Karnataka New CM: कर्नाटक में आज वो हो गया, जिसका अंदेशा तो 20 मई 2023 से ही था, जिस दिन सिद्दारमैया (Siddaramaiah) सीएम बने थे, लेकिन आज इसपर फाइनल मुहर लग गई। सिद्दारमैया कर्नाटक की सत्ता से आउट हो गए हैं और अभी तक उनके डिप्टी रहे डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) अब अगला मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। ये सब एक दिन में नहीं हुआ, सिद्दारमैया और डीके शिवकुमार के बीच शह और मात का खेल महीनों चला। दोनों अपने-अपने क्षेत्र, संगठन और आलाकमान तक पहुंचे में इतने मजबूत रहे हैं कि कांग्रेस नेतृत्व को इसे सुलझाने में भी महीनों लग गए। और आखिरकार कांग्रेस के संकटमोचक कहे जाने वाले डीके शिवकुमार अब मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर कौन हैं डीके शिवकुमार, जिन्होंने सिद्दारमैया जैसे ताकतवर को पटखनी दे दी है।
डीके शिवकुमार का जन्म और राजनीति में प्रवेश
डीके शिवकुमार का जन्म 15 मई 1962 को कर्नाटक के रामनगर जिले के कनकपुरा तालुक के अंतर्गत आने वाले 'दोड्डआलाहल्ली' (Doddalahalli) गांव में हुआ। उनका जन्म एक कृषि प्रधान परिवार में हुआ था, जो वोक्कालिगा (Vokkaliga) समुदाय से ताल्लुक रखता है। यह समुदाय कर्नाटक की राजनीति और सामाजिक ताने-बाने में बेहद प्रभावशाली माना जाता है। उन्होंने बेंगलुरु से अपनी स्कूली शिक्षा और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। छात्र जीवन के दौरान ही उनका झुकाव राजनीति की तरफ हो गया था। डीके शिवकुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत 1980 के दशक की शुरुआत में एक छात्र नेता के रूप में की थी। वे कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से जुड़े। उनकी नेतृत्व क्षमता को देखते हुए जल्द ही उन्हें युवा कांग्रेस में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने लगीं।
डीके शिवकुमार की राजनीतिक यात्रा
शिवकुमार मात्र 23 साल की उम्र में तब सुर्खियों में आए, जब 1985 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें तत्कालीन कद्दावर नेता और आगे चलकर देश के प्रधानमंत्री बने एचडी देवेगौड़ा के खिलाफ सैटनूर (Sathanur) सीट से मैदान में उतार दिया। हालांकि शिवकुमार यह चुनाव हार गए, लेकिन उन्होंने देवेगौड़ा को कड़ी टक्कर दी और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की नजरों में अपनी जगह बना ली। साल 1989 में उन्होंने सैटनूर सीट से दोबारा चुनाव लड़ा और पहली बार विधानसभा पहुंचे। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वे सैटनूर और बाद में कनकपुरा सीट से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं। कर्नाटक की राजनीति में डीके शिवकुमार को अजेय माना जाता है। उन्होंने अपने राजनीतिक करियर में अब तक लगातार 8 बार विधानसभा चुनाव जीता है। 2023 के चुनाव में उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की सबसे बड़ी जीत दर्ज की। उन्होंने बीजेपी के कद्दावर नेता आर. अशोक को 1,22,000 से अधिक वोटों के रिकॉर्ड अंतर से मात दी और तब सीएम बनते-बनते रह गए, सिद्दारमैया सीएम बने और डीके डिप्टी सीएम बने।डीके लगातार जीतते रहे हैं चुनाव
कब-कब कांग्रेस के लिए संकटमोचक बने डीके शिवकुमार?
