West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत कल यानी सोमवार 4 मई को मतगणना हुई। बंगाल की जनता ने पिछले 15 सालों से सत्ता में बैठी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) को बाहर का रास्ता दिखा दिया। पश्चिम बंगाल में पहली बार कमल खिला है। भाजपा को राज्य की 294 सीटों में से 206 सीटों पर जीत मिल चुकी है, जबकि एक सीट का परिणाम अभी घोषित नहीं हुआ है और एक सीट पर दोबारा मतदान होना है। पिछले चुनाव में 215 सीटें जीतने वाली टीएमसी इस बार 80 सीटों पर सिमट गई। भाजपा की प्रचंड जीत और टीएमसी की बड़ी हार के बीच एक प्रश्न ये है कि लंबे समय से चर्चा में रहे चिकन नेक की सीटों पर किस पार्टी को जीत मिली। चलिए जानते हैं -
चिकन नेक क्षेत्र में किस पार्टी को मिली जीत?
चिकन नेक किसे कहते हैं?
सबसे पहले तो यह जानने की जरूरत है कि चिकन नेक किसे या किस हिस्से को कहा जाता है? दरअसल सिलिगुड़ी कॉरिडोर (Siliguri Corridor) को ही चिकन नेक कहा जाता है। यह 20-25 किमी चौड़ा और करीब 60 किमी लंबा हिस्सा है। यह भारत की मुख्य भूमि को उत्तर-पूर्वी राज्यों से जोड़ता है। यह एक ऐसा हिस्सा है, जिसका दक्षिण-पूर्वी बॉर्डर बांग्लादेश से, पश्चिमी बॉर्डर नेपाल से और उत्तरी हिस्सा भूटान सीमा से मिलता है। यह हिस्सा उत्तर-पूर्वी राज्यों तक पहुंच के लिए भारत का बहुत ही अहम हिस्सा है।
चीन की चुम्बी वैली के करीब होने के कारण इसे संभावित सुरक्षा चुनौती वाले क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। यही मार्ग उत्तर-पूर्वी राज्यों के लिए व्यापार, रसद आपूर्ति और सैन्य तैनाती का प्रमुख केंद्र है। भारतीय सेना यहां नियमित रूप से सैन्य अभ्यास करती है। हालांकि, अवैध घुसपैठ और सीमावर्ती सुरक्षा चुनौतियां इस कॉरिडोर को संवेदनशील बनाती हैं, जिसके चलते यहां कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना बेहद जरूरी है।
क्यों चर्चा में आया चिकन नेक
वैसे तो चिकन नेक नाम से मशहूर सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा भारत के लिए हमेशा ही चिंता का विषय रहा है। लेकिन हाल के समय में यह चर्चा में तब आया जब बांग्लादेश में हिंसा भड़कने के बाद चुनी हुई सरकार को गिरा दिया गया और प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी। इसके बाद मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का चीफ एडवाइजर बनाया गया। चीफ एडवाइजर बनने के बाद मोहम्मद यूनुस ने भारत के खिलाफ जहर उगलना शुरू कर दिया। यहां तक कि वह चीन के अम्बेसडर को सिलिगुड़ी कॉरिडोर के पास मौजूद बांग्लादेश के तीस्ता प्रोजेक्ट पर भी ले गए। यहां तक कि पाकिस्तानी जनरलों ने भी बांग्लादेश का दौरा किया और वहां से भी चिकन नेक को कट करने की बात कही गई।
किस पार्टी को मिली सिलिगुड़ी कॉरिडोर में जीत
जब चिकन नेक यानी सिलिगुड़ी कॉरिडोर इतना महत्वपूर्ण है तो यह भी जानना भी जरूरी हो जाता है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में यहां की सीटों पर किसे जीत मिली है। चलिए जानते हैं -
इस क्षेत्र में सिलीगुड़ी, देबग्राम-फुलबारी, माटीगारा-नक्सलबाड़ी और फांसीदेवा चार सीटें आती हैं। सिलिगुड़ी विधानसबा सीट पर भाजपा प्रत्याशी शंकर घोष को 120760 वोट मिले और उन्होंने 73192 मतों से जीत दर्ज की। देबग्राम-फुलबारी सीट से भाजपा की सिखा चटर्जी ने जीत दर्ज की। उन्हें कुल 166300 मत मिले और उन्होंने 97715 वोटों से जीत हासिल की।
सिलिगुड़ी कॉरिडोर में सबसे बड़ी जीत
माटीगारा-नक्सलबाड़ी में सिलिगुड़ी कॉरिडोर की सबसे बड़ी जीत हासिल हुई है। यहां पर भाजपा प्रत्याशी आनंदमय बर्मन को कुल 166905 वोट मिले और उन्होंने एक लाख से ज्यादा वोटों (104265) से जीत दर्ज की। जबकि फांसीदेवा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी दुर्गा मुर्मू ने 45263 मतों से जीत हासिल की, उन्हें कुल मिलाकर 118241 वोट मिले।
इस तरह पूरे चिकन नेक क्षेत्र की चारों सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशियों को ही जीत मिली है। पार्टी को राज्य में 206 सीटों के साथ प्रचंड बहुमत मिला है, जबकि एक सीट पर अब भी उसे बढ़त हासिल है।
