2010 के मामले में शेखर सुमन-Bharti Singh को बॉम्बे हाईकोर्ट से मिली राहत, रद्द हुई FIR

  • Authored by: अभय
  • Updated May 1, 2026, 05:06 PM IST

Shekhar Suman-Bharti Singh Old Case: शेखर सुमन (Shekhar Suman) और भारती सिंह (Bharti Singh) को एक पुराने मामले में राहत मिली है। कोर्ट में इस FIR को रद्द कर दिया है। तो चलिए जानते हैं...

Shekhar Suman-Bharti Singh Old Case: बॉलीवुड और टीवी के जाने-माने स्टार शेखर सुमन (Shekhar Suman) और भारती सिंह (Bharti Singh) इन दिनों अपनी फिल्मों-शोज के साथ-साथ पर्सनल लाइफ को लेकर भी चर्चा में बने हुए हैं। शेखर सुमन और भारती सिंह से जुड़ी एक के बाद एक खबरें सामने आ रही हैं। इन सब के बीच भारती सिंह और शेखर सुमन से जुड़ा एक पुराना केस सामने आया है। मुंबई हाईकोर्ट ने 16 साल पुराने एक केस में शेखर सुमन और भारती सिंह को बड़ी राहत दी है। इस खबर के सामने आने के बाद शेखर सुमन और भारती सिंह के फैंस खुशी से झूम उठे हैं। (ये भी पढ़ें: अपने बच्चों की अर्थी को कंधा देते समय कांप उठे थे इन स्टार्स के हाथ, पसीजा था हर एक का दिल)

Shekhar Suman-Bharti Singh Old Case

शेखर सुमन और भारती सिंह को पुराने केस में मिली राहत (Image Source: Pinterest)

रद्द हुई FIR

भारती सिंह और शेखर सुमन एक बार फिर से चर्चा में आ गए हैं। इसकी वजह शेखर सुमन और भारती सिंह से जुड़ा एक पुराना मामला है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पुराने केस में शेखर सुमन और भारती सिंह को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने साल 2010 में दर्ज हुई FIR को पूरी तरह रद्द कर दिया है। जस्टिस अमित बोरकर ने शेखर सुमन और भारती सिंह द्वारा दायर अलग-अलग याचिकाओं को मंजूरी देते हुए FIR और उससे जुड़े सभी मामलों को रद्द कर दिया। फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि यह टीवी कार्यक्रम हल्के-फुल्के मनोरंजन के लिए बनाया गया था और इसे उसी नजरिए से देखा जाना चाहिए। (ये भी पढ़ें: Bharti Singh को 3 साल के बेटे ने दी घर छोड़कर जाने की धमकी, रो पड़ीं कॉमेडियन; बोलीं- कलेजा मुंह को आ गया...)

नहीं मिला सबूत

कोर्ट ने साफ कहा कि किसी कॉमेडी शो को उस तरह नहीं देखा या आंका जा सकता, जैसे किसी गंभीर भाषण, धार्मिक प्रवचन या राजनीतिक बयान को आंका जाता है। जस्टिस ने कहा कि पूरे शो को एक साथ देखना चाहिए। किसी एक-दो शब्दों या छोटे से हिस्से को अलग करके उसका मतलब नहीं निकाला जा सकता। अदालत ने आगे बताया कि धारा 295-A लगाने के लिए दो बातें बहुत जरूरी हैं - पहली, जानबूझकर किसी धर्म का अपमान करने की मंशा होनी चाहिए और दूसरी, वो मंशा बुरी नियत वाली होनी चाहिए। अगर इनमें से एक भी चीज नहीं है, तो अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने पूरे केस को ध्यान से देखा और कहा कि न तो शेखर सुमन और न ही भारती सिंह में किसी भी धर्म को जानबूझकर ठेस पहुंचाने का इरादा नजर आता है। बेंच ने ये भी कहा कि अगर किसी को मजाक बुरा लग गया, तो सिर्फ इसी वजह से आपराधिक केस नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने दोनों की भूमिका पर भी गौर किया। शेखर सुमन उस शो में जज की भूमिका निभा रहे थे, जबकि भारती सिंह एक लिखे हुए कॉमेडी एक्ट को परफॉर्म कर रही थीं। कोर्ट को दोनों के बीच कोई साझा प्लानिंग या बुरी मंशा का कोई सबूत नहीं मिला। इसके अलावा, हाई कोर्ट ने ये भी नोट किया कि पुलिस और अभियोजन पक्ष ने धारा 295-A लगाने के लिए जरूरी सरकारी अनुमति (सेक्शन 196 CrPC के तहत) भी नहीं ली थी, जो इस तरह के केस में अनिवार्य होती है।

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