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इंडियन नेवी के पास कितने प्रकार के हैं युद्धपोत? एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट के बीच क्या है अंतर

इंडियन नेवी के पास लगभग 150 युद्धपोत है, लेकिन सभी एक तरह के नहीं है, इनमें कुछ एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, कुछ डिस्ट्रॉयर, कुछ फ्रिगेट और कुछ माइस्वीपर शामिल है। एयरक्राफ्ट कैरियर जहां समुद्र में एक बलशाली हाथी की तरह हैं, वही डिस्ट्रॉयर, जहां एयरक्राफ्ट कैरियर की सुरक्षा करते हुए समुद्र में घातक हमला करने में सक्षम होता है। आइए जानते हैं एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट के बीच क्या है अंतर?

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इंडियन नेवी के पास कितने युद्धपोत
KEY HIGHLIGHTS
    • भारतीय नौसेना के पास लगभग 150 युद्धपोत
    • इंडियन नेवी के पास दो एयर क्राफ्ट कैरियर
    • भारत के डिस्ट्रॉयर काफी खतरनाक

भारतीय नेवी की जहाजें आमतौर पर एक जैसी दिखती हैं, एयरक्राफ्ट कैरियर को छोड़ दें तो, लेकिन ऐसा नहीं है, इंडियन नेवी के पास एक नहीं बल्कि आठ प्रकार के युद्धपोत हैं, ये तो मुख्य हैं- जिसमें एयरक्राफ्ट कैरियर से लेकर डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, कोर्वेट, माइनस्वीपर शामिल हैं। इन युद्धपोतों की अलग-अलग खासियत होती है, कोई फाइटर जेट्स से लैस होता है तो किसी पर सिर्फ हेलीकॉप्टर ही उतर सकते हैं, कोई समुद्र में पनडुब्बियों के लिए काल होता है तो कोई समुद्र में बिछे माइंस को हटाने का काम करता है।

भारतीय नौसेना के पास कितने युद्धपोत?

भारत के रक्षा मंत्रालय के अनुसार भारतीय नौसेना के पास लगभग 150 युद्धपोत और सबमरीन हैं। साथ ही 50 से अधिक पोतों और सबमरीन का निर्माण चल रहा है। आज की तारीख में भारत न सिर्फ अपने घर में ही युद्धपोत का निर्माण कर रहा है बल्कि एयरक्राफ्ट कैरियर का भी निर्माण भारत में ही हो रहा है। भारतीय नौसेना के पास 2 एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, 13 डिस्ट्रॉयर, 17 फ्रिगेट, 18 कोर्वेट और 19-20 सबमरीन है। इसके अलावा दर्जनों गश्ती पोत, माइन स्वीपर, लैंडिंग शिप आदि नौसेना में शामिल हैं।

इंडियन नेवी के सभी आठों प्रकार के युद्धपोत के बारे जानिए

भारतीय नौसेना के पास आठ प्रकार के युद्धपोत यानी कि वारशीप हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।

1. एयरक्राफ्ट कैरियर

भारत के पास दो एयरक्राफ्ट कैरियर हैं- INS विक्रमादित्य, INS विक्रांत। INS विक्रमादित्य और INS विक्रांत भारतीय नौसेना की ताकत और आत्मनिर्भरता के दो अहम स्तंभ हैं। दोनों एयरक्राफ्ट कैरियर हैं, लेकिन उनकी पृष्ठभूमि और भूमिका अलग-अलग रही है। INS विक्रमादित्य भारत का पहला सक्रिय विमानवाहक पोत है, जिसे रूस से प्राप्त किया गया था। यह मूल रूप से सोवियत संघ का विमानवाहक पोत एडमिरल गोर्शकोव था, जिसे मरम्मत और आधुनिकीकरण के बाद 2013 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। यह STOBAR तकनीक पर आधारित है और मिग-29K लड़ाकू विमानों व हेलीकॉप्टरों को संचालित करता है। INS विक्रांत भारत का पहला स्वदेशी विमानवाहक पोत है, जिसे मेक इन इंडिया पहल के तहत देश में ही डिजाइन और निर्मित किया गया। इसे 2022 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। विक्रांत आधुनिक तकनीक से लैस है और यह भी STOBAR प्रणाली पर काम करता है।
INS Vikrant and INS Vikramaditya

