Bengal Assembly Results 2026: पश्चिम बंगाल में अब सियासी मौसम बदल रहा है। चुनावी रुझानों में ममता सरकार खत्म होने की कगार पर नजर आ रही है। 294 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटों की जरूरत है और रुझानों में भाजपा ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) शतक भी नहीं लगा सकी।
एकाद घंटे में स्थिति पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी। अगर आंकड़े ऐसे ही रहते हैं तो ममता बनर्जी का शासन समाप्त हो जाएगा। साल 2011 से लगातार ममता बनर्जी बंगाल की सत्ता में काबिज हैं। उन्होंने वामदल को सत्ता से उखाड़ फेंका था और तब से अभी दल वामदल पनप नहीं पाया। इस बार के चुनाव नतीजों में वामदल का सूपड़ा साफ हो गया। साल 2011 से जहां ममता बनर्जी को जनता ने अपना मुखिया बनाकर कुर्सी में बिठाया था, उन्हें अब उतार दिया है। यह पहला मौका है जब भाजपा राज्य में सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है।
रिकॉर्डतोड़ मतदान
बंगाल में दूसरे राज्यों की तुलना में ज्यादा मतदान होता रहा है। इस बार बंगाल में दोनों चरणों में कुल 92.47 फीसदी वोटिंग हुई। आजादी के बाद बंगाल में किसी भी चुनाव में यह अब तक का सबसे ज्यादा मतदान है। इससे पहले, बंगाल में सबसे ज्यादा साल 2011 में 84.72 फीसदी मतदान हुआ था, जो रिकॉर्ड 2026 में टूट गया।
TMC की हार की क्या हैं वजहें
आखिरी बार जब जनता ने रिकॉर्ड तोड़ मतदान किया था तो वामदल का शासन खत्म हो गया था और इस बार टीएमसी शासन समाप्त होते हुए दिखाई दे रहा है। इस संभावित हार के लिए सत्ता विरोधी लहर को सबसे अहम माना जा रहा है। हालांकि, इसके अलावा भी कई अन्य वजहें हैं। जिनमें रणनीति में कमी, भ्रष्टाचार के आरोप, महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और शहरी वोटरों और युवाओं की बदलती सोच इत्यादि।
Mamata Abhishek
क्या खत्म होने की कगार पर है टीएमसी
भले ही टीएमसी सरकार बनाने लायक आंकड़े न जुटा पाए, लेकिन यह कहना कि वह बंगाल से समाप्त हो जाएगी, सही नहीं है। टीएमसी को धीरे-धीरे अपने कैडर को मजबूत और ऊर्जावान बनाने की जरूरत है और धीरे-धीरे विपक्ष में रहते हुए अपना आधार मजबूत करना पड़ेगा। भले ही विधानसभा चुनाव में टीएमसी ममता दीदी की उम्मीदों पर खरी न उतर पाई हो, लेकिन उसे धीरे-धीरे वोटर्स का भरोसा जीतना होगा और 2029 के लोकसभा चुनाव को मजबूती से लड़ने की कोशिश करनी चाहिए।
संगठनात्मक बदलाव की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि टीएमसी को बड़े स्तर पर संगठनात्मक बदलावों की जरूरत है। हार की समीक्षा की जानी चाहिए और नए चेहरों को आगे बढ़ना चाहिए। इसके अलावा नेतृत्व में फेरबदल भी किया जा सकता है।
दिल्ली अब काफी दूर
विधानसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी अक्सर कहती रही हैं कि बंगाल में जीत दर्ज करने के बाद अगला नंबर दिल्ली का होगा, लेकिन इस बार के चुनावों में तो बंगाल में ही खेला हो गया और ममता दीदी की कुर्सी छिनती हुई प्रतीत हो रही है। ऐसे में पार्टी को संगठन को मजबूत करने की दिशा में काम करने जरूरत है।
