इन दिनों अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है। एक तरफ अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान में ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं और दूसरी तरफ ईरान इजरायल के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इस युद्ध के दौरान बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करके एक-दूसरे के ठिकानों पर हमले किए जा रहे हैं। लेकिन क्रूज मिसाइलों का नाम सुनने को नहीं मिल रहा, जबकि भारत के पाकिस्तान में ऑपरेशन सिंदूर के साथ ही रूस-यूक्रेन युद्ध में क्रूज मिसाइलों ने बड़ी भूमिका निभाई। ऐसा क्यों है? इसका एक कारण को क्रूज मिसाइलों की कम रेंज है, चलिए जानते हैं क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलों में क्या फर्क है और क्रूज मिसाइलों की रेंज कम क्यों होती है?
आधुनिक युद्ध में मिसाइल तकनीक की भूमिका लगातार बढ़ रही है। दुनिया के तमाम देश अपनी सैन्य शक्ति को मजबूत करने के लिए नई-नई मिसाइल प्रणालियां विकसित कर रहे हैं। इनमें दो प्रमुख प्रकार की मिसाइलें अक्सर चर्चा में रहती हैं, जिनके नाम क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल हैं। दोनों ही अत्याधुनिक हथियार हैं, लेकिन इनकी कार्यप्रणाली, उड़ान का तरीका और रेंज एक-दूसरे से काफी अलग होती है।
क्रूज मिसाइलें कम दूरी के टार्गेट्स को निशाना बनाती हैं, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलों से दूर के टार्गेट्स पर निशाना लगाया जाता है। प्रश्न ये है कि अगर दूर तक मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो फिर कम दूरी की क्रूज मिसाइलों की जरूरत क्यों है? आखिर सरकारें इन पर खर्च क्यों कर रही हैं? क्यों यह हथियार इतना ज्यादा घातक है?
क्रूज मिसाइल क्या है?
क्रूज मिसाइल कम दूरी की मारक क्षमता वाली ऐसी मिसाइल होती है, जो जमीन या समुद्र की सतह के काफी करीब उड़ान भरती है। क्रूज मिसाइलें जमीन या समुद्र के समानांतर काफी कम ऊंचाई पर उड़ते हुए दुश्मन के ठिकानों पर अभेद्य निशाना लगाती हैं। कम ऊंचाई के कारण दुश्मन के रडार के लिए भी इन्हें पकड़ना मुश्किल हो जाता है। क्रूज मिसाइलों में अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम, जीपीएस और सेंसर लगे होते हैं, जो इन्हें बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य तक पहुंचने में मदद करते हैं। इन मिसाइलों की एक और खास बात यह है कि यह हवा में ही अचानक दिशा बदलकर दुश्मन पर अचूक निशाना लगा सकती हैं। यही कारण है कि भारत सहित तमाम देश क्रूज मिसाइलों पर इतना भरोसा करते हैं। भारत की सबसे मशहूर और अचूक क्रूज मिसाइल का नाम ब्रह्मोस है। ब्रह्मोस मिसाइल की रेंज 450-500 किमी है, जबकि सुपरसोनिक ब्रह्मोस की रेंज 800-900 किमी तक है।
क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल अक्सर दुश्मन के सैन्य ठिकानों, रडार स्टेशन, एयरबेस और रणनीतिक इमारतों पर सटीक हमला करने के लिए किया जाता है। क्रूज मिसाइल की रेंज बैलिस्टिक मिसाइल की तुलना में कम होती है, क्योंकि क्रूज मिसाइल पूरे समय इंजन की मदद से उड़ान भरती है। इसका मतलब है कि इसे लगातार ईंधन की जरूरत होती है। जितना अधिक ईंधन होगा, मिसाइल का वजन उतना ही बढ़ जाएगा, जिससे उसकी रेंज भी सीमित हो जाती है। क्रूज मिसाइल जमीन के करीब उड़ती है, और उसे हवा का प्रतिरोध ज्यादा झेलना पड़ता है, उस पर धरती का गुरुत्वाकर्षण बल भी ज्यादा लगता है। क्रूज मिसाइलों को बहुत ही सटीक और नियंत्रित उड़ान के लिए डिजाइन किया जाता है। वे रास्ते में अचानक मुड़ सकती हैं, दिशा बदल सकती हैं और अलग-अलग ऊंचाई पर उड़ सकती हैं।
बैलिस्टिक मिसाइल कैसे होती है अलग
क्रूज मिसाइल केउलट बैलिस्टिक मिसाइल की उड़ान का तरीका बिल्कुल अलग होता है। बैलिस्टिक मिसाइल को शुरुआत में रॉकेट इंजन से बहुत तेज गति से ऊपर आसमान की ओर भेजा जाता है। इसके बाद वह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण और रफ्तार के आधार पर एक तय बैलिस्टिक ट्रेजेक्टरी यानी परवलयाकार रास्ते पर चलती है। भारत में इस तरह की मिसाइल का उदाहरण अग्नि-5 है, जो 5 हजार से 8 हजार किलोमीटर दूर तक मार कर सकती है। इस तरह की बैलिस्टिक मिसाइलें वायुमंडल से बाहर या उसके ऊपरी हिस्से तक पहुंच जाती हैं। जहां हवा का प्रतिरोध बहुत ही कम होता है और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल भी कम होता है, यही कारण है कि वह हजारों किमी तक की दूरी आसानी से तय कर लेती है।
बैलिस्टिक मिसाइलें लंबी दूरी की मारक क्षमता रखती हैं, लेकिन काफी ऊंचाई से आने के कारण यह रडार पर आसानी से पकड़ में आ जाती हैं। इससे दुश्मन को इनके खिलाफ रणनीति बनाने का मौका मिल जाता है। जबकि क्रूज मिसाइलें धरती या समुद्र के समानांतर कम ऊंचाई पर उड़ती है, जिससे वह रडार को चकमा दे देती हैं। क्रूज मिसाइलें छोटी दूरी के टार्गेट्स पर सटीक और नियंत्रित हमलों के लिए इस्तेमाल होती हैं, जबकि बैलिस्टिक मिसाइलें लंबी दूरी और तेज हमले के लिए जानी जाती हैं।