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हूती हमलों की एंट्री, सऊदी की एयरस्ट्राइक और सुलगता रेड सी... अमेरिका-ईरान की जंग में कैसे फंस रहा पूरा मिडिल ईस्ट?

यमन के हूती हमलों से लेकर इराक में सऊदी-अमेरिकी बमबारी और मिस्र के बंदरगाह पर ड्रोन अटैक तक... जानिए क्यों मिडिल ईस्ट में एक साथ खुल रहे हैं युद्ध के कई मोर्चे।

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मिडिल ईस्ट के हालात का पूरी दुनिया पर पड़ रह असर
Authored by: Nishant Tiwari
Updated Aug 1, 2026, 12:36 IST
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US Iran War: यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमले, इराक में ईरान समर्थित गुटों पर अमेरिका और सऊदी की भीषण बमबारी, जॉर्डन पर ईरान की मिसाइलें और मिस्र के बंदरगाह पर जलते हुए प्राकृतिक गैस (LNG) के जहाज पहली नजर में ऐसा लगता है कि पूरा मिडिल ईस्ट एक साथ किसी भयानक बारूद के ढेर पर बैठ गया है। कुछ विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शुक्रवार को ट्रंप ने ईरान पर हमले का आदेश देकर इसी करेले को नीम चढ़ा दिया है।

लेकिन अगर इस पूरे घटनाक्रम की परतों को उधेड़कर देखें, तो यह उतना जटिल भी नहीं है जितना दिखता है। यह सब दरअसल अमेरिका और ईरान के बीच चल रही उस सीधी और भीषण जंग का हिस्सा है, जिसकी मुख्य धुरी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) बनी हुई है। आइए समझते हैं कि मिडिल ईस्ट में एक के बाद एक नए मोर्चे कैसे खुल रहे हैं।

असली जड़: होर्मुज की जंग और ईंधन आपूर्ति की लड़ाई

इस पूरे युद्ध का केंद्र बिंदु कोहनी के आकार का होर्मुज स्ट्रेट है, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है। युद्ध छिड़ने से पहले दुनिया के कुल कारोबार किए जाने वाले तेल और गैस का पांचवां हिस्सा इसी संकरे रास्ते से गुजरता था। अब ईरान इस जलमार्ग पर अपना पूर्ण नियंत्रण होने का दावा कर रहा है और उसने अमेरिकी सेना की निगरानी वाले वैकल्पिक समुद्री मार्गों से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए हैं। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ही वाशिंगटन का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए इस मार्ग का खुला रहना अनिवार्य है। जब अमेरिका ईरान पर सीधे हमले करता है, तो ईरान जवाब में कुवैत और जॉर्डन जैसे उन अरब देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलें और ड्रोन दागता है जो अमेरिकी सेना की मेजबानी कर रहे हैं। हाल के हफ्तों में दोनों ओर से हुई गोलाबारी के कारण अंतरिम शांति समझौता पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है।

यमन के हूती: 'रेड सी' में नया मोर्चा और सऊदी अरब की घेराबंदी

ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने युद्ध के शुरुआती दौर में दूरी बनाए रखी थी, लेकिन अब वे खुलकर मैदान में उतर चुके हैं। हूतियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा कर दी है, जिससे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट और लाल सागर के रास्ते स्वेज नहर तक जाने वाला व्यापारिक मार्ग बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हूतियों ने उस ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन के पास स्थित सऊदी तेल ठिकानों पर हमले का दावा किया है, जिसके जरिए होर्मुज बंद होने के बाद सऊदी अरब लाखों बैरल तेल का निर्यात कर रहा था।

मैरीटाइम सुरक्षा एजेंसी 'एम्ब्रे' (Ambrey) के आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई के उत्तरार्द्ध के बाद बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही में 30% तक की भारी गिरावट आई है और दर्जनों जहाजों को बीच समुद्र से अपने रास्ते बदलने पड़े हैं।

इराक में 'क्रॉसफायर': सऊदी और अमेरिका का साझा हमला

हाल ही में सऊदी अरब ने आरोप लगाया कि इराक में सक्रिय ईरान समर्थित लड़ाकों ने लगातार दो दिनों तक उसकी तेल रिफाइनरियों पर ड्रोन दागे। इसके जवाब में अमेरिकी और सऊदी लड़ाकू विमानों ने इराक में इन उग्रवादी ठिकानों पर बमबारी की, जिसमें कम से कम 20 लड़ाके और 6 ईरानी सलाहकार मारे गए। इराक, जिसके संबंध अमेरिका और ईरान दोनों के साथ हैं, इस समय दो पाटों के बीच फंस गया है। इराकी सरकार ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। इराक का 'पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज' (PMF) आधिकारिक तौर पर इराकी सेना का हिस्सा है, लेकिन वे अक्सर स्वायत्त रूप से काम करते हैं और अमेरिकी सेना को निशाना बनाते हैं। सितंबर के अंत तक अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी की योजना थी, लेकिन इस नए क्षेत्रीय युद्ध के कारण यह प्रक्रिया खटाई में पड़ती दिख रही है।

मिस्र तक पहुंची युद्ध की लपटें

बुधवार को मिस्र के भूमध्यसागरीय दामिएटा बंदरगाह पर हुए एक ड्रोन हमले ने दुनिया को चौंका दिया। इस हमले में दो तरल प्राकृतिक गैस (LNG) जहाजों में भीषण आग लग गई, जिनमें एक अमेरिका के स्वामित्व वाला फ्लोटिंग स्टोरेज भी शामिल था।

मिस्र, जो अमेरिका का करीबी सहयोगी है और इस क्षेत्र में एक प्रमुख मध्यस्थकी भूमिका निभाता रहा है, अब तक सीधे सैन्य संघर्ष से बचता रहा था। हालांकि इस हमले की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है और हूतियों ने भी इससे इनकार किया है, लेकिन इसने संकेत दे दिए हैं कि युद्ध अब शांत इलाकों तक फैल रहा है।

इजराइल और लेबनान: क्या फिर सुलग उठेगा उत्तरी मोर्चा?

इजराइल, जिसने युद्ध की शुरुआत में ईरान पर भीषण बमबारी की थी, फिलहाल अंतरिम युद्धविराम के बाद से शांत है। वहीं, लेबनान में ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के साथ जून में हुआ युद्धविराम काफी हद तक लागू है। हालांकि, समझौते के तहत हिजबुल्लाह को अपने हथियार सौंपने हैं, जिसे इस समूह ने पूरी तरह खारिज कर दिया है। यदि ईरान या इजराइल की ओर से कोई भी एक छोटी सी चूक हुई, तो लेबनान-इज़राइल सीमा का मोर्चा भी दोबारा पूरी भयावहता के साथ खुल सकता है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी

मिडिल ईस्ट में एक साथ खुले ये तमाम मोर्चे यह साबित करते हैं कि यह केवल दो देशों का युद्ध नहीं है। होर्मुज और लाल सागर जैसी वैश्विक व्यापारिक धमनियों के बंद होने से क्रूड ऑयल और गैस की दरें आसमान छू रही हैं। यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह प्रॉक्सी वॉर तुरंत नहीं रुका, तो इसके गंभीर परिणाम केवल मिडिल ईस्ट को ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को भुगतने होंगे।

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