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बंगाल में वोट का पहाड़, BJP या TMC किसकी नैया लगेगी पार? समझिए बंपर वोटिंग के पीछे का X-फैक्टर

Bengal Election 2026: पश्चिम बंगाल के पहले चरण में 23 अप्रैल को रिकॉर्ड 92.7% मतदान ने नया इतिहास रच दिया। 152 सीटों पर हुए इस मतदान में 12 जिलों में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज हुई, जिसमें दक्षिण दिनाजपुर, कूचबिहार, बीरभूम और मुर्शिदाबाद जैसे जिले सबसे आगे रहे। भारी मतदान को लेकर राजनीतिक दलों के अलग-अलग दावे हैं। बीजेपी इसे बदलाव की लहर बता रही है, जबकि टीएमसी इसे जनता की एकजुटता मान रही है। आइए समझते हैं कि इस बंपर वोटिंग के पीछे क्या-क्या वजहें हो सकती है।

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बंगाल चुनाव के पहले चरण में 92.7 प्रतिशत वोटिंग हुई। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Apr 24, 2026, 14:47 IST
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कहते हैं कि "भारत जो कल सोचेगा, बंगाल उसे आज ही सोच लेता है।" 23 अप्रैल को बंगाल के मतदाताओं ने इस कहावत को एक बार फिर चरितार्थ करते हुए लोकतांत्रिक इतिहास रच दिया। पहले चरण की 152 सीटों पर जब मतदान संपन्न हुआ, तो आंकड़ा देखकर हर कोई दंग रह गया। 92.7 प्रतिशत वोटिंग। यह न केवल अप्रत्याशित है, बल्कि राज्य के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वोटिंग प्रतिशत भी है। पोलिंग बूथों पर उमड़ा यह जनसैलाब बता रहा है कि बंगाल की जनता इस बार किसी बड़े फैसले के मूड में है।

इस रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग ने देशभर का ध्यान अपनी ओर खींचा है। आमतौर पर राजनीतिक गलियारों में भारी मतदान को 'एंटी-इनकंबेंसी' (सत्ता विरोधी लहर) से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन बंगाल का राजनीतिक गणित हमेशा से अलग रहा है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव के पहले चरण में जहां 83.2 प्रतिशत वोटिंग हुई थी, वहीं इस बार का उछाल चौंकाने वाला है। आइए समझते हैं कि इस बंपर वोटिंग के क्या-क्या वजहें हो सकती हैं।

वोटिंग के लिए पोलिंग बूथ पर कतार में खड़ीं महिलाएं। ANI

वोटिंग के लिए पोलिंग बूथ पर कतार में खड़ीं महिलाएं। ANI

सीटें और समीकरण की कहानी

राज्य के 12 जिलों में मतदान का स्तर 90 प्रतिशत के पार रहा। इसमें दक्षिण दिनाजपुर सबसे आगे रहा, जहां 94.4 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। यहां की 6 विधानसभा सीटों (Bengal Election) पर हिंदू मतदाता (73.5%) निर्णायक भूमिका में हैं, जिससे स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं कि हिंदू बाहुल्य क्षेत्रों में जबरदस्त उत्साह रहा।

वहीं, कूचबिहार में 94%, बीरभूम में 93.2% और मुर्शिदाबाद में 92.7% मतदान हुआ। मुर्शिदाबाद, जो 'ममता दीदी' का मजबूत गढ़ माना जाता है, वहां मुस्लिम आबादी 65% से अधिक है। यहां का हाई वोल्टेज ड्रामा चुनाव परिणामों को दिलचस्प बनाने वाला है।

बंगाल की महिलाओं ने मताधिकार का किया इस्तेमाल। ECI

बंगाल की महिलाओं ने मताधिकार का किया इस्तेमाल। ECI

SIR ने बदल दिया गेम?