आईएनएस विक्रांत और आईएनएस विक्रमादित्य (फोटो- Indian Navy)

2. डिस्ट्रॉयर

डिस्ट्रॉयर एयरक्राफ्ट कैरियर समूह की रक्षा करते हैं, समुद्री मार्गों की सुरक्षा करते हैं और संकट के समय तेज हमला करने की क्षमता रखते हैं। आधुनिक युद्ध में ये जहाज समुद्र में चलता हुआ किला माने जाते हैं। इंडियन नेवी के प्रमुख डिस्ट्रॉयर की लिस्ट यहां देखिए

INS विशाखापत्तनम

यह भारत का सबसे आधुनिक स्टेल्थ डिस्ट्रॉयर है। इसमें ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल, अत्याधुनिक रडार और एयर डिफेंस सिस्टम लगे हैं। यह दुश्मन के जहाज, ज़मीन और हवा-तीनों तरह के लक्ष्यों को निशाना बना सकता है।

INS कोलकाता क्लास

इस श्रेणी में INS कोलकाता, INS कोच्चि और INS चेन्नई शामिल हैं। ये पूरी तरह स्वदेशी स्टेल्थ डिस्ट्रॉयर हैं और मल्टी-रोल क्षमता रखते हैं। ब्रह्मोस मिसाइल और बराक-8 एयर डिफेंस सिस्टम इनकी खास पहचान है।

INS दिल्ली क्लास

INS दिल्ली, INS मैसूर और INS मुंबई इस क्लास के जहाज हैं। ये लंबे समय से नौसेना की रीढ़ रहे हैं और आज भी आधुनिकीकरण के बाद प्रभावी भूमिका निभा रहे हैं।

INS राजपूत क्लास

ये पुराने लेकिन भरोसेमंद डिस्ट्रॉयर रहे हैं। अब इन्हें धीरे-धीरे सेवा से हटाया जा रहा है, लेकिन इन्होंने दशकों तक भारतीय नौसेना की सेवा की।

3. फ्रिगेट

फ्रिगेट भारतीय नौसेना का ऐसा युद्धपोत है, जो आकार में डिस्ट्रॉयर से छोटा लेकिन भूमिका में बेहद अहम होता है। इसे खासतौर पर पनडुब्बी रोधी युद्ध, समुद्री सुरक्षा और काफिले की रक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इनमें मिसाइल, टॉरपीडो, रडार, सोनार और हेलीकॉप्टर तैनात करने की सुविधा होती है। भारतीय नौसेना में शिवालिक क्लास, तलवार क्लास और नीलगिरी क्लास (प्रोजेक्ट-17A) जैसी आधुनिक फ्रिगेट शामिल हैं। खासकर नीलगिरी क्लास पूरी तरह स्वदेशी और स्टेल्थ तकनीक से लैस है, जो दुश्मन की नजर से बचते हुए हमला करने में सक्षम है।

indian navy battle group

विक्रांत और विक्रमादित्य के साथ दो कोलकाता-क्लास डिस्ट्रॉयर और एक तलवार-क्लास फ्रिगेट (फोटो- Indian Navy)

4. कोर्वेट

यह नौसेना का छोटे आकार का लेकिन तेज और घातक युद्धपोत होता है। यह फ्रिगेट और डिस्ट्रॉयर से छोटा होता है, लेकिन तटीय इलाकों और सीमित समुद्री क्षेत्र में इसकी भूमिका बेहद अहम होती है। कोर्वेट का इस्तेमाल मुख्य रूप से तटीय सुरक्षा, पनडुब्बी रोधी अभियान, समुद्री गश्त और त्वरित हमले के लिए किया जाता है। भारतीय नौसेना में कामोर्ता क्लास (पनडुब्बी रोधी कोर्वेट), कोरा क्लास और अभय क्लास कोर्वेट शामिल हैं। खास तौर पर कामोर्ता क्लास पूरी तरह स्वदेशी है और अत्याधुनिक सोनार सिस्टम से लैस है, जिससे दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाया जा सकता है।

