Himanta Biswa Sarma: पूर्वोत्तर के राजनीतिक 'चाणक्य' की नई पारी का आगाज होने जा रहा है। भाजपा विधायक दल और एनडीए का निर्विरोध नेता चुने जाने के बाद हिमंत बिस्वा सरमा 12 मई को लगातार दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेंगे। रविवार को हिमंता बिस्वा सरमा को असम विधानसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) का नेता चुना गया।
177 सीटों वाले विधानसभा चुनाव में एनडीए ने कुल 102 सीटें जीतीं, जबकि विपक्ष को 75 सीटों पर संतोष करना पड़ा। भारतीय जनता पार्टी ने अकेले 82 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं उसके सहयोगी दल एजीपी और बीओपीएफ ने 10-10 सीटें हासिल कीं। दूसरी ओर कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को केवल 19 सीटें मिलीं।
असम में चला 'मामा' का जादू
कभी कांग्रेस के रणनीतिकार रहे हिमंता ने असम में बीजेपी को अभेद किले में तब्दील कर दिया है। बीजेपी के 'फायरब्रांड' नेताओं में से एक बन चुके हिमंता को असम की जनता प्यार से 'मामा' कहकर बुलाती है। जितने प्यार और 'अनफिल्टर' तरीके से वह जनता से मुखातिब होते हैं, वह अपने आप में बेहद खास है। लोगों के हाथों से 'डाइट कोक' लेकर पीना या जनता से बेबाक अंदाज में बात करना, हिमंता का अंदाज बिल्कुल निराला है। यही वजह है कि उन्होंने कांग्रेस के '3G' किलों को ढहाकर जीत की नई इबारत लिख दी।
चुनावी जनसभा में डाइट कोक पीते हिमंता बिस्वा सरमा। himanta biswa insta handle
दरअसल, 3G का मतलब असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई, गौरव गोगोई और गांधी परिवार, यानी राहुल गांधी है। हिमंता, अक्सर इस 3G शब्द का इस्तेमाल कर कांग्रेस पर निशाना साधते हैं। हालांकि, सिर्फ बेबाक अंदाज और जनता से जुड़ाव ही हिमंता को सफल नहीं बनाती। पिछले पांच सालों में उन्होंने असम में कई ऐसे काम भी किए, जिसके दम पर उन्होंने असम की जनता से वोट मांगे।
'अरुणोदय' (Orunodoi) योजना
असम विधानसभा चुनाव की घोषणा से ठीक पहले, सरकार ने अपनी फ्लैगशिप 'अरुणोदय योजना' के माध्यम से राज्य के 40 लाख परिवारों की महिलाओं के खातों में 9-9 हजार रुपये ट्रांसफर कर उन्हें सीधा आर्थिक संबल प्रदान किया। हिमंता ने असम की महिलाओं के बैंक खातों में सीधे पैसे भेजकर एक बड़ा और वफादार 'महिला वोट बैंक' तैयार कर लिया, जिसका फायदा उन्हें चुनाव में मिला।
जनसभा में शामिल हिमंता बिस्वा सरमा की फोटो। himanta sarma insta handle
छात्राओं को मिला वित्तीय लाभ
राज्य में बाल विवाह को रोकने के लिए लड़कियों के भविष्य को उज्जवल बनाने के लिए हिमंता सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया। 12वीं से पोस्ट ग्रेजुएट स्तर तक की छात्राओं को हर महीने वित्तीय मदद देने के लिए 2024 में 'निजुत मोइना' योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत कक्षा 11वीं की छात्राओं के लिए 10 महीने तक हर महीने 1,000 रुपये, ग्रेजुएशन फर्स्ट ईयर की छात्राओं के लिए 10 महीने तक हर महीने 1,250 रुपये और पोस्ट ग्रेजुएट तथा बीएड कोर्स की छात्राओं के लिए 10 महीने तक हर महीने 2,500 रुपये निर्धारित हैं।चाय बागान मजदूरों को लाभचुनाव से पहले पीएम मोदी ने डिब्रूगढ़ की चाय पट्टी में मजदूरों से मुलाकात की। इस मुलाकात के फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए। असम में चाय बगान में काम करने वाले मजदूरों (Tea Gardens Workers) का काफी राजनीतिक महत्व है। असम में करीब 800 चाय बागानों में 10 लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। पूर्वोत्तर का यह राज्य देश के सालाना चाय उत्पादन में करीब 52 प्रतिशत योगदान देता है। वहीं, राज्य विधानसभा की कुल 126 सीटों में से लगभग 40 सीटों के नतीजों में इन मजदूरों और उनके परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
हिमंता सरकार ने चाय मजदूरों के लिए कई योजनाएं चलाई हैं। चाय बगान के छह लाख मजदूरों को पांच-पांच हजार रुपये एकमुश्त दिए। सरकार ने चाय मजदूरी का वेतन बढ़ाकर 217 रुपये कर दिया है। वहीं, सरकार उन्हें मुफ्त चावल भी दे रही है। साथ ही उनके लिए सड़कों का निर्माण भी करवाया गया है। चाय बागान मजदूरों के 7.3 लाख बैंक खाते खोले गए हैं। इतना ही नहीं, हिमंता सरकार ने असम बगीचा धन पुरस्कार योजना भी शुरू की है।
असम के चाय बगान मजदूरों से मिले पीएम मोदी। himanta biswa sarma insta handle
अवैध घुसपैठियों पर कार्रवाई
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य की लगभग 1.5 लाख बीघा जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर और घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए 1950 के कानून को सख्ती से लागू कर अपनी प्रशासनिक दृढ़ता और प्रतिबद्धता को साबित किया है। उनके इन कड़े फैसलों ने न केवल कानून-व्यवस्था को मजबूत किया, बल्कि असम के विभिन्न समुदायों के बीच एक नई एकजुटता पैदा की। अवैध घुसपैठ के मुद्दे पर उनके इस स्पष्ट रुख ने बोडो, अहोम, कार्बी, आदिवासी और चाय बागान मजदूरों जैसे अलग-अलग हिस्सों में बंटे हिंदू समाज को एक साझा पहचान और सुरक्षा के भाव के साथ एकजुट करने में बड़ी सफलता हासिल की है।हिंदू मतदाताओं की एकजुटता
असम चुनाव नतीजों ने हिंदू मतदाताओं के जबरदस्त ध्रुवीकरण को स्पष्ट कर दिया है, जहां राज्य की 103 हिंदू बहुल सीटों में से भाजपा ने रिकॉर्ड 100 सीटों पर जीत दर्ज की। इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की ठोस रणनीति और महिलाओं को केंद्र में रखकर चलाई गई 'लाभार्थी योजनाओं' का बड़ा हाथ रहा। गौरतलब है कि इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 1,250 रुपये की नकद सहायता दी जाती है, जिसने जमीन पर एक वफादार महिला वोट बैंक तैयार किया है।
असम की जनता से मुलाकात करते हिमंता बिस्वा सरमा। PTI
इसके अलावा, महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देते हुए 'महिला उद्यमिता योजना' के तहत 30 लाख महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की सहायता राशि वितरित की गई। साथ ही, भविष्य में व्यापार और आत्मनिर्भरता के लिए 1-1 लाख रुपये देने के चुनावी वादे ने महिला मतदाताओं के बीच भाजपा के प्रति विश्वास को और गहरा कर दिया। इन आर्थिक पहलों और सांस्कृतिक एजेंडे के तालमेल ने भाजपा को राज्य में एक अपराजेय बढ़त दिला दी है।
