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Bengal Election: क्या 5 ‘M’ फैक्टर करेंगे खेला? BJP और TMC में किसका दांव कितना मजबूत?

Bengal Election: यूं तो देश के हर चुनाव में कोई न कोई फैक्टर काम करता है, लेकिन बंगाल में इस बार कई ऐसे फैक्टर्स सक्रिय हैं, जो वाकई खास हैं। दरअसल, बंगाल में ‘5 M’ की काफी चर्चा हो रही है। ये पांच ‘M’ हैं, महिला, माइनॉरिटी, मशीनरी, मसल और मनी, और ममता बनाम मोदी। आइए, एक-एक कर इन्हें विस्तार से समझते हैं।

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बंगाल चुनाव में 5 एम फैक्टर की हो रही चर्चा। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Apr 29, 2026, 12:17 IST
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Bengal Election: “कहते हैं कि बंगाल जो आज सोचता है, देश वो कल सोचता है… लेकिन फिलहाल बंगाल की जनता क्या सोच रही है, यह बड़े-बड़े दिग्गज भी नहीं भांप पा रहे हैं। बंगाल के पहले फेज में बंपर वोटिंग हुई। राज्य में पहली बार किसी फेज में 92.88 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया। दूसरे फेज में भी जबरदस्त वोटिंग की उम्मीद नजर आ रही है। इस बार बंगाल की जनता ने जैसा विधानसभा चुनाव प्रचार देखा है, वैसा शायद ही पहले कभी देखने को मिला हो।

झालमुड़ी से लेकर मछली तक, इस बार कई मुद्दों पर जमकर सियासत हुई है। हालांकि, ये सारे मुद्दे किसके पक्ष में जाएंगे, यह तो 4 मई को ही साफ होगा, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि बीजेपी और टीएमसी ने इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।

यूं तो देश के हर चुनाव में कोई न कोई फैक्टर काम करता है, लेकिन बंगाल में इस बार कई ऐसे फैक्टर्स सक्रिय हैं, जो वाकई खास हैं। दरअसल, बंगाल में ‘5 M’ की काफी चर्चा हो रही है। ये पांच ‘M’ हैं, महिला, माइनॉरिटी, मशीनरी, मसल और मनी, और ममता बनाम मोदी। आइए, एक-एक कर इन्हें विस्तार से समझते हैं।

राजनीतिक पार्टियों के झंडे की फोटो।

राजनीतिक पार्टियों के झंडे की फोटो।

महिला वोटर

बंगाल में महिला मतदाता चुनावी गणित का सबसे अहम हिस्सा मानी जाती हैं, क्योंकि वे कुल वोटर्स का बड़ा हिस्सा हैं। पिछले चुनावों में महिलाओं का झुकाव सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की योजनाओं और कल्याणकारी नीतियों की वजह से टीएमसी की ओर रहा है। हालांकि, इस बार भाजपा भी महिला वोट बैंक को साधने के लिए आक्रामक रणनीति और नए वादों के साथ मैदान में है। ऐसे में साफ है कि महिला वोटर जिस तरफ झुकेंगी, वही सत्ता के करीब पहुंचेगा।

बंगाल चुनाव में वोटिंग के लिए लाइन में खड़ीं महिलाएं।

बंगाल चुनाव में वोटिंग के लिए लाइन में खड़ीं महिलाएं।

बीजेपी ने भी महिलाओं को लुभाने के लिए कई बड़े वादे किए हैं। इनमें महिलाओं को 3000 रुपये मासिक आर्थिक सहायता देने, गर्भवती महिलाओं को 21,000 रुपये की मदद प्रदान करने और सरकारी नौकरियों में 33% आरक्षण लागू करने जैसी घोषणाएं शामिल हैं। इसके अलावा हर इलाके में महिला थाना और महिला डेस्क स्थापित करने के साथ-साथ महिला सुरक्षा के लिए विशेष स्क्वॉड और सख्त कानून लागू करने की बात भी कही गई है।

सिर्फ वादों तक ही नहीं, भाजपा “महिला सुरक्षा” के मुद्दे को भी चुनावी एजेंडे में प्रमुखता से उठा रही है। संदेशखाली समेत अन्य घटनाओं का हवाला देकर पार्टी TMC सरकार को घेर रही है और यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि राज्य में महिलाओं की सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। कुल मिलाकर, भाजपा का ‘M फैक्टर’ महिला वोट, सुरक्षा और आर्थिक सहायता के वादों के इर्द-गिर्द केंद्रित है, जो इस चुनाव में अहम भूमिका निभा सकता है।

