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Lok Sabha Election 2024: भाजपा के लिए कितना अहम है नागपुर? गडकरी ने बताया अपना चुनावी प्लान

Lok Sabha Chunav: भाजपा को नागपुर सीट पर अब तक सिर्फ 3 बार जीत हासिल हुई है। लगातार तीसरी बार यहां से नितिन गडकरी को उम्मीदवार बनाया गया है। उन्होंने कहा है कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम करते रहना चाहता हूं। आपको बताते हैं भाजपा का इस सीट के लिए क्या प्लान है।

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BJP के लिए नागपुर सीट की अहमियत समझिए।

Photo : Times Now Digital

Nagpur Lok Sabha Seat: नागपुर को आरएसएस का गढ़ माना जाता है, इसके बावजूद इस लोकसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को महज तीन बार जीत हासिल हो पाई है। उससे पहले इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा था, ऐसे में इस बार केंद्रीय मंत्री और भाजपा के उम्मीदवार नितिन गडकरी के सामने फिर बड़ी चुनौती होगी। इस बीच गडकरी ने आगामी चुनाव को लेकर अपना प्लान साझा किया है। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम करते रहना चाहता हूं।

भाजपा के लिए नागपुर जीतना आसान या कठिन?

भले ही पिछले दो लोकसभा चुनावों से भाजपा नागपुर में जीत का परचम फहरा रही है, पर उसके पहले यहां कांग्रेस का एकछत्र राज हुआ करता था। वर्ष 1996 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पहली बार नागपुर में जीत हासिल की थी। बनवारी लाल पुरोहित ने इस सीट से जीत हासिल की थी। हालांकि ये जानना दिलचस्प है कि इससे पहले बनवारी लाल कांग्रेस के टिकट पर इस सीट से दो बार सांसद हुए थे। 1996 के बाद लगातार चार चुनाव में भाजपा को कांग्रेस ने करारी शिकस्त दी।

नागपुर जीतने के लिए क्या है गडकरी का प्लान?

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि वह छोटे से छोटे तरीके से भी लोगों की मदद करना और उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए काम करते रहना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर सृजित करना और गरीबी खत्म करने के लक्ष्य के साथ नरेंद्र मोदी सरकार काम कर रही है। गडकरी को भाजपा ने आगामी आम चुनाव के लिए नागपुर संसदीय क्षेत्र से लगातार तीसरी बार उम्मीदवार बनाया है।

लोगों से मिलते रहना चाहते हैं नितिन गडकरी

नागपुर से भाजपा प्रत्याशी के तौर पर विभिन्न मुद्दों और अपनी योजनाओं के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा, 'मैं लोगों से मिलना जारी रखना चाहता हूं। मेरा मानना है कि सार्वजनिक जीवन में, लोगों से मिलना और छोटे से छोटे संभव तरीके से भी उनकी मदद करना जरूरी है। मैं स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्रों में काम करना जारी रखना चाहता हूं और यथासंभव समाज की सेवा करना चाहता हूं।'

'पोस्टर, बैनर और प्रलोभन में विश्वास नहीं'

उन्होंने कहा, 'मैंने रोजगार सृजन, स्वास्थ्य, शिक्षा, खेल संस्कृति के संदर्भ में अच्छे बुनियादी ढांचे के जरिये लोगों के समग्र विकास और उनके जीवन स्तर में सुधार में मदद करने की कोशिश की। मैंने इन मोर्चों पर प्रयास किए हैं...और भी बहुत कुछ करने की जरूरत है और मैं ऐसा करूंगा।' सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री ने कहा कि अपने चुनाव अभियान के तहत वह हर घर, हर व्यक्ति और हर दिल तक पहुंचेंगे।

गडकरी ने कहा, 'मैं पोस्टर, बैनर और प्रलोभन में विश्वास नहीं करता। मैं लोगों से मिलूंगा, उनसे बात करूंगा और उनका आशीर्वाद मांगूंगा। मैं लोगों के जीवन में बदलाव लाने के लिए काम करना जारी रखना चाहता हूं।' गडकरी से पूछा गया कि उनके अनुसार किन क्षेत्रों में विकास की अपार संभावनाएं हैं तो उन्होंने कहा कि जल परिवहन, बंदरगाह, ब्रॉड गेज मेट्रो, बिजली पर बड़े पैमाने पर तीव्र परिवहन जैसे रोपवे, केबल कार, फनिक्युलर रेलवे और स्काई बस क्षेत्र में अपार अवसर हैं।

2019 लोकसभा चुनाव के परिणाम

उम्मीदवारपार्टीकुल वोटवोट प्रतिशत
नितिन गडकरीभाजपा66022155.67
नाना पटोलेकांग्रेस44421237.45

गडकरी ने भाजपा के अच्छे दिन लौटाए

2014 के चुनाव में भाजपा ने नागपुर से अपने दिग्गज नेता नितिन गडकरी को मैदान में उतारा और उन्होंने पार्टी के भरोसे पर कायम रहते हुए यहां 18 साल का सूखा खत्म किया। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी नितिन गडकरी ने यहां से बाजी मारी। 2019 के चुनाव में नितिन गडकरी 2,16,000 से अधिक वोटों से जीते थे। उन्होंने भाजपा से कांग्रेस में गए नाना पटोले को हराया था। वहीं 2014 के लोकसभा चुनाव में नितिन गडकरी ने करीब 2,50,000 के अंतर से जीत दर्ज की थी।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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