इस बार चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण अभियान यानी एसआईआर (Special Intensive Revision) ने भी बड़ा खेल दिखाया है। इस अभियान के तहत करीब 11.63 प्रतिशत फर्जी या संदिग्ध मतदाताओं के नाम काटे गए थे। दिलचस्प बात यह है कि जिन सीटों पर सबसे ज्यादा नाम हटाए गए, वहीं सबसे बंपर वोटिंग हुई। मुर्शिदाबाद की समसेरगंज सीट पर रिकॉर्ड 96.03% वोटिंग हुई। इसी तरह लालगोला, भगवानगोला और रघुनाथगंज जैसी सीटों पर भी मतदान 96% के पार दर्ज किया गया।

लक्ष्मी भंडार योजना बनाम 300 रुपये प्रति महीने का वादा

बढ़े हुए मतदान को जहां भाजपा सत्ता विरोधी लहर के रूप में देख रही है, वहीं तृणमूल कांग्रेस को अपने मजबूत लाभार्थी वर्ग पर भरोसा है, जो चुनावी समीकरण बदल सकता है। ममता सरकार ने लक्ष्मी भंडार योजना के तहत राशि बढ़ाकर सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए 1500 रुपये और एससी-एसटी वर्ग के लिए 1700 रुपये कर दी है। इस योजना से राज्य की करीब 2.2 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं।

ग्राउंड रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई महिलाएं इसे सिर्फ सरकारी सहायता नहीं, बल्कि अपनी आर्थिक स्वतंत्रता के रूप में देख रही हैं। दूसरी ओर, भाजपा इस प्रभाव को कम करने के लिए 3000 रुपये देने के वादे के साथ मुकाबले में उतरी है। दोनों दलों ने इस बार महिलाओं को लुभाने की जबरदस्त कोशिश की है। इसी के परिणामस्वरूप महिलाओं ने चुनाव में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

बंगाल में बड़ी तादाद में महिलाओं ने की वोटिंग। ECI

बंगाल में बड़ी तादाद में महिलाओं ने की वोटिंग। ECI

बीजेपी-टीएमसी ने क्या-क्या कहा?

इस बंपर वोटिंग पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के अपने-अपने दावे हैं। टीएमसी का मानना है कि जनता भाजपा की साजिशों के खिलाफ एकजुट हुई है, जबकि BJP इसे बदलाव की लहर बता रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तो यहां तक दावा कर दिया है कि पहले चरण की 152 सीटों में से भाजपा 100 से ज्यादा सीटें जीत रही है।

बंगाल में वोटिंग के लिए कतार में खड़े मतदाता। ECI

बंगाल में वोटिंग के लिए कतार में खड़े मतदाता। ECI

चुनाव आयोग की मुस्तैदी ने किया कमाल!

इस भारी मतदान का श्रेय चुनाव आयोग की सख्ती को भी जाता है। 100% वेबकास्टिंग, AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित निगरानी और केंद्रीय बलों की 2,450 कंपनियों की तैनाती ने मतदाताओं के मन में सुरक्षा का भाव जगाया। करीब 8,000 अति संवेदनशील स्टेशनों के बावजूद जनता का इतनी बड़ी संख्या में बाहर निकलना लोकतंत्र की जीत है।

बंगाल के बांकुरा में चुनाव आयोग द्वारा तैयार किए गए कंट्रोल रूम की फोटो। ECI

बंगाल के बांकुरा में चुनाव आयोग द्वारा तैयार किए गए कंट्रोल रूम की फोटो। ECI

2011 के ऐतिहासिक चुनाव (85.55%) और 2024 के लोकसभा चुनाव (79.8%) का रिकॉर्ड ध्वस्त हो चुका है। लगभग 1.75 करोड़ महिला मतदाताओं की भागीदारी ने इस चुनाव को और भी खास बना दिया है। फिलहाल, 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण की 142 सीटों पर नजरें टिकी हैं। ऊंट किस करवट बैठेगा, यह कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन बंगाल की जनता ने इस मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है।

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