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'मैं असम का मामा...' बेटा शूटर, पत्नी मीडिया क्वीन: हिमंत बिस्वा सरमा की अनकही कहानी

Himanta Sarma :पूर्वोत्तर के राजनीतिक 'चाणक्य' कहे जाने वाले हिमंत बिस्वा सरमा की अनसुनी दास्तां। जानें क्यों उन्हें कहा जाता है 'असम का मामा', और उनकी पत्नी व बेटे के बारे में वो बातें जो मीडिया में कम आती हैं जानिए वह सब...

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हिमंत बिस्वा सरमा ने राज्य में 'मामा' इमेज बनाई है
Authored by: Ravi Vaish
Updated May 4, 2026, 16:22 IST

'मैं असम का मामा हूं, घुसपैठियों से बचाऊंगा...' मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा जब रैली में ये कहते हैं तो भीड़ 'मामा-मामा' चिल्लाती है। हिमंत बिस्वा सरमा असम के युवाओं और छात्रों के बीच 'मामा' के नाम से लोकप्रिय हैं। यह नाम उन्हें किसी राजनीतिक अभियान से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर युवाओं के साथ उनके मजाकिया और संवादात्मक अंदाज से मिला है। आज आलम यह है कि पूरे पूर्वोत्तर में वे इसी नाम से पुकारे जाते हैं।

मध्यप्रदेश के शिवराज सिंह चौहान की तरह हिमंत ने भी 'मामा' इमेज बनाई। रैली में कहते हैं- 'मैं असम का मामा हूