलाफ मतदान करने से भी परहेज किया है।
एस जयशंकर और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव (AP)
रूस के साथ भारत की दोस्ती व्यावहारिक और रणनीतिक दोनों
रूस के साथ भारत की दोस्ती व्यावहारिक और रणनीतिक दोनों है। जब भारत ने 1974 में अपना पहला परमाणु परीक्षण किया, तो सोवियत संघ ने अमेरिका के उलट भारत के साथ सहयोग से इनकार नहीं किया। इसके अलावा, रूस भारत को हथियारों का एक बड़ा आपूर्तिकर्ता रहा है। 1990 के दशक की शुरुआत में सोवियत संघ भारतीय सेना के लगभग 70 प्रतिशत हथियारों, उसकी वायु सेना प्रणालियों का 80 प्रतिशत और नौसेना का 85 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता था। हालांकि, स्वीडन स्थित स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, आज यह संख्या घटकर कुल 36 प्रतिशत रह गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत रूसी हथियारों पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है और अपनी रक्षा खरीद में विविधता ला रहा है, और अमेरिका, इजराइल, फ्रांस और इटली जैसे देशों से अधिक हथियार खरीद रहा है।
रूस से कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत
ऊर्जा क्षेत्र में भी रूस भारत का सहयोगी रहा है। रूसी तेल अब भारत के वार्षिक कच्चे तेल आयात का लगभग 40 प्रतिशत है, जो 2021 में केवल दो प्रतिशत था। दोनों देश परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी सहयोग करते हैं। रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा प्रदाता कंपनी रोसाटॉम ने भारत में छह परमाणु ऊर्जा रिएक्टर बनाने के लिए एक समझौता किया है। दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक संबंध भी हैं। भारत और रूस का लक्ष्य इस दशक के अंत तक द्विपक्षीय व्यापार को 68 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करना है। कनेक्टिविटी पहलों में चेन्नई-व्लादिवोस्तोक समुद्री गलियारा और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण ट्रांसपोर्ट गलियारा भी शामिल हैं।
सांस्कृतिक रूप से भी मजबूत संबंध
सांस्कृतिक रूप से भी भारत और रूस के बीच मजबूत संबंध हैं। अगस्त 2023 से भारतीय यात्री रूस के लिए ई-वीजा के लिए पात्र हो गए हैं, जो आमतौर पर चार दिनों के भीतर प्रोसेस हो जाता है। पिछले दिसंबर में ऐसी खबरें आई थीं कि रूस जल्द ही भारतीय यात्रियों को बिना वीजा के यात्रा करने की अनुमति देगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप की बढ़ती धमकियों के बीच भारत-रूस अपने संबंधों को कैसे आगे बढ़ाते हैं। फिलहाल भारत ने साफ जता दिया है कि वह टैरिफ की कीमत पर रूस से दोस्ती को दांव पर नहीं लगाएगा।
