Rai Assembly constituency: हरियाणा के शह और मात के खेल में किसकी होगी जीत और किसको करना पड़ेगा संतोष? यह तो 8 अक्टूबर को पता चल ही जाएगा, लेकिन सोनीपत जिले के तहत आने वाली राई विधानसभा (Rai Constituency) पर भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होने वाली है। भाजपा के लिए जहां प्रतिष्ठा का सवाल है तो कांग्रेस अपनी इस सीट को वापस जीतना चाहती है।
राई विधानसभा सीट
पहली बार कब हुए चुनाव?
राई विधानसभा सीट पर पहली बार साल 1967 में चुनाव हुए थे और तब कांग्रेस के आर राम निर्वाचित होकर विधानसभा पहुंचे थे, लेकिन 2019 में भाजपा को राज्य की इस सीट पर पहली बार कामयाबी मिली और इस बार भाजपा इस सीट को बरकरार रखने की अपनी पूरी ताकत झोंकने के इरादे में है।
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भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर
वर्तमान समय पर राई विधानसभा सीट से भाजपा के मोहन लाल बड़ौली के पास है, जिन्हें विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा ने बड़ी जिम्मेदारी देते हुए पार्टी प्रदेशाध्यक्ष बनाया है। मोहन लाल बड़ौली पहले पार्टी प्रदेश महामंत्री पद पर थे। पिछली बार भाजपा ने जननायक जनता पार्टी (JJP) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, लेकिन इस बार पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है, क्योंकि जजपा ने चुनाव से काफी वक्त पहले ही भाजपा से अपना गठबंधन समाप्त कर दिया था।
पिछले तीन चुनावों में कौन जीता
| साल | विजेता | वोट | हार | वोट |
| 2019 | मोहन लाल बड़ौली (भाजपा) | 45,377 | जय तीर्थ दहिया (कांग्रेस) | 42,715 |
| 2014 | जय तीर्थ दहिया (कांग्रेस) | 36,703 | इंद्रजीत (इनेलो) | 36,700 |
| 2009 | जय तीर्थ दहिया (कांग्रेस) | 35,514 | इंद्रजीत (इनेलो) | 30,848 |
राई विधानसभा के मतदाता
राई सीट हरियाणा विधानसभा का निर्वाचन क्षेत्र नंबर 29 है। राई विधानसभा एक सामान्य सीट है, जहां पर कुल 1,97,980 मतदाता हैं। जिनमें 106,842 पुरुष मतदाता और 91130 महिला मतदाता मौजूद हैं।
कब होगा मतदान? (Election Date)
राई विधानसभा सीट पर हरियाणा की अन्य 89 सीटों के साथ 5 अक्टूबर को एक ही चरण में विधानसभा चुनाव होंगे। इस दिन सभी मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
राई विधानसभा सीट के परिणाम कब होंगे घोषित? (Rai Constituency Result Date)
राई विधानसभा सीट के चुनावी परिणाम राज्य की सभी सीटों के साथ 8 अक्टूबर को जारी होंगे।
बदले-बदले समीकरण
हरियाणा विधानसभा चुनाव के समीकरण पहले के मुकाबले काफी अलग हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधी टक्कर तो है ही, लेकिन इनेलो, जजपा के अलावा आम आदमी पार्टी एक-दूसरे के वोट काट सकती हैं। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पहले एकसाथ चुनाव लड़ने की संभावना थी, लेकिन गठबंधन परवान नहीं चढ़ा। वहीं, इस बार जजपा इस बार चंद्रशेखर आजाद की पार्टी के साथ चुनाव लड़ रही है, जबकि पिछली बार भाजपा के साथ गठबंधन में चुनाव लड़कर सभी को चौंका दिया था।