माइनॉरिटी (अल्पसंख्यक वोट)

बंगाल में अल्पसंख्यक वोट लंबे समय से टीएमसी का मजबूत आधार रहे हैं और आम तौर पर एकजुट होकर मतदान करते हैं। इस बार भी यह वोट बैंक काफी हद तक ममता बनर्जी के साथ माना जा रहा है, लेकिन वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन (SIR) जैसे मुद्दों ने कुछ हद तक असमंजस की स्थिति पैदा की है। यदि अल्पसंख्यक वोट एकजुट रहता है, तो यह टीएमसी के लिए निर्णायक बढ़त दिला सकता है।

मशीनरी (सत्ता की मशीनरी)

चुनाव में प्रशासनिक पकड़ और ग्राउंड मैनेजमेंट बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। बंगाल में पारंपरिक रूप से राज्य की मशीनरी पर टीएमसी की पकड़ मजबूत मानी जाती रही है, जिससे चुनावी प्रबंधन में उसे बढ़त मिलती है। हालांकि, चुनाव से पहले अधिकारियों के बड़े पैमाने पर तबादलों और चुनाव आयोग की सख्ती ने इस समीकरण को थोड़ा बदल दिया है। ऐसे में इस बार यह देखना दिलचस्प होगा कि किस पार्टी की जमीनी पकड़ ज्यादा असर दिखाती है।

टीएमसी समर्थकों की फोटो।

टीएमसी समर्थकों की फोटो।

मसल और मनी

हर चुनाव में पैसा और बाहुबल अहम भूमिका निभाते हैं, और बंगाल भी इससे अलग नहीं है। माना जा रहा है कि इस बार इस मोर्चे पर भाजपा काफी आक्रामक है और संसाधनों के इस्तेमाल में बढ़त लेने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बंगाल का मतदाता “साइलेंट वोटर” माना जाता है, जो आखिरी समय में चौंकाने वाले फैसले ले सकता है। इसलिए यह फैक्टर परिणामों को अचानक पलटने की क्षमता रखता है।

ममता बनाम मोदी (चेहरों की लड़ाई)

इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी दो चेहरों की टक्कर है। एक तरफ सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का मजबूत लोकल कनेक्ट और जमीनी पकड़, तो दूसरी ओर Narendra Modi का राष्ट्रीय करिश्मा और भाजपा का चेहरा। यह मुकाबला सिर्फ नीतियों का नहीं, बल्कि भरोसे और नेतृत्व की छवि का भी है। आखिरकार यह चुनाव तय करेगा कि बंगाल में लोकल नेतृत्व भारी पड़ता है या राष्ट्रीय प्रभाव।

सीएम ममता बनर्जी की फाइल फोटो।

सीएम ममता बनर्जी की फाइल फोटो।

ममता बनर्जी का ‘M फैक्टर’

पश्चिम बंगाल के इस चुनाव में सीएम ममता बनर्जी का पारंपरिक ‘M फैक्टर’—मां, मानुष और माटी—अब और विस्तार ले चुका है। इस बार इसमें ‘माछ’ (मछली) भी शामिल कर दिया गया है।

ममता बनर्जी लगातार यह संदेश दे रही हैं कि यदि भाजपा सत्ता में आती है तो बंगाल की पारंपरिक थाली, यानी मछली-भात की संस्कृति पर असर पड़ सकता है। दूसरी ओर भाजपा भी अपने वादों और योजनाओं के जरिए इस ‘M फैक्टर’ को साधने की कोशिश में जुटी है।

संकल्प पत्र में महिलाओं पर खास जोर

वहीं, बीजेपी (BJP) ने अपने संकल्प पत्र में महिलाओं को केंद्र में रखा है। पार्टी ने गर्भवती महिलाओं को 21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने, आशा वर्करों का मानदेय बढ़ाने और बुजुर्ग महिलाओं को 3 हजार रुपये मासिक सहायता देने का वादा किया है।

बीजेपी कार्यकर्ताओं की फाइल फोटो।

बीजेपी कार्यकर्ताओं की फाइल फोटो।

इसके अलावा महिला सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नई पुलिस बटालियन बनाने, पुलिस भर्ती में 33 फीसदी महिला आरक्षण लागू करने और महिला थाने स्थापित करने की बात कही गई है। भाजपा के ये वादे चुनावी मुकाबले में ममता बनर्जी के लिए नई चुनौती खड़ी कर सकते हैं।

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