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पहले ही झटके में मायावती के उत्तराधिकारी ने छोड़ दिया मैदान! BSP ने स्थगित की आकाश आनंद की सभी रैलियां

BSP National Coordinator Akash Anand: 29 अप्रैल को सीतापुर में अपमानजनक भाषा मामले में बसपा के राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। इसके बाद आकाश आनंद ने अपनी सभी चुनावी रैलियों को स्थगित कर दिया है। इसके पीछे न तो आकाश आनंद और न ही बसपा की ओर से कोई कारण बताया गया है।

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मायावती के साथ आकाश आनंद

Photo : Twitter

BSP National Coordinator Akash Anand: बहुजन समाज पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक और मायावती के उत्तराधिकारी आकाश आनंद ने अपनी सभी चुनावी रैलियों को स्थगित कर दिया है। इसके पीछे न तो आकाश आनंद और न ही बसपा की ओर से कोई कारण बताया गया है। ऐसा तब हुआ है जब 29 अप्रैल को सीतापुर में अपमानजनक भाषा मामले में आकाश आनंद के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। ऐसे में माना जा रहा है कि आकाश आनंद अब लोकसभा चुनाव के लिए किसी रैली को संबोधित नहीं करेंगे।

बता दें, आकाश आनंद ने 6 अप्रैल को नगीना लोकसभा सीट से अपनी पार्टी का अभियान शुरू किया था। बाद में, उन्होंने आगरा, बुलंदशहर, मथुरा, वाराणसी, गोरखपुर, अंबेडकर नगर, आजमगढ़ और कौशांबी सहित पश्चिम और पूर्वी उत्तर प्रदेश में कई रैलियों को संबोधित किया। इसी क्रम में उन्होंने 29 अप्रैल को बसपा प्रत्याशी महेंद्र यादव के लिए सीतापुर में एक जनसभा को संबोधित किया था।

आकाश आनंद समेत 36 लोगों के खिलाफ हुई थी FIR

पहली बार सक्रिय रूप से सियासत में उतरे आकाश आनंद को बसपा ने पार्टी का चेहरा बनाकर प्रमोट किया। लोकसभा चुनाव में उनकी कई रैलियों को भी आयोजित किया गया, जिसमें आकाश आनंद ने काफी तूफानी भाषण दिया। उनके भाषण सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुए। हालांकि, सीतापुर में आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप में पुलिस ने आईपीसी की धारा 502 (2) (नफरत को बढ़ावा देना), और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 125 के तहत आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन पर आकाश और पार्टी के 36 अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी।

कारपुर-लखनऊ में होनी भी आकाश आनंद की रैली

एफआईआर दर्ज होने के बाद आकाश आनंद की कई चुनावी रैलियां होनी थीं। बसपा नेता को एक मई को लखनऊ और कानपुर में सार्वजनिक सभा को संबोधित करना था, लेकिन दोनों को स्थगित कर दिया गया। बसपा ने रैलियों को अचानक स्थगित करने का कोई कारण नहीं बताया, लेकिन घटनाक्रम से परिचित एक बसपा नेता ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद रैलियां स्थगित कर दी गई हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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