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BJP Vs TMC Slogan: बंगाल की 'सियासी झालमुड़ी' को मसालेदार बना रहे ये चुनावी नारे, खेला होबे नहीं; इस बार ट्रेंड में कुछ और...

Bengal Election 2026: बंगाल चुनाव में इस बार भी चुनावी नारे ने देश का ध्यान अपनी ओर खींच रखा है। सीएम ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की टीएमसी ‘जय बांग्ला’ और ‘बांग्ला निजेर मेये के ही चाय’ जैसे नारों के जरिए बंगाली अस्मिता को साधने की कोशिश कर रही है, वहीं बीजेपी ‘जय श्री राम’, ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ व ‘सोनार बांग्ला’ जैसे नारों के साथ आक्रामक प्रचार में जुटी है। नंदीग्राम से झारग्राम तक चुनावी माहौल चरम पर है, जहां ये नारे सिर्फ शब्द नहीं बल्कि विचारधारा और वोटरों की भावनाओं को प्रभावित करने वाले ‘पॉलिटिकल वेपन’ बन चुके हैं।

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बंगाल चुनाव को लेकर बीजेपी और टीएमसी ने दिए कई नारे। AI IMAGE
Authored by: Piyush Kumar
Updated Apr 21, 2026, 12:53 IST

जय बांग्ला, जय श्री राम, बदलेर सोंगे बदला... इन दिनों पश्चिम बंगाल के हर गली-मोहल्ले में सियासी नारों की गूंज सुनाई दे रही है। घरों की बाउंड्री वॉल पर कहीं ‘जोड़ा फूल’ यानी टीएमसी का चुनाव चिन्ह दिख रहा है, तो कहीं कमल फूल का निशान नजर आ रहा है।

पॉलिटिक्स और फुटबॉल की बारीकियों पर चाय के नुक्कड़ों पर बहस करने वाले बंगाल के लोग, बीजेपी और टीएमसी के इन चुनावी नारों को सुबह से शाम तक ध्यान से सुन रहे हैं। ‘मां, माटी, मानुष’ पर विश्वास करने वाली बंगाल की जनता क्या इस बार राज्य में बीजेपी की सरकार बनाकर इतिहास रचेगी, या एक बार फिर अपनी ‘दीदी’ पर ही भरोसा जताएगी?

इस सवाल का जवाब तो 4 मई को ही मिलेगा, लेकिन फिलहाल बंगाल की ‘सियासी झालमुड़ी’ बेहद मसालेदार हो चुकी है। ऐसे में राजनीतिक दलों ने नारों के जरिए चुनाव को बेहद खास बना दिया है।

झारग्राम में लोगों के साथ झालमुड़ी खाते पीएम मोदी। PM Modi X handle

झारग्राम में लोगों के साथ झालमुड़ी खाते पीएम मोदी। PM Modi X handle

नंदीग्राम से लेकर झारग्राम तक हर तरफ चुनावी माहौल अपने चरम पर है। यूं तो चुनावी नारे भारतीय राजनीति का अभिन्न हिस्सा हैं, लेकिन बंगाल में नारे केवल शब्द नहीं होते, बल्कि वे एक पूरी विचारधारा का संक्षिप्त रूप होते हैं।

यहां का मतदाता बौद्धिक रूप से सक्रिय माना जाता है, इसलिए राजनीतिक दल ऐसे नारे गढ़ते हैं जो सीधे जनता की ‘अस्मिता’ और ‘अधिकार’ से जुड़े हों। ये नारे अक्सर चुनावी रैलियों में ‘युद्ध घोष’ की तरह काम करते हैं और कार्यकर्ताओं में नया जोश भरते हैं।

टीएमसी के नारों पर एक नजर

अगर इस बार के चुनावी नारों की बात करें, तो टीएमसी ने पिछले साल ही अपना नारा दे दिया था, “जतोई कोरो हमला, आबार जीतबे बांग्ला” (जितने भी हमले कर लो, बंगाल फिर जीतेगा)। हालांकि, वक्त के साथ टीएमसी ने ‘जय बांग्ला’ को अपना सबसे बड़ा ब्रह्मास्त्र बना लिया है। टीएमसी नेताओं की भीड़ के साथ यही नारा हर तरफ गूंज रहा है।

टीएमसी द्वारा आयोजित जनसभा की फाइल फोटो।

टीएमसी द्वारा आयोजित जनसभा की फाइल फोटो।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) हर राजनीतिक मंच से ‘जय बांग्ला’ का हुंकार भर रही हैं। दरअसल, यह नारा बंगाली गौरव को दर्शाता है। इसके अलावा, तृणमूल कांग्रेस का नया स्लोगन “बांग्ला निजेर मेये के ही चाय” भी काफी लोकप्रिय हो रहा है।

टीएमसी का यह स्लोगन ‘बंगाल की बेटी’ वाले सेंटिमेंट से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से ‘बाहरी बनाम भीतरी’ की राजनीति करती आ रही टीएमसी ने इस नारे से चुनाव में एक बार फिर नई जान फूंक दी है।

टीएमसी समर्थकों की फाइल फोटो।

टीएमसी समर्थकों की फाइल फोटो।

पार्टी इस स्लोगन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि ममता बंगाल की बेटी हैं, जबकि बीजेपी बाहरी ताकत है। हालांकि, इस बार चुनावी रैलियों में ‘खेला होबे’ का नारा ज्यादा सुनाई नहीं दे रहा।

बीजेपी, टीएमसी और वामपंथी दल द्वारा दिए गए नारे। AI IMAGE

बीजेपी, टीएमसी और वामपंथी दल द्वारा दिए गए नारे। AI IMAGE

बीजेपी ने किन नारों पर किया भरोसा?

वहीं, बीजेपी के लिए ‘जय श्री राम’ सबसे बड़ा चुनावी नारा बना हुआ है। इसके अलावा, पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने एक जनसभा में ‘जय मां काली’ का उद्घोष कर यह संकेत दिया था कि पार्टी इस बार बंगाल की भावनाओं को साधने की पूरी कोशिश कर रही है।

“बदलेर सोंगे बदला” (बदलाव के साथ बदला) भी इस बार काफी चर्चा में है। जहां ममता बनर्जी ने सत्ता परिवर्तन के समय “बदला नहीं, बदलाव चाहिए” का नारा दिया था, वहीं बीजेपी अब ‘बदलाव के साथ उन ताकतों से बदला’ लेने की बात कर रही है, जिन्होंने कानून-व्यवस्था को बिगाड़ा है।

बंगाल में जनसभा को संबोधित करते पीएम मोदी की फाइल फोटो।

बंगाल में जनसभा को संबोधित करते पीएम मोदी की फाइल फोटो।

“डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट”, यह नारा घुसपैठ के मुद्दे पर बीजेपी की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दर्शाता है। अमित शाह (Amit Shah) ने रैलियों में साफ कहा है कि बीजेपी की सरकार बनने पर घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकाला जाएगा।

इन नारों के अलावा, बीजेपी ने “सोनार बांग्ला गढ़बो” यानी बंगाल को स्वर्णिम बनाने का भी दावा किया है। कुल मिलाकर, दोनों पार्टियां चुनावी नारों के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाने की पूरी कोशिश कर रही हैं। हालांकि, जनता सिर्फ नारे सुनकर वोट नहीं करती। बंगाल की जनता का भरोसा जीतना किसी भी पार्टी के लिए आसान नहीं है, क्योंकि कहा जाता है, भारत जो कल सोचता है, बंगाल उसे आज ही सोच लेता है।

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