West Bengal Election 2021: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है। इस बार भी मुकाबला दो तरफा ही दिख रहा है। एक ओर सत्ताधारी टीएमसी है तो दूसरी ओर विपक्षी भाजपा। कांग्रेस, वाम दल, हुमायूं कबीर और AIMIM जैसी पार्टियां मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में लगी हैं। हालांकि सबकी मेहनत का नतीजा 4 मई को पता चल जाएगा। 2026 विधानसभा चुनाव के नतीजे में भले ही अभी देर हो, लेकिन पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 का रिजल्ट (West Bengal Legislative Assembly Election 2021 Result) यह बताने के लिए काफी है कि मुकाबला किसके बीच है और मार्जिन ऑफ विक्ट्री का खेल क्या है? आइए इसे समझते हैं...!
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के आंकड़ों से समझिए कहानी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 के आंकड़े यह दिखाते हैं कि लोकतंत्र में जीत का मतलब हमेशा भारी जनसमर्थन नहीं होता, बल्कि कई बार बहुत कम वोटों का अंतर भी सत्ता तय कर देता है। ADR (Association for Democratic Reforms) की रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, बड़ी संख्या में उम्मीदवार बेहद कम मार्जिन से चुनाव जीतने में सफल रहे, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या वास्तव में ये नतीजे व्यापक जनमत को दर्शाते हैं। रिपोर्ट बताती है कि कई सीटों पर जीत का अंतर हजारों में नहीं, बल्कि सैकड़ों और कुछ मामलों में तो उससे भी कम रहा। इसका मतलब यह है कि थोड़े से वोटों का झुकाव पूरी सीट का परिणाम बदल सकता था। ऐसे नतीजे यह दर्शाते हैं कि चुनावी मुकाबला कितना कड़ा था और हर एक वोट की अहमियत कितनी बड़ी है।
कम मार्जिन वाली सीटें (1000 से कम वोट)
2021 के चुनावों में कुल 7 विजेता ऐसे थे जिनकी जीत का अंतर 1000 वोटों से भी कम रहा। इन सीटों का विवरण इस प्रकार है:
- दिनहाटा (Dinhata): यहां सबसे कम मार्जिन रहा। भाजपा के निसिथ प्रमाणिक मात्र 57 वोटों (0.02%) से जीते
- बलरामपुर (Balarampur): भाजपा के बाणेश्वर महतो 423 वोटों (0.21%) से विजयी हुए
- दांतन (Dantan): एआईटीसी (TMC) के बिक्रम चंद्र प्रधान 623 वोटों (0.31%) से जीते
- कुलटी (Kulti): भाजपा के अजय कुमार पोद्दार ने 679 वोटों (0.39%) के अंतर से जीत दर्ज की
- तमलुक (Tamluk): एआईटीसी के सौमेन कुमार महापात्रा 793 वोटों (0.34%) से जीते
- जलपाईगुड़ी (Jalpaiguri): एआईटीसी के डॉ. प्रदीप कुमार बर्मा 941 वोटों (0.42%) से जीते
- घाटल (Ghatal): भाजपा के सीतल कपाट ने 966 वोटों (0.43%) के अंतर से जीत हासिल की।
बहुमत का अभाव: औसतन 41.29% प्रतिनिधित्व
2021 के चुनावों में सभी विजेताओं का औसत प्रतिनिधित्व मात्र 41.29% रहा। इसका सीधा मतलब यह है कि औसतन एक विधायक को उस क्षेत्र के केवल 41% पंजीकृत मतदाताओं का समर्थन प्राप्त है। शेष 58.71% मतदाताओं ने या तो किसी अन्य उम्मीदवार को वोट दिया, या NOTA चुना, या वे मतदान करने ही नहीं आए। हालांकि यह 2016 के 39.86% के औसत से थोड़ा बेहतर है, लेकिन फिर भी यह आधे से कम है।
'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट' (FPTP) सिस्टम का गणित
भारत में चुनावी जीत के लिए 'फर्स्ट पास्ट द पोस्ट' सिस्टम अपनाया जाता है। इसमें जिस उम्मीदवार को सबसे अधिक वोट मिलते हैं, उसे विजेता घोषित कर दिया जाता है, चाहे उसे कुल मतदाताओं का 50% समर्थन मिले या न मिले।
- जोरासांको निर्वाचन क्षेत्र में विजेता विवेक गुप्ता (AITC) का प्रतिनिधित्व मात्र 26% है। यानी क्षेत्र के 74% लोगों ने उन्हें वोट नहीं दिया, फिर भी वे विधायक हैं।
- इसी तरह दार्जिलिंग में भाजपा के नीरज तमांग जिम्बा का प्रतिनिधित्व केवल 28% है।
प्रमुख दलों के विजेताओं का प्रदर्शन
ADR का ये डेटा दिखाता है कि सत्ताधारी दल और मुख्य विपक्षी दल, दोनों के कई विधायकों के पास जनता के बड़े हिस्से का समर्थन नहीं है। AITC (तृणमूल कांग्रेस) के इनके 213 विजेताओं में से 63 (30%) ऐसे हैं जिन्होंने कुल पंजीकृत मतदाताओं के 40% से भी कम वोट हासिल किए हैं। BJP (भारतीय जनता पार्टी): इनके 77 विजेताओं में से 32 (42%) ऐसे हैं जिनका प्रतिनिधित्व 40% से कम मतदाताओं का है।
2021 बंगाल चुनाव एक नजर में
2021 का विधानसभा चुनाव 8 चरणों में मार्च से अप्रैल 2021 के बीच संपन्न हुआ। मुकाबला मुख्य रूप से All India Trinamool Congress (टीएमसी) और Bharatiya Janata Party (बीजेपी) के बीच था, जबकि Indian National Congress और वाम दल गठबंधन भी मैदान में थे। नतीजों में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी ने शानदार जीत दर्ज की और लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। टीएमसी ने 294 में से 213 सीटें जीतीं, जबकि बीजेपी 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्षी दल बनकर उभरी। कांग्रेस और वाम दलों का प्रदर्शन काफी कमजोर रहा। इस चुनाव की खास बात यह रही कि कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी था और कई उम्मीदवारों ने 50% से कम वोट शेयर के साथ जीत हासिल की। इससे ‘फर्स्ट पास्ट द पोस्ट’ प्रणाली और प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर बहस भी तेज हुई। कुल मिलाकर, 2021 का बंगाल चुनाव न सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी एक बड़ा राजनीतिक संकेत लेकर आया।