5. सबमरीन

पनडुब्बियां, नौसेना की सबसे गुप्त, घातक और रणनीतिक ताकत मानी जाती हैं। आधुनिक युद्ध में पनडुब्बियां “समुद्र के भीतर अदृश्य शक्ति” होती हैं। ये दुश्मन को बिना चेतावनी दिए भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं और किसी भी देश की नौसैनिक रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाती हैं। भारतीय नौसेना के पास सिंधुघोष और सिंधुराज (डीजल-इलेक्ट्रिक), स्कॉर्पीन क्लास (INS कलवरी श्रेणी) और परमाणु पनडुब्बी INS अरिहंत क्लास जैसी आधुनिक पनडुब्बियां हैं। अरिहंत क्लास भारत की समुद्री परमाणु क्षमता की रीढ़ मानी जाती है।

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भारतीय नौसेना का पनडुब्बियां (फोटो- Western Naval Command)

6. एम्फिबियस वॉरफेयर शिप्स

ये ऐसे युद्धपोत होते हैं, जो समुद्र से सीधे जमीन पर सैन्य कार्रवाई को संभव बनाते हैं। इनका इस्तेमाल सैनिकों, टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और हेलीकॉप्टरों को समुद्र के रास्ते तट पर उतारने के लिए किया जाता है। भारतीय नौसेना के पास INS जलाश्व, INS घड़ियाल जैसे एम्फिबियस वॉरफेयर शिप्स हैं। ये जहाज तटीय इलाकों में तेजी से सैन्य तैनाती और मानवीय सहायता पहुंचाने में सक्षम हैं। एम्फिबियस वॉरफेयर शिप्स बिना बंदरगाह के भी सैनिकों को तट पर उतार सकते हैं।

7. माइनस्वीपर

ये ऐसे विशेष युद्धपोत होते हैं, जिनका काम समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को खोजकर निष्क्रिय करना या नष्ट करना होता है। भारतीय नौसेना के पास पहले INS करवार (Pondicherry Class) जैसे माइनस्वीपर रहे हैं। भविष्य में नौसेना नए और आधुनिक माइन काउंटर मेजर वेसल्स (MCMV) शामिल करने की योजना पर काम कर रही है।

8. गश्ती पोत

ये ऐसे नौसैनिक जहाज होते हैं, जिनका इस्तेमाल समुद्री सीमाओं की निगरानी, सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए किया जाता है। भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल गश्ती पोतों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करते हैं। तटरक्षक बल के गश्ती पोत तटीय सुरक्षा, खोज-बचाव और आपदा राहत में अहम भूमिका निभाते हैं।

INS Saryu

आईएनएस सरयू (फोटो- Indian Navy)

एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट के बीच क्या है अंतर

एयरक्राफ्ट कैरियर को समुद्र में चलता-फिरता एयरबेस कहा जाता है। इसका मुख्य काम लड़ाकू विमानों और हेलिकॉप्टरों को समुद्र से उड़ान भरने और उतरने की सुविधा देना होता है। यह बेहद विशाल होता है और किसी भी नौसैनिक बेड़े की ताकत का केंद्र माना जाता है। कैरियर खुद सीधे लड़ाई में कम उतरता है। डिस्ट्रॉयर तेज़, ताकतवर और बहुउद्देश्यीय युद्धपोत होता है। इसका काम एयरक्राफ्ट कैरियर या बड़े बेड़े की रक्षा करना, दुश्मन के जहाज़ों, मिसाइलों और विमानों से मुकाबला करना होता है। इसमें अत्याधुनिक रडार, लंबी दूरी की मिसाइलें और पनडुब्बी-रोधी हथियार लगे होते हैं। यह सीधे युद्ध में सक्रिय भूमिका निभाता है। फ्रिगेट आकार में डिस्ट्रॉयर से छोटा होता है और आमतौर पर एस्कॉर्ट यानी सुरक्षा देने की भूमिका निभाता है। इसका मुख्य काम पनडुब्बियों से रक्षा, समुद्री निगरानी और काफिले की सुरक्षा करना होता है।
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