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शरद पवार की पार्टी के वो उम्मीदवार जिनके खिलाफ एक, दो नहीं... 30 से अधिक हैं मुकदमे; जानें माधा लोकसभा सीट का इतिहास

Maharashtra Politics: हाल ही में भाजपा को झटका देकर शरद पवार की पार्टी राकंपा (एसपी) में शामिल हुए धैर्यशील मोहिते पाटिल माधा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने हलफनामे में ये खुलासा किया है कि उनके खिलाफ 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। जिनमें गुंडागर्दी और धोखाधड़ी जैसे गंभीर मामले हैं।

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धैर्यशील मोहिते पाटिल और शरद पवार।

Photo : Times Now Digital

History of Madha Lok Sabha Seat: कहा जाता है महाराष्ट्र की सियासत में कब क्या होने वाला है, इसका अंदाजा लगा पाना उतना ही मुश्किल है, जितना कि रेत के ढेर में एक सुई की तलाश करना। 7 चरणों में हो रहे लोकसभा चुनाव 2024 के लिए वोटिंग का दौर शुरू हो चुका है। इस बीच नेताओं के दल-बदल का सिलसिला भी अपने परवान पर है। एक पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी का दामन थामने वालों की कतार बड़ी लंबी है। पार्टी बदलते ही टिकट पर मुहर भी लग जाती है। आपको शरद पवार की पार्टी के एक ऐसे ही नेता से रूबरू करवाते हैं, जिनके खिलाफ तो दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं, लेकिन उनके भाजपा छोड़कर राकंपा में आने के इनाम के तौर पर लोकसभा चुनाव का टिकट मिल गया। हालांकि ये तो आम बात है, मगर जो खास बात है वो ये कि इस नेता के खिलाफ दर्जनों गंभीर मुकदमे दर्ज हैं।

धैर्यशील मोहिते पाटिल के हलफनामे से खुलासा

हाल ही में भाजपा छोड़कर राकांपा (शरदचंद्र पवार) में शामिल होने वाले धैर्यशील मोहिते-पाटिल ने बीते मंगलवार को महाराष्ट्र के सोलापुर जिले में माधा लोकसभा सीट के लिए अपना नामांकन पत्र दाखिल कर दिया, उन्होंने अपने शपथ पत्र में जो खुलासा किया उसके बाद शरद पवार और उनकी पार्टी पर सवाल खड़े होने लगे हैं। मोहिते के खिलाफ एक या दो नहीं बल्कि 30 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। आपको 5 पॉइंट में समझाते हैं कि आखिर मोहिते पाटिल पर सियासत क्यों गरमाई है।

  1. धैर्यशील ने अपने नामांकन शपथ पत्र में अपने खिलाफ 34 मामलों का खुलासा किया है।
  2. उसके खिलाफ धोखाधड़ी के मामले हैं।
  3. इतने मुकदमे वाले अपराधी को एनसीपी-शरद पवार पार्टी टिकट दे रही है।
  4. उनके खिलाफ गुंडागर्दी के भी मामले हैं।
  5. उन पर कोरोना काल के दौरान सार्वजनिक जीवन को खतरे में डालने का भी आरोप है।
इन पांच बिंदुओं से ये समझना आसान हो जाता है कि भाजपा छोड़कर राकंपा में आने वाले मोहिते पाटिल को शरद पवार की पार्टी से टिकट मिला, तो आखिर क्यों सियासत में एक नए मुद्दे ने जन्म ले लिया और बीजेपी के पास अपने विरोधियों को घेरने का कैसे एक और मौका मिल गया।
Mohite Patil

मोहिते पाटिल के हलफनामे से खुलासा।

माधा लोकसभा सीट का चुनावी इतिहास

साल 2008 में माधा लोकसभा सीट अस्तित्व में आया था, जिसके बाद पहली बार इस सीट के लिए 2009 में लोकसभा चुनाव हुए। महाराष्ट्र की सियासत के चाणक्य कहे जाने वाले शरद पवार ने उस वक्त खुद इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका सामने भाजपा के सुभाष देशमुख से हुआ। इस चुनाव में पवार ने 3 लाख से अधिक वोटों से जीत हासिल की। इस तरह इस सीट के लिए हुए पहले चुनाव में शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने जीत का परचम फहराया। इसके बाद साल 2014 में जब इस सीट पर चुनाव हुए तो मोदी लहर के बावजूद राकंपा ने यहां से जीत हासिल की। 2014 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विजयसिंह मोहिते-पाटिल इस सीट से सांसद चुने गए। इसे बाद 2019 में पहली बार यहां भाजपा का खाता खुला और रंजीत नाइक-निंबालकर ने जीत हासिल की। बीजेपी ने रंजीत पर एक बार फिर भरोसा जताया है। जो राकंपा के धैर्यशील मोहिते पाटिल को टक्कर देंगे।

माधा सीट से कब कौन बना सांसद?

वर्षनामपार्टी
2009शरद पवारराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
2014विजयसिंह मोहिते-पाटिलराष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी
2019रंजीत नाइक-निंबालकरभारतीय जनता पार्टी

पहले ही शरद पवार ने किया था ये दावा

महाराष्ट्र के सोलापुर में लोकसभा चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी उस वक्त बढ़ गई थी, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को झटका देते हुए धैर्यशील मोहिते पाटिल ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था। सोलापुर जिले में भाजपा के महासचिव रहे मोहिते पाटिल ने बीते 10 अप्रैल को लिखे एक पत्र में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष चंद्रशेखर बावनकुले को निजी कारणों का हवाला देते हुए अपना इस्तीफा सौंप दिया था। इस पूरे सियासी उठापटक के बीच राकांपा (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने घोषणा कर दी थी कि मोहिते पाटिल उसकी प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जयंत पाटिल की उपस्थिति में उनकी पार्टी में शामिल होंगे। पवार ने जैसा कहा, वैसा ही हुआ। मोहिते ने न सिर्फ राकंपा का दामन थामा, बल्कि उन्हें लोकसभा चुनाव का टिकट भी मिल गया।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) छोड़ने के कुछ दिन बाद ही मोहिते-पाटिल रविवार को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) में शामिल हो गए थे। इसके बाद उन्हें तुरंत माधा निर्वाचन क्षेत्र से महा विकास आघाडी (एमवीए) के उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा गया।

माधा लोकसभा सीट पर कब होगा मतदान?

माधा से मौजूदा भाजपा सांसद रंजीत नाइक-निंबालकर को पार्टी ने फिर से मैदान में उतारा है। निंबालकर ने उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। महाराष्ट्र की 48 लोकसभा सीट के लिए 19 अप्रैल से 20 मई के बीच पांच चरणों में मतदान होगा और वोटों की गिनती चार जून को होगी। माधा में चौथे चरण में 13 मई को मतदान होगा।

लोकसभा चुनाव 2024 में महाराष्ट्र की अहमियत इस बात से समझी जा सकती है कि ये देश का दूसरा ऐसा राज्य हैं, जहां सबसे अधिक लोकसभा सीटें हैं। 543 सीटों में से अकेले इस राज्य में 48 सीटें हैं, जो सत्ता के सिंहासन में अहम भूमिका अदा करती हैं। चुनावी मौसम में सियासी उठापटक का दौर जारी है। तमाम पार्टियां अपने-अपने उम्मीदवारों को जिताने की कोशिश में एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं। देखना होगा कि 30 से अधिक मुकदमे वाले नेता को टिकट देना शरद पवार पर भारी पड़ता है या उनकी ये चाल कामयाब होती है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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