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रोहिणी आचार्य vs राजीव प्रताप रूडी: कितना दिलचस्प है बिहार की सारण सीट का मुकाबला? जानें यहां का चुनावी इतिहास

Hot Seat Saran: बिहार की सारण लोकसभा सीट पर इस बार का मुकाबला भी बेहद दिलचस्प होता नजर आ रहा है। पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी और लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के बीच दो दो हाथ होना है। आपको इस लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास जानना चाहिए।

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बिहार के सारण लोकसभा सीट का इतिहास जानें।

Photo : Times Now Digital

Bihar Lok Sabha Election 2024: सारण लोकसभा सीट पर पहली बार सांसद बनने वाले नेता का नाम लालू प्रसाद यादव है। जब लालू पहली बार इस सीट से सांसद चुने गए थे, तो उन्होंने राजीव प्रताप रूडी को ही पटखनी दी है। लालू से हार के बाद रूडी दो बार इस सीट से सांसद चुने गए, अब एक बार फिर सारण सीट पर दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है।

सारण में लालू की बेटी रोहिणी आचार्य vs राजीव प्रताप रूडी

पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव प्रताप रूडी का मुकाबला इस बार लालू यादव नहीं, बल्कि उनकी बेटी रोहिणी आचार्य से हो रहा है। राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने रोहिणी को इस सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि दो बार से सांसद रूडी पर भाजपा ने एक दफा फिर से दाव खेला है। इन सबके बीच राजीव प्रताप का मानना है कि सारण में रोहिणी नहीं, बल्कि उनका मुकाबला लालू यादव से ही है।

क्या कहता है बिहार की हॉट सीट सारण का इतिहास?

बिहार में कुल 40 लोकसभा सीटें हैं, इनमें से एक सारण भी है। वर्ष 2002 में भारत के परिसीमन आयोग के गठन के बार इस क्षेत्र के लिए सिफारिश की गई। सिफारिशों के आधार पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन का कार्यान्वयन हुआ और वर्ष 2008 में ये क्षेत्र अस्तित्व में आया। परिसीमन से पहले ये क्षेत्र छपरा लोकसभा सीट का चुनावी हिस्सा था। परिसीमन के बाद 2009 में इस सीट पर पहली बार लोकसभा चुनाव हुए। पहले चुनाव में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के प्रमुख लालू यादव ने अपनी किस्मत आजमाई। उस वक्त उसका सामना भाजपा के राजीव प्रताप रूडी से हुआ, जिसमें लालू ने 50 हजार से अधिक वोटों से जीत हासिल की।

देखें सारण के सांसदों की सूची

वर्षनामपार्टी
2009लालू प्रसाद यादवराष्ट्रीय जनता दल
2014राजीव प्रताप रूडीभारतीय जनता पार्टी
2019राजीव प्रताप रूडीभारतीय जनता पार्टी

लोकसभा चुनाव 2009 के नतीजे

पार्टीउम्मीदवारवोटवोट प्रतिशत
राजदलालू प्रसाद यादव2,74,20947.21%
भाजपाराजीव प्रताप रूडी2,22,39438.29%
बसपासलीम परवेज़ 45,0277.75%
इसके बाद राजद को इस सीट से कभी जीत हासिल नहीं हो सकी है। साल 2014 के चुनाव में तो खुद लालू की पत्नी राबड़ी देवी ने इस सीट से चुनाव लड़ा था। जिन्हे राजीव प्रताप रूडी ने 35 हजार से अधिक वोटों से मात दी थी। जीत का सिलसिला उन्होंने 2019 में भी बरकरार रखा और इस चुनाव में उन्होंने आरजेडी के चंद्रिका राय को 1 लाख 38 हजार से अधिक वोटों से शिकस्त दी। चंद्रिका राय तेज प्रताप यादव के ससुर हैं। अब एक बार फिर लालू परिवार का सदस्य इस सीट पर दावेदारी पेश कर रहा है। लालू की बेटी का मुकाबला इस सीट से दो बार के सांसद से हो रहा है, ऐसे में ये लड़ाई और दिलचस्प हो जाती है।

लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे

पार्टीउम्मीदवारवोटवोट प्रतिशत
भाजपाराजीव प्रताप रूडी3,55,12041.12%
राजदराबड़ी देवी3,14,17236.38%
जद(यू)सलीम परवेज़1,07,00812.39%
बसपाबाल मुकुंद चौहान15,5001.79%

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे

पार्टीउम्मीदवारवोटवोट प्रतिशत
भाजपाराजीव प्रताप रूडी499,34251.29%
राजदचंद्रिका राय3,60,91341.33%
इस लोकसभा चुनाव में एक लाइसेंस प्राप्त वाणिज्यिक पायलट दिल्ली की राजनीतिक उड़ान के लिए तैयार है। पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री राजीव प्रताप रूडी बिहार के सारण से लगातार चौथी बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। एयरबस 320 उड़ाने वाले एकमात्र सांसद रूडी ने अपनी चुनावी तैयारी के बारे में बताया। उनका मानना है कि इस चुनाव में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव उनके असली प्रतिद्वंद्वी हैं, हालांकि वह खुद चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

2024 में राजीव प्रताप रूडी की क्या-क्या चुनौतियां?

राजीव प्रताप रूडी ने खुद बताया कि लालू प्रसाद यादव हमेशा मेरे खिलाफ चुनाव लड़ते रहे हैं और वह यहां सारण में फिर से चुनाव लड़ रहे हैं। इसलिए, यहां चुनौती मेरे लिए नई नहीं है। मीडिया के लिए रोहिणी आचार्य उम्मीदवार हैं, लेकिन मेरे लिए लालू प्रसाद यादव राजद के उम्मीदवार हैं और वह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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