- डीके शिवकुमार को कांग्रेस पार्टी का राष्ट्रीय 'संकटमोचक' उनकी अद्भुत चुनावी रणनीति और संकट प्रबंधन क्षमता के कारण कहा जाता है। जब भी पार्टी विधायकों के टूटने या सरकार गिरने के संकट में फंसी, उन्होंने हमेशा ढाल बनकर काम किया।
- 2002 (महाराष्ट्र संकट): मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख की सरकार बचाने के लिए महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में सुरक्षित रखा और अविश्वास प्रस्ताव में सरकार की जीत सुनिश्चित की।
- 2017 (अहमद पटेल का राज्यसभा चुनाव): गुजरात में कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए 42 विधायकों को बेंगलुरु संभाला। ठिकानों पर आईटी छापों के बावजूद वे डिगे नहीं और अहमद पटेल की ऐतिहासिक जीत कराई।
- 2018 (कर्नाटक सरकार): विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के विधायकों को एकजुट रखा, जिससे भाजपा बहुमत साबित नहीं कर सकी और राज्य में गठबंधन की सरकार बनी।
- 2024 (हिमाचल प्रदेश संकट): राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद सुक्खू सरकार गिरने की कगार पर थी। शिवकुमार ने शिमला पहुंचकर नाराज विधायकों को मनाया और सरकार बचाई।
कांग्रेस के सबसे अमीर संकटमोचक
डीके शिवकुमार भारत के सबसे अमीर राजनेताओं में गिने जाते हैं। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और उनके द्वारा 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में दाखिल किए गए आधिकारिक हलफनामे के अनुसार, उनकी कुल संपत्ति 1,413 करोड़ रुपये से अधिक है। इस घोषणा के साथ ही वे देश के सबसे अमीर विधायक घोषित किए गए थे। चल संपत्ति में लगभग 1,140 करोड़ रुपये, जिसमें विभिन्न कंपनियों के शेयर्स, बैंक डिपॉजिट, बांड और आभूषण शामिल हैं। अचल संपत्ति में लगभग 273 करोड़ रुपये, जिसमें बेंगलुरु और देश के अन्य हिस्सों में कीमती कमर्शियल बिल्डिंग, रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स और कृषि भूमि शामिल हैं। उनके ऊपर लगभग 500 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज भी घोषित है।
सिद्दारमैया का पैर छूकर आशीर्वाद लेते हुए डीके शिवकुमार
किस मामले में जेल गए थे डीके शिवकुमार?
डीके शिवकुमार का राजनीतिक सफर जितना प्रभावशाली रहा है, उतना ही विवादों से भी घिरा रहा है। उनका सबसे बड़ा विवाद साल 2017 में सामने आया जब गुजरात कांग्रेस के विधायकों को बेंगलुरु के रिसॉर्ट में संभालने के दौरान आयकर विभाग ने उनके 67 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की थी। इस कार्रवाई में जांच एजेंसियों ने उनके दिल्ली और अन्य ठिकानों से करोड़ों रुपये की नकदी जब्त करते हुए करीब 300 करोड़ रुपये की अघोषित आय का दावा किया था। इसी जांच के आधार पर साल 2019 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया, जिसके कारण उन्हें दिल्ली की तिहाड़ जेल में भी वक्त बिताना पड़ा। कानूनी पचड़ों के अलावा वे कनकपुरा और रामनगर जिलों में अपने परिवार के साथ अवैध ग्रेनाइट खनन गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों को लेकर भी विवादों में घिरे, जिस पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी किया था।
2023 का विधानसभा चुनाव और सीएम पद तक की यात्रा
साल 2023 का कर्नाटक विधानसभा चुनाव डीके शिवकुमार के राजनीतिक जीवन का एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने अपनी बेहतरीन संगठनात्मक क्षमता और आक्रामक रणनीति के दम पर पूरी पार्टी को एकजुट किया, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस ने 135 सीटें जीतकर राज्य में प्रचंड बहुमत हासिल किया। हालांकि, चुनाव परिणाम के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर उनके और वरिष्ठ नेता सिद्दारमैया के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिसके बाद केंद्रीय नेतृत्व के हस्तक्षेप और आपसी सहमति से सिद्दारमैया को मुख्यमंत्री और डीके शिवकुमार को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। उपमुख्यमंत्री बनने के बाद भी मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचने का उनका संकल्प कमजोर नहीं हुआ। पिछले तीन वर्षों के दौरान सरकार के भीतर उनकी मजबूत पकड़ और पार्टी के प्रति उनकी वफादारी के कारण मुख्यमंत्री पद पर बदलाव की अटकलें लगातार चलती रहीं। आखिरकार, मई 2026 में दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान के साथ हुई कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकों और ढाई-ढाई साल के कथित सत्ता-साझाकरण समझौते के पालन के बाद, सिद्दारमैया ने गरिमापूर्ण तरीके से अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इस ऐतिहासिक बदलाव के साथ ही डीके शिवकुमार का वर्षों पुराना सपना सच होने जा रहा है, क्योंकि वे अब कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की कमान संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
