Times Now Navbharat
live-tv
Premium

'प्यासा' छोड़ने का जिंदगी भर रहा अफसोस! दिलीप कुमार की एक 'ना' ने बदल दी Guru Dutt की किस्मत

Dilip Kumar- Guru Dutt Pyaasa Movie: गुरु दत्त की 'प्यासा' हिंदी सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिनी जाती है। लेकिन कम लोग जानते हैं कि इस फिल्म के लिए उनकी पहली पसंद दिलीप कुमार थे, खुद गुरु दत्त नहीं।

Image
फिल्म प्यासा में दिलीप कुमार को कास्ट करना चाहते थे गुरु दत्त (Image Source: Chat GPT/ IMDb)
Authored by: Abhay
Updated Jul 9, 2026, 11:39 IST
Follow on Google News

Dilip Kumar- Guru Dutt Pyaasa Movie: हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी हैं, जो सिर्फ पर्दे पर नहीं चलतीं, बल्कि पीढ़ियों के दिलों में बस जाती हैं। 'प्यासा' ऐसी ही एक फिल्म है। ये सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि गुरु दत्त के जज्बात, उनकी सोच और उस दर्द का आईना थी, जिसे शायद उनकी जिंदगी में बहुत कम लोग समझ पाए। यही वजह है कि करीब 70 साल बाद भी 'प्यासा' का नाम लेते ही गुरु दत्त की याद अपने आप ताजा हो जाती है। लेकिन इस फिल्म से जुड़ा एक ऐसा किस्सा भी है, जिसके बारे में कम ही लोग जानते हैं। जिस विजय के किरदार ने गुरु दत्त को हमेशा-हमेशा के लिए अमर कर दिया, उस रोल में उनकी पहली पसंद वो खुद नहीं थे। गुरु दत्त चाहते थे कि इस किरदार को ट्रेजेडी किंग दिलीप कुमार निभाएं। कहानी भी सुनाई गई, शर्तें भी मान ली गईं, लेकिन ऐन वक्त पर ऐसा कुछ हुआ कि दिलीप कुमार इस फिल्म का हिस्सा नहीं बन सके। इसके बाद गुरु दत्त खुद कैमरे के सामने आए और एक ऐसा इतिहास रच दिया।

Dilip Kumar Pyaasa Movie

Dilip Kumar Pyaasa Movie

नहीं बनना चाहते थे 'विजय'

असल में गुरु दत्त इस फिल्म में विजय का किरदार खुद नहीं निभाना चाहते थे। उनके दिमाग में सिर्फ एक ही नाम था दिलीप कुमार। उस दौर में दिलीप कुमार अपनी सीरियस एक्टिंग के लिए फेमस थे और गुरु दत्त को भरोसा था कि विजय के दर्द को उनसे बेहतर शायद ही कोई पर्दे पर उतार पाए। उन्होंने दिलीप कुमार को कहानी सुनाई और एक्टर को स्क्रिप्ट भी पसंद आई। बात फीस तक पहुंच गई और बताया जाता है कि गुरु दत्त उनकी मांगी हुई रकम देने के लिए भी तैयार थे। खबरों के मुताबिक दिलीप कुमार ने 1.5 लाख रुपये फीस मांगी थी, जिसे गुरु दत्त कम करवाना चाहते थे।

Dilip Kumar Pyaasa Movie

Dilip Kumar Pyaasa Movie

शूट पर नहीं पहुंचे दिलीप कुमार

गुरु दत्त और दिलीप कुमार इस फिल्म को करने के लिए सारी तैयारियां पूरी कर चुके थे। लेकिन तभी कहानी में ऐसा मोड़ आया, जिसने हिंदी सिनेमा का इतिहास बदल दिया। जिस दिन शूटिंग शुरू होनी थी, उस दिन दिलीप कुमार सेट पर नहीं पहुंचे। यूनिट घंटों तक उनका इंतजार करती रही। आखिरकार गुरु दत्त ने बड़ा फैसला लिया। उन्होंने खुद मेकअप किया और विजय का किरदार निभाने के लिए कैमरे के सामने आ गए। यही फैसला आगे चलकर हिंदी सिनेमा के इतिहास में दर्ज हो गया। फिल्म प्यासा सुपरहिट साबित हुई।

Dilip Kumar Pyaasa Movie

Dilip Kumar Pyaasa Movie

फिल्म के प्रीमियर पर पहुंचे थे दिलीप कुमार

फिल्म के प्रीमियर शो में दिलीप कुमार भी पहुंचे थे। उनके साथ के. आसिफ और बी.आर. चोपड़ा भी मौजूद थे। फिल्म खत्म होने के बाद दिलीप कुमार ने बी.आर. चोपड़ा से कहा, 'थैंक गॉड, मैं बाल-बाल बच गया। अगर मैं ये रोल करता, तो लोग मेरी खूब हंसी उड़ाते।' हालांकि वक्त के साथ उनकी सोच बदल गई। बाद में कई मौकों पर ये बात सामने आई कि उन्हें 'प्यासा' जैसी फिल्म छोड़ने का अफसोस रहा।

क्या है फिल्म प्यासा की स्टोरी?

1957 में रिलीज हुई 'प्यासा' एक ऐसे कवि विजय की कहानी है, जो अपनी बेहतरीन कविताओं के बावजूद समाज में पहचान नहीं बना पाता। घरवाले उसे निकम्मा समझते हैं, प्रेमिका दौलत के लिए उसे छोड़ देती है और दुनिया उसकी काबिलियत को नजरअंदाज करती रहती है। फिर उसकी जिंदगी में गुलाबो आती है, जो पेशे से तवायफ है लेकिन सबसे पहले उसके हुनर को पहचानती है। कहानी तब मोड़ लेती है, जब लोग विजय को मरा हुआ मान लेते हैं। उसकी मौत की खबर फैलते ही वही लोग उसकी कविताओं के दीवाने बन जाते हैं, जिन्होंने उसे जीते-जी ठुकराया था। जब विजय सच बताने लौटता है, तो उसे एहसास होता है कि इस दुनिया में इंसान से ज्यादा उसकी मौत की कीमत है। यही वजह है कि 'प्यासा' आज भी हर दौर के दर्शकों के दिल को छू जाती है।

Dilip Kumar Pyaasa Movie

Dilip Kumar Pyaasa Movie

कम उम्र में हो गया था निधन

गुरु दत्त का सफर जितना शानदार रहा, उतना ही दर्दभरा उनका अंत भी था। 9 जुलाई 1925 को बेंगलुरु में जन्मे गुरु दत्त ने अपने छोटे से करियर में ऐसी फिल्में बनाईं, जिन्हें आज भी सिनेमा की पाठशाला माना जाता है। 'प्यासा', 'कागज के फूल', 'साहिब बीबी और गुलाम' और 'चौदहवीं का चांद' जैसी फिल्मों ने उन्हें हमेशा के लिए अमर कर दिया। लेकिन पर्दे पर दूसरों के दर्द को इतनी खूबसूरती से दिखाने वाला ये कलाकार अपनी जिंदगी के दर्द से कभी बाहर नहीं निकल सका। 10 अक्टूबर 1964 को महज 39 साल की उम्र में गुरु दत्त इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनकी अचानक हुई मौत ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को झकझोर दिया था। वक्त गुजर गया, कई पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन गुरु दत्त की बनाई फिल्में आज भी लोगों की आंखें नम कर देती हैं और यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।
End of Article