रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण को लगभग चार साल होने वाले हैं और इस लंबी व थकाऊ लड़ाई के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की एक साथ कई गंभीर संकटों का सामना कर रहे हैं। देश के भीतर राजनीतिक अस्थिरता, भारी भ्रष्टाचार का खुलासा, विदेश नीति पर बढ़ता दबाव और मोर्चे पर रूस की लगातार बढ़त, ये सभी चुनौतियां उनके नेतृत्व की परीक्षा ले रही हैं। आइए समझते हैं।
भ्रष्टाचार कांड से उठी बगावत
पिछले एक सप्ताह से जेलेंस्की सरकार एक विशाल 100 मिलियन डॉलर के भ्रष्टाचार घोटाले के कारण विवादों में घिरी है। यह घोटाला ऊर्जा क्षेत्र में ठेकेदारों के दिए गए कमीशन और फर्जी भुगतान से जुड़ा हुआ है। जांच एजेंसियों के किए खुलासे के बाद जेलेंस्की ने दो वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त किया और कई करीबी सहयोगियों पर प्रतिबंध लगाया। घोटाले में शामिल बताए जा रहे टिमूर मिंडिच देश छोड़कर फरार हो गए हैं, जो उस मीडिया कंपनी में जेलेंस्की के पुराने साझेदार थे जहां वह राष्ट्रपति बनने से पहले को-ओनर थे।
सत्ताधारी ‘सर्वेंट ऑफ द पीपल’ पार्टी के कई सांसद अब जेलेंस्की के शक्तिशाली चीफ ऑफ स्टाफ आंद्रिय येर्माक को हटाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि जांच में न तो जेलेंस्की और न ही येर्माक पर सीधे आरोप लगे हैं, लेकिन आरोप है कि सरकारी तंत्र में सबसे ज्यादा शक्ति येर्माक के हाथों में है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि जेलेंस्की ने इस मामले पर कड़ा कदम नहीं उठाया तो अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों के बीच उनकी छवि को नुकसान हो सकता है।
क्या जेलेंस्की की सत्ता को कोई खतरा है?
रूस के हमले के बाद यूक्रेन में लागू मार्शल लॉ के कारण फिलहाल चुनाव अनिश्चितकाल के लिए टल चुके हैं। इसलिए संसद में जेलेंस्की का बहुमत कम हो जाए या लोकप्रियता घटे, फिर भी युद्ध के दौरान उनकी कुर्सी सीधे खतरे में नहीं है। यूक्रेन में राष्ट्रपति का कार्यकाल पांच साल का होता है और युद्ध से पहले अगला चुनाव 2024 में होना था। हालात मुश्किल इसलिए हैं क्योंकि अगर अमेरिका और रूस के बीच प्रस्तावित शांति योजना पर कोई समझौता बनता है, तो उसे संसद से पारित कराना जेलेंस्की के लिए चुनौती बन सकता है, खासकर अगर पार्टी में दरार बढ़ती रहे तो।
क्या मुश्किल बन सकते हैं पूर्व जनरल जालुज्नी
यूक्रेन की राजनीति में विपक्ष का कोई बड़ा चेहरा नहीं उभर पाया है। पूर्व राष्ट्रपति पेट्रो पोरोशेंको अपनी सीमित राजनीतिक पकड़ से आगे नहीं बढ़ सके हैं। हालांकि, देश के पूर्व आर्मी चीफ वैलेरी जालुज्नी एक संभावित चुनौती के रूप में देखे जाते हैं। उन्होंने युद्ध के शुरुआती चरण में कई महत्वपूर्ण सैन्य सफलताएं हासिल की थीं। जेलेंस्की ने 2023 में उन्हें पद से हटाया और अब वे यूक्रेन के यूके में राजदूत हैं। जालुज्नी ने राजनीति में आने से इंकार किया है, लेकिन जनमत सर्वेक्षणों में वे अभी भी लोकप्रिय दिखते हैं, जिसके कारण उनका नाम संभावित विकल्प के रूप में चर्चा में बना हुआ है।
अमेरिका और रूस की विवादित शांति योजना
अमेरिका और रूस ने एक ऐसा प्रस्ताव तैयार किया है जो युद्ध समाप्त करने की दिशा में कदम माना जा रहा है, लेकिन इसमें यूक्रेन के लिए भारी रियायतें शामिल हैं। एपी की रिपोर्ट बताती है कि ड्राफ्ट में, यूक्रेन को रूस को अपना कुछ क्षेत्र देना होगा और अपनी सेना के आकार को सीमित करना होगा। इस योजना के तहत रूस को पूरे डोनबास क्षेत्र का नियंत्रण मिल सकता है, जबकि यूक्रेन अभी भी उसका कुछ हिस्सा नियंत्रित करता है। जेलेंस्की इन शर्तों को पहले भी असंवैधानिक और अन्यायपूर्ण कहकर ठुकरा चुके हैं। लेकिन अब, भ्रष्टाचार घोटाले और बढ़ते दबाव के कारण उनकी स्थिति कमजोर दिख रही है। जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अपनी गरिमा खोने या एक प्रमुख सहयोगी खोने जैसी कठिन परिस्थिति में फंस सकता है। यूरोपीय देशों ने इस योजना का विरोध कर यूक्रेन का समर्थन किया है।
मोर्चे पर रूस का बढ़ता दबदबा
राजनीतिक संकट के बीच यूक्रेन की असल चुनौती युद्ध में है। रूस ने मोर्चे पर हमले तेज कर दिए हैं और कई क्षेत्रों में धीमी लेकिन स्थिर बढ़त बना रहा है। खासकर खारकीव और डोनबास क्षेत्र में रूसी सैनिकों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। पूर्वी डोनेट्स्क के पोक्रोव्स्क शहर के आसपास सबसे भीषण लड़ाई जारी है, जो यूक्रेन के लिए एक महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक केंद्र है। साथ ही नवंबर में रूस के बिजली संयंत्रों पर किए गए हमलों से यूक्रेन में गंभीर बिजली संकट पैदा हो गया है, जो सर्दी के मौसम को और कठिन बना रहा है।
अगर हम सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए देखें तो पाएंगे कि जेलेंस्की एक साथ कई मोर्चों पर लड़ रहे हैं। अब यह देखना होगा कि वे इन संकटों से कैसे निपटते हैं और क्या देश के भीतर एकता बनाए रखकर एक न्यायपूर्ण शांति समझौते की ओर बढ़ पाते हैं।