मां की मन्नत पूरी करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत ने किया था यह काम, नहीं सुनी होगी आपने अभिनेता की यह कहानी 

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 14, 2022, 08:08 AM IST

Sushant Singh Rajput 2nd Death Anniversary: आज बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की दूसरी पुण्यतिथि है। सुशांत सिंह राजपूत के ऐसे कई किससे हैं जिनसे उनके फैंस बेखबर हैं। 

मां की मन्नत पूरी करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत ने किया था यह काम, नहीं सुनी होगी आपने अभिनेता की यह कहानी 

Sushant Singh Rajput Death Anniversary: दर्शकों को अपनी फिल्मों के जरिए हंसाने और गुदगुदाने वाले अभिनेता हम सबके बीच नहीं हैं। लेकिन आज भी उनकी यादें करोड़ों दिलों में जिंदा हैं। 14 जुलाई 2020 वह तारीख है जब मुंबई के बांद्रा स्थित आवास पर अभिनेता की मृत्यु हुई थी। अपने फ्लैट पर सुशांत सिंह राजपूत मृत पाए गए थे। एक्टर की मृत्यु की खबर ने उनके फैंस का दिल तोड़ दिया था। दो साल बाद भी सुशांत सिंह राजपूत के मौत के रहस्य की गुत्थी सुलझ नहीं पाई है। ऐसे में एक्टर के फैंस उनके लिए इंसाफ की मांग अभी भी करते रहते हैं। सुशांत सिंह राजपूत के ऐसे कई किस्से हैं जो अनसुने रह गए। ऐसे ही एक किस्सा है जब अपनी मां के लिए सुशांत सिंह राजपूत नाव से ही अपने ननिहाल आ गए थे। 

सुशांत सिंह राजपूत अपनी मां से बहुत प्यार करते थे। इसीलिए मां की मन्नत पूरी करने के लिए सुशांत सिंह राजपूत नाव से ही अपने ननिहाल आ गए थे। उनका ननिहाल बिहार के खगड़िया जिले में है। बागमती नदी के किनारे स्थित बौरने गांव से उनका एक किस्सा जुड़ा हुआ है। 13 मई 2019 वह तारीख है जब एक्टर मुंडन करवाने के लिए अपने ननिहाल पहुंचे थे। तेगाछी घाट से नाव पकड़ने के बाद वह बौरने घाट पहुंचे थे। यहां पहुंचने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है। उनकी मां उषा देवी ने यहां पर भगवती स्थान में मन्नत मांगी थी जिसे पूरा करने के लिए सुशांत यहां आए थे। एक्टर के साथ उनके पिता कृष्ण किशोर सिंह और चचेरे भाई विधायक नीरज कुमार बबलू और तत्कालीन विधान पार्षद और उनकी भाभी नूतन सिंह भी थीं।

उनके ममेरे भाई युवराज सिंह ने यह कहा था कि वह कभी भी उस दिन को भुला नहीं पाएंगे जब सुशांत सिंह राजपूत बौरने पहुंचे थे। यहां उनके साथ फोटो खिंचवाने के लिए फैंस की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। युवराज सिंह ने इसके बाद यह भी कहा था कि बॉलीवुड के दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत का हंसता हुआ चेहरा उन्हें आज भी याद है।

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