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तीखे तेवर, तल्ख अंदाज... राहुल संग दिखी जुगलबंदी, AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने कैसे बनाई अपनी पहचान?

नेहा की राजनीति की शुरुआत सीधे नारों से नहीं हुई थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर नाटकों में अभिनय किया, जिसने उनके विजन को व्यापक बनाया। इसके बाद वह सड़कों पर उतरकर आंदोलनों से जुड़ गईं।

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नेहा बोरा के बारे में सबकुछ जानिए
Authored by: अमित कुमार मंडल
Updated Oct 13, 2026, 11:26 IST
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राजधानी दिल्ली में हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान एक नाम चर्चा के केंद्र में रहा, नेहा बोरा (Neha Bora)। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) की पीएचडी स्कॉलर नेहा बोरा ने हाल ही में अपने तीखे तेवरों और तल्ख अंदाज और साहस से सबका ध्यान खींचा है। हाल ही में उन्होंने 23 दिनों तक चली लंबी भूख हड़ताल समाप्त की थी और उसके तुरंत बाद दिल्ली की सड़कों पर पुलिस के साथ हुई लुका-छिपी व दौड़-भाग करती नजर आई हैं। केंद्र सरकार के विरोध में उन्होंने न सिर्फ लंबी भूख-हड़ताल की बल्कि, राहुल गांधी के साथ विरोध प्रदर्शनों में भी अहम भूमिका निभाई। कौन हैं नेहा बोरा और क्यों इन दिनों बेहद चर्चा में हैं, विस्तार से समझते हैं।

कनॉट प्लेस में पुलिस को छकाया

रविवार को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान आरके आश्रम मार्ग मेट्रो स्टेशन के पास भारी संख्या में पुलिस बल और प्रदर्शनकारियों का जमावड़ा लगा था। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर की ओर बढ़ने का लक्ष्य था। स्थिति अचानक तब बदली जब नेहा बोरा ने पुलिस बैरिकेड्स को पार करते हुए कनॉट प्लेस की तरफ दौड़ लगा दी। उनके पीछे-पीछे समर्थकों का हुजूम भी बैरिकेड्स लांघते हुए दौड़ पड़ा।

गिरफ्तारी और हिरासत

दोपहर करीब 2:51 बजे सोशल मीडिया पर घोषणा की गई कि वे कनॉट प्लेट तक पहुंच चुके हैं, लेकिन कुछ ही मिनटों बाद (करीब 3 बजे) पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया और प्रदर्शनकारियों को बसों में भरकर ले जाया गया। हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने एक्स पर एक वीडियो जारी कर पुलिस बस की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि बस के छोटे-छोटे सेल में महिलाओं को ठूंस-ठूंस कर भरा गया था और पुरुष प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

कौन हैं नेहा बोरा?

29 वर्षीय नेहा बोरा का सफर और उनकी पृष्ठभूमि काफी दिलचस्प रही है। नेहा मूल रूप से उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। उनके पिता भारतीय सेना में सेवारत हैं, जिसके कारण उनका परिवार अलग-अलग शहरों में रहा। हालांकि, दिल्ली में लगभग 12 साल रहने के बावजूद उनके जीवन और संघर्ष पर पहाड़ों की सादगी और मजबूती का गहरा प्रभाव है। सेना की पृष्ठभूमि वाले परिवार से आने के कारण उनके घरवाले और खासकर उनके पिता उनकी राजनीतिक विचारधारा और सक्रियता से पूरी तरह इत्तेफाक नहीं रखते और उनकी सक्रियता को लेकर चिंतित रहते हैं। इसके बावजूद नेहा ने अपने फैसलों और वैचारिक दृढ़ता से पीछे हटना उचित नहीं समझा। वह वामपंथी विचारधारा से जुड़ी हुई है।

थिएटर से राजनीति तक का सफर

नेहा की राजनीति की शुरुआत सीधे नारों से नहीं हुई थी। दिल्ली यूनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान उन्होंने सामाजिक मुद्दों पर नाटकों में अभिनय किया, जिसने उनके विजन को व्यापक बनाया। इसके बाद वह सड़कों पर उतरकर आंदोलनों से जुड़ गईं। 2019 के सीएए (CAA) विरोधी प्रदर्शनों ने उनके राजनीतिक जीवन में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित किया।

JNU की रिसर्च स्कॉलर और 23 दिन का उपवास

नेहा जेएनयू में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में पीएचडी कर रही हैं। हाल ही में उन्होंने पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के साथ जंतर-मंतर पर 23 दिनों तक लगातार भूख हड़ताल की थी, जिसके बाद उनका शरीर काफी कमजोर हो गया था, लेकिन उनके हौसले में कोई कमी नहीं आई है। इसके बाद वह राहुल गांधी के साथ प्रेस कांफ्रेंस में भी नजर आई, जिसके बाद सबका ध्यान अचानक उनकी ओर गया। अब वह सरकार विरोधी हर प्रदर्शन में बढ़-चढ़कर नजर आती हैं। वह युवा-नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शनों और आंदोलनों का एक बेहद प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं। उनके तीखे भाषणों और सोशल मीडिया पर आक्रामक तेवरों के कारण वामपंथी छात्र आंदोलनों के बीच उनकी मजबूत पकड़ और लोकप्रियता है।

राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व के साथ नजर आना

हाल ही में दिल्ली में 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के प्रदर्शन के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के साथ मुख्य रूप से जुड़ी नजर आईं। सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की ओर निकाले गए मार्च के दौरान वह प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ पैदल चलती दिखाई दीं, जबकि राहुल गांधी भीड़ और कैमरों के बीच दोनों महिलाओं के ठीक पीछे सुरक्षा कवच की तरह साथ चल रहे थे। इसके अलावा, वह खुले टेम्पो/बस में भी राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ सवार नजर आईं, जहां से वह लगातार मीडिया को प्रतिक्रियाएं दे रही थीं और कार्यकर्ताओं के बीच काफी सक्रिय दिख रही थीं।

छात्र राजनीति और पिछली मुलाकातें

राहुल गांधी और नेहा बोरा का यह जुड़ाव सिर्फ इस मार्च तक सीमित नहीं है। इससे पहले जुलाई महीने में संसद मार्च के दौरान हुए प्रदर्शनों और कथित पुलिस कार्रवाई के बाद, 25 जुलाई को राहुल गांधी द्वारा बुलाई गई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी नेहा बोरा युवा कार्यकर्ताओं के रूप में उनके साथ मंच पर मौजूद थीं।

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