History of Madha Lok Sabha Seat: कहा जाता है महाराष्ट्र की सियासत में कब क्या होने वाला है, इसका अंदाजा लगा पाना उतना ही मुश्किल है, जितना कि रेत के ढेर में एक सुई की तलाश करना। 7 चरणों में हो रहे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए वोटिंग का दौर शुरू हो चुका है। इस बीच नेताओं के दल-बदल का सिलसिला भी अपने परवान पर है। एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामने वालों की कतार बड़ी लंबी है। पार्टी बदलते ही टिकट पर मुहर भी लग जाती है। आपको शरद पवार की पार्टी के एक ऐसे ही नेता से रूबरू करवाते हैं, जिनके खिलाफ तो दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन उनके भाजपा छोड़कर राकंपा में आने के इनाम के तौर पर लोकसभा चुनाव का टिकट मिल गया। हालांकि ये तो आम बात है, मगर जो खास बात है वो ये कि इस नेता के खिलाफ दर्जनों गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।
धैर्यशील मोहिते पाटिल के हलफनामे से खुलासा
हाल ही में भाजपा छोड़कर राकांपा (शरदचंद्र पवार) में शामिल होने वाले धैर्यशील मोहिते-पाटिल ने बीते मंगलवार को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में माधा लोकसभा सीट के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया, उन्होंने अपने शपथ पत्र में जो खुलासा किया उसके बाद शरद पवार और उनकी पार्टी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मोहिते के खिलाफ एक या दो नहीं बल्कि 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। आपको 5 पॉइंट में समझाते हैं कि आखिर मोहिते पाटिल पर सियासत क्यों गरमाई है।
- धैर्यशील ने अपने नामांकन शपथ पत्र में अपने खिलाफ 34 मामलों का खुलासा किया है।
- उसके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले हैं।
- इतने मुकदमे वाले अपराधी को एनसीपी-शरद पवार पार्टी टिकट दे रही है।
- उनके खिलाफ गुंडागर्दी के भी मामले हैं।
- उन पर कोरोना काल के दौरान सार्वजनिक जीवन को खतरे में डालने का भी आरोप है।

मोहिते पाटिल के हलफनामे से खुलासा।
माधा लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास
साल 2008 में माधा लोकसभा सीट अस्तित्व में आया था, जिसके बाद पहली बार इस सीट के लिए 2009 में लोकसभा चुनाव हुए। महाराष्ट्र की सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने उस वक्त खुद इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका सामने भाजपा के सुभाष देशमुख से हुआ। इस चुनाव में पवार ने 3 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की। इस तरह इस सीट के लिए हुए पहले चुनाव में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने जीत का परचम फहराया। इसके बाद साल 2014 में जब इस सीट पर चुनाव हुए तो मोदी लहर के बावजूद राकंपा ने यहां से जीत हासिल की। 2014 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विजयसिंह मोहिते-पाटिल इस सीट से सांसद चुने गए। इसे बाद 2019 में पहली बार यहां भाजपा का खाता खुला और रंजीत नाइक-निंबालकर ने जीत हासिल की। बीजेपी ने रंजीत पर एक बार फिर भरोसा जताया है। जो राकंपा के धैर्यशील मोहिते पाटिल को टक्कर देंगे।
माधा सीट से कब कौन बना सांसद?
| वर्ष | नाम | पार्टी |
| 2009 | शरद पवार | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी |
| 2014 | विजयसिंह मोहिते-पाटिल | राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी |
| 2019 | रंजीत नाइक-निंबालकर | भारतीय जनता पार्टी |
पहले ही शरद पवार ने किया था ये दावा
महाराष्ट्र के सोलापुर में लोकसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी उस वक्त बढ़ गई थी, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को झटका देते हुए धैर्यशील मोहिते पाटिल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। सोलापुर जिले में भाजपा के महासचिव रहे मोहिते पाटिल ने बीते 10 अप्रैल को लिखे एक पत्र में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को निजी कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इस पूरे सियासी उठापटक के बीच राकांपा (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने घोषणा कर दी थी कि मोहिते पाटिल उसकी प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल की उपस्थिति में उनकी पार्टी में शामिल होंगे। पवार ने जैसा कहा, वैसा ही हुआ। मोहिते ने न सिर्फ राकंपा का दामन थामा, बल्कि उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट भी मिल गया।
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ने के कुछ दिन बाद ही मोहिते-पाटिल रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) में शामिल हो गए थे। इसके बाद उन्हें तुरंत माधा निर्वाचन क्षेत्र से महा विकास आघाडी (एमवीए) के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा गया।
माधा लोकसभा सीट पर कब होगा मतदान?
माधा से मौजूदा भाजपा सांसद रंजीत नाइक-निंबालकर को पार्टी ने फिर से मैदान में उतारा है। निंबालकर ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीट के लिए 19 अप्रैल से 20 मई के बीच पांच चरणों में मतदान होगा और वोटों की गिनती चार जून को होगी। माधा में चौथे चरण में 13 मई को मतदान होगा।
लोकसभा चुनाव 2024 में महाराष्ट्र की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि ये देश का दूसरा ऐसा राज्य हैं, जहां सबसे अधिक लोकसभा सीटें हैं। 543 सीटों में से अकेले इस राज्य में 48 सीटें हैं, जो सत्ता के सिंहासन में अहम भूमिका अदा करती हैं। चुनावी मौसम में सियासी उठापटक का दौर जारी है। तमाम पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने की कोशिश में एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। देखना होगा कि 30 से अधिक मुकदमे वाले नेता को टिकट देना शरद पवार पर भारी पड़ता है या उनकी ये चाल कामयाब होती है।
