मतदाता सूची विवाद से TMC को चुनौती या सहानुभूति? मुर्शिदाबाद में दिलचस्प मुकाबला

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 55 लाख मतदाताओं में से करीब 11 लाख नाम ‘विचाराधीन’ सूची में आने से चुनावी माहौल गरमा गया है। इसके साथ ही 2025 से लगातार हो रही सांप्रदायिक हिंसा और हाल की घटनाओं ने राजनीतिक ध्रुवीकरण को और तेज कर दिया है।

पश्चिम बंगाल के दो-तिहाई मुस्लिम आबादी वाले मुर्शिदाबाद जिले में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत नामों का हटाया जाना और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का राजनीतिक भविष्य तय करने वाले अहम मुद्दे बनकर उभरे हैं।एसआईआर के बाद 28 फरवरी को प्रकाशित मतदाता सूची में जिले के करीब 55 लाख मतदाताओं में से 11 लाख से अधिक लोगों को ‘विचाराधीन’ श्रेणी में रखा गया, जो कुल मतदाताओं का लगभग 20 प्रतिशत है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बड़े पैमाने पर नाम हटने से भले ही तृणमूल कांग्रेस को कुछ मुश्किलें आ सकती हैं, लेकिन इससे सत्तारूढ़ दल के पक्ष में मतदाताओं का ध्रुवीकरण भी संभव है।

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