ऑस्ट्रेलिया बॉन्डी बीच शूटआउट के बाद चर्चा में 'Gun Culture', क्या था दुनिया का सबसे बड़ा 'Gun Buyback Program, कितना हुआ असर?
ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हुए हमले ने ऑस्ट्रेलिया में 1996 में हुए गन बायबैक कार्यक्रम (Gun Buyback Program) की याद दिला दी जो दुनिया के लिए बंदूक नियंत्रण का एक मॉडल बन गया था, जानिए क्या थी यह मुहिम और कितना हुआ था असर....
- Authored by: रवि वैश्य
- Updated Dec 15, 2025, 02:45 PM IST
ऑस्ट्रेलिया इस वक्त सुर्खियों में हैं वजह है यहां पर दुनिया के सबसे मशहूर बीच में से एक बॉन्डी बीच पर यहूदी त्योहार हनुक्का के जश्न के दौरान हुए हमले में 16 लोग मारे गए हैं, यह हमला यहूदी समुदाय को निशाना बनाकर किया गया। फायरिंग करने वाले दोनों आरोपी पिता-पुत्र थे। इस हमले की पृष्ठभूमि में कट्टर सोच सामने आ रहा है वहीं यह भी सामने आया है कि दोनों हमलावरों के पास कम से कम छह हथियार थे, जो सभी लाइसेंस वाले थे। माना जा रहा है कि इन हथियारों में शॉटगन और एक बोल्ट-एक्शन राइफल शामिल थी। इसके बाद एक बार फिर गन कल्चर (Gun Culture) को लेकर चर्चा शुरू हो गई है जो कई देशों में एक बड़ी समस्या के रूप में चुनौती बना हुआ है।
ऑस्ट्रेलिया में दुनिया के सबसे मशहूर बीच में से एक बॉन्डी बीच पर यह हमला 1996 के पोर्ट आर्थर हत्याकांड के बाद ऑस्ट्रेलिया का सबसे खतरनाक मास शूटिंग है, जिसके कारण देश के गन कानूनों में बड़े बदलाव हुए, जिसमें सेमी-ऑटोमैटिक राइफलों पर बैन और सख्त लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन की जरूरतें शामिल हैं।
ऑस्ट्रेलिया में 1996 में हुआ पोर्ट आर्थर हत्याकांड ( Port Arthur Massacre)
पोर्ट आर्थर हत्याकांड ऑस्ट्रेलिया के इतिहास का सबसे भयावह सामूहिक गोलीकांड था, जिसने देश की गन नीति हमेशा के लिए बदल दी। वो साल था 1996 और तारीख थी 28 अप्रैल..जगह पोर्ट आर्थर, तस्मानिया (Tasmania) वहां एक बंदूकधारी ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की उस हमलावर के पास सेमी-ऑटोमैटिक राइफल थी। यह हमला भीड़-भाड़ वाले पर्यटन स्थल पर किया गया था जिसमें 35 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी वहीं करीब 23 लोग घायल हुए थे। सेमी-ऑटोमैटिक राइफल से कुछ ही मिनटों में अचानक हुए इस हमले की यादें वहां के लोगों के जेहन में आज भी एक जख्म के रूप में सालती हैं।यह ऑस्ट्रेलिया का अब तक का सबसे घातक मास शूटिंग हमला था। वहीं हमलावर को बाद में गिरफ्तार कर उसे आजीवन कारावास की सजा दी गई थी।
पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम
पोर्ट आर्थर में हुए नरसंहार के बाद, तत्कालीन ऑस्ट्रेलियन पीएम जॉन हॉवर्ड ने कड़े बंदूक नियंत्रण कानून लागू किए। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने एक्शन लेते हुए National Firearms Agreement यानी NFA लागू किया। ऑस्ट्रेलिया में गन बायबैक (बंदूक वापसी कार्यक्रम) 1996 के पोर्ट आर्थर नरसंहार के बाद शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम था। जिसमें सरकार ने नए प्रतिबंधित अर्ध-स्वचालित राइफलें और शॉटगन रखने वाले मालिकों को मुआवजा देकर बड़ी संख्या में बंदूकें वापस लीं और उन्हें नष्ट कर दिया, जिससे सामूहिक गोलीबारी की घटनाओं में कमी आई और यह दुनिया के लिए बंदूक नियंत्रण का एक मॉडल बन गया।
कैसे लागू हुआ गन बायबैक कार्यक्रम (Gun Buyback Program)
इस कार्यक्रम के तहत सेमी-ऑटोमैटिक राइफल और शॉटगन पर प्रतिबंध लगाया। अक्टूबर 1996 से सितंबर 1997 तक चले इस 12 महीने के कार्यक्रम के तहत, लगभग 650,000 बंदूकें वापस ली गईं, जिनमें से ज़्यादातर नई कानून-प्रबंधित बंदूके थीं। बंदूक मालिकों को उनकी अवैध घोषित बंदूकों के बदले सरकार से मुआवजा मिला और इन बंदूकों को बाद में नष्ट कर दिया गया।
Gun Buyback Program में क्या किया गया?
सेमी-ऑटोमैटिक हथियारों पर प्रतिबंध
सेमी-ऑटोमैटिक राइफल
सेमी-ऑटोमैटिक शॉटगन
मिलिट्री-स्टाइल हथियार
इसके लिए सरकार ने लोगों से हथियार खरीदकर नष्ट किए और उन नागरिकों को बाजार मूल्य के बराबर मुआवजा दिया गया
सख्त लाइसेंस नियम किए गए लागू
लाइसेंस के लिए-वास्तविक कारण जैसे-खेती, खेल या शिकार के साथ ही बैकग्राउंड चेक किया जाता है वहीं मानसिक स्वास्थ्य जांच की भी जांच होती है। सख्त लाइसेंसिंग और रजिस्ट्रेशन के साथ ही अनिवार्य वेटिंग पीरियड और सेल्फ डिफेंस को गन लाइसेंस का कारण नहीं माना गया। इस कार्यक्रम के लिए मेडिकेयर लेवी को बढ़ाया गया था, यह एक राष्ट्रीय पहल थी। जिसने सामूहिक हिंसा को रोकने के लिए बंदूक मालिकों को मुआवजा देकर उनकी आग्नेयास्त्रों को बाजार से हटाने के लिए प्रोत्साहित किया।
'गन बायबैक कार्यक्रम' के लागू होने के बाद यह दिखे असर
ऑस्ट्रेलिया में गन बायबैक कार्यक्रम के लागू होने के बाद कई सालों तक वहां कोई बड़ी मास शूटिंग नहीं हई। साथ ही इस कदम का फायदा यह हुआ कि गन से हत्या और आत्महत्या (Murder and Suicide) में भारी गिरावट दिखी। अवैध हथियारों पर नियंत्रण के साथ ही हथियार रखना सामाजिक रूप से भी अस्वीकार्य हुआ और ऑस्ट्रेलिया को दुनिया में गन कंट्रोल मॉडल माना जाने लगा। वहीं कई देशों ने ऑस्ट्रेलिया मॉडल का अध्ययन भी किया और उसकी खास बातों को अपनाया भी। ऑस्ट्रेलिया ने गन बायबैक कार्यक्रम (Gun Buyback Program) को सफलता से लागू कर यह तो साबित कर दिया कि सख्त कानून और राजनीतिक इच्छाशक्ति से गन हिंसा को कंट्रोल किया जा सकता है। हालांकि इसपर पूरी तरह से रोक लगना संभव नहीं हो पाया है।
