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Kairana Election: यूपी की वो सीट जहां हसन परिवार का रहा है दबदबा, प्रदीप कुमार से हुई इकरा चौधरी की भिड़ंत

Kairana Chunav: सपा की इकरा हसन का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार से हो रहा है। प्रदीप इस सीट से मौजूदा सांसद हैं और उन्होंने 2019 के चुनाव में तबस्सुम हसन को 90 जार से अधिक वोटो से मात दी थी। कैराना लोकसभा सीट पर हसन परिवार के सदस्यों ने चार बार जीत हासिल की है।

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प्रदीप कुमार vs इकरा चौधरी।

Photo : Times Now Digital

Lok Sabha Election 2024: कैराना लोकसभा सीट पर चौधरी परिवार की पार्टी आरएलडी का अच्छा खासा प्रभाव माना जाता है। इस सीट पर सपा को सिर्फ एक बार ही जीत नसीब हुई है, इसके बावजूद यहां अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी की अच्छी-खासी पकड़ मानी जाती है। सपा और आरएलडी ने मिलकर कई बार इस सीट को अपने कब्जे में लिया है। हालांकि अब जयंत चौधरी सपा के साथ नहीं है। ऐसे में सपा का दबदबा कम होता नजर आ रहा था कि अखिलेश ने हसन परिवार की बेटी को मैदान में उतार दिया, जिसका इस क्षेत्र में दमखम दिखता रहा है।

हसन परिवार की मुश्किलें कम करने की कोशिश

इकरा चौधरी कैराना के हसन परिवार की छोटी बेटी है। इनके भाई नाहिद हसन कैराना विधानसभा से समाजवादी पार्टी के विधायक हैं। जिन्हें बीते कई वर्षों से मुसीबतें झेलनी पड़ी। विवादों से नाता होने के चलते नाहिद को सलाखों के पीछे जाना पड़ा था। उस वक्त इकरा चौधरी अपने भाई का सहारा बनी थीं। नाहिद हसन ने 2022 के चुनाव में कैराना विधानसभा से लगातार तीन चुनाव जीतकर हैट्रिक लगाई। ऐसे में इस वक्त सभी की निगाहें इकरा पर टिकी होंगी।

नाहिद की मां तबस्सुम हसन कैराना लोकसभा सीट से दो-दो बार सांसद चुनी जा चुकी है। जिसमें से एक बार बसपा के टिकट पर और दूसरी बार आरएलडी के चुनाव चिन्ह पर वो सांसद चुनी गईं। इसके अलावा उनके पति मुनव्वर हसन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में अच्छी खासी छाप छोड़ी। 1996 में मुनव्वर ने पहली बार सपा को इस सीट से जीत दिलाई थी। मुनव्वर के पिता अख्तर हसन ने 1984 में कांग्रेस के टिकट पर सांसद की चुनाव जीता था। उन्होंने सभासदी के साथ अपने सियासी करियर की शुरुआत की थी।

मैनपुरी की जंग में कौन-कौन दावेदार?

क्रमांकउम्मीदवार का नामपार्टी
1इकरा चौधरीसमाजवादी पार्टी
2प्रदीप कुमारभारतीय जनता पार्टी
3श्रीपालबहुजन समाज पार्टी
4ओमबीरआजाद अधिकार सेना
5जाहिदसोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया
6नंद किशोरआपकी अपनी पार्टी (पीपुल्स)
7प्रीति कश्यपराष्ट्रीय मजदूर एकता पार्टी
8विक्रम सैनीअखंड भारत स्वतंत्र पार्टी
9मोहम्मद कादिरनिर्दलीय
10मनोज राणानिर्दलीय
11योगेशनिर्दलीय
12विकास कुमारनिर्दलीय
13विक्रम सिंहनिर्दलीय
14शोकिन्दर कुमारनिर्दलीय
इकरा हसन का सीधा मुकाबला भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप कुमार से हो रहा है। प्रदीप इस सीट से मौजूदा सांसद हैं और उन्होंने 2019 के चुनाव में तबस्सुम हसन को 90 जार से अधिक वोटो से मात दी थी। कैराना लोकसभा सीट पर हसन परिवार के सदस्यों ने चार बार जीत हासिल की है। देखना होगा कि जीत के रिकॉर्ड को परिवार की बेटी इकरा आगे बढ़ा पाती हैं या नहीं।

पहले चरण में कैराना सीट पर हुआ था मतदान

कैराना सीट पर पहले चरण में 19 अप्रैल को मतदान हुए थे। इस बार सात चरण में लोकसभा चुनाव हुए हैं। पहले चरण में 19 अप्रैल, दूसरे चरण में 26 अप्रैल, तीसरे चरण में 7 मई, चौथे चरण में 13 मई, पांचवें चरण 20 मई, छठे चरण में 25 मई और अंतिम चरण में 1 जून को वोटिंग हुई, जिसके परिणाम 4 जून को आएंगे।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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