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Bengal Election Results: बीजेपी की रणनीति के सामने ओवैसी का क्यों नहीं चला 'M' फैक्टर, कई सीटों पर जमानत जब्त

Bengal Election Results: पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 में भाजपा बड़ी बढ़त के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है, जबकि TMC को भारी नुकसान हुआ है। AIMIM को एक भी सीट नहीं मिली। यहां जानें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के हार के क्या रहे कारण?

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मुस्लिम वोट TMC के साथ, AIMIM को नहीं मिला समर्थन (AI Generated)
Authored by: monu jha
Updated May 4, 2026, 21:42 IST
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Bengal Election Results: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे धीरे-धीरे सामने आ रहे हैं, लेकिन शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीति की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। लंबे समय से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) को इस बार बड़ा झटका लगता दिख रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) मजबूत बढ़त के साथ सरकार बनाने की ओर बढ़ रही है। 293 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत का आंकड़ा 148 है और रुझानों के अनुसार भाजपा इस आंकड़े को पार करती नजर आ रही है।

ताजा आंकड़ों के मुताबिक भाजपा 200 से अधिक सीटों पर बढ़त या जीत दर्ज करती दिख रही है। वहीं TMC करीब 70 से 80 सीटों के बीच सिमटती नजर आ रही है। कांग्रेस और अन्य दलों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा है। कांग्रेस को केवल 2 सीटों पर ही सफलता मिलती दिख रही है, जबकि वाम दल भी 1-2 सीटों तक सिमट गए हैं। इससे साफ है कि इस बार चुनाव मुख्य रूप से भाजपा और TMC के बीच ही रहा।

AIMIM को नहीं मिली एक भी सीट

इस चुनाव में एक और खास बात यह रही कि असदुद्दीन ओवैसी (Bengal AIMIM Performance) की पार्टी AIMIM को एक भी सीट नहीं मिल पाई। पार्टी ने लगभग 12 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, खासकर उन इलाकों में जहां मुस्लिम मतदाता ज्यादा हैं, जैसे मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर। लेकिन इन सभी जगहों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा और कई सीटों पर उम्मीदवारों की जमानत तक जब्त हो गई।

मुस्लिम वोटों का एकजुट होकर TMC के पक्ष में जाना

AIMIM (Asaduddin Owaisi)की इस नाकामी के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण मुस्लिम वोटों का एकजुट होकर TMC के पक्ष में जाना है। पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी करीब 27 से 30 प्रतिशत है और ये मतदाता अक्सर भाजपा को रोकने के लिए TMC को प्राथमिकता देते हैं।

स्थानीय संगठन और नेतृत्व की कमी

AIMIM को कई लोग 'वोट काटने वाली पार्टी' मानते हैं, जिससे उसे समर्थन नहीं मिल पाया। इसके अलावा, AIMIM के पास राज्य में मजबूत स्थानीय नेतृत्व और संगठन की कमी भी रही।

चुनाव से पहले गठबंधन टूटना

पार्टी स्थानीय मुद्दों जैसे रोजगार, विकास और बुनियादी सुविधाओं पर उतना प्रभाव नहीं डाल पाई, जितना TMC ने किया। चुनाव से पहले गठबंधन टूटना भी AIMIM के लिए नुकसानदायक साबित हुआ, जिससे उसकी ताकत और कम हो गई। पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला लगभग दो पार्टियों के बीच ही सीमित हो गया था।

भाजपा और TMC के बीच सीधी टक्कर

भाजपा और TMC के बीच सीधी टक्कर के कारण तीसरे विकल्प के लिए जगह बहुत कम रह गई। यही वजह है कि छोटी पार्टियां और नए दल चुनाव में खास असर नहीं दिखा पाए।

यह चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत

कुल मिलाकर अगर कहा जाए तो 2026 का यह चुनाव पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है। जहां एक ओर भाजपा अपनी स्थिति मजबूत करती दिख रही है, वहीं TMC को अपने प्रदर्शन पर गंभीरता से विचार करना होगा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार राज्य के विकास और लोगों की उम्मीदों पर कितना खरा उतर पाती है।

नोट: ये आंकड़े चुनाव आयोग (ECI) के लाइव ट्रेंड्स पर आधारित हैं। अंतिम नतीजों में थोड़ा बदलाव संभव है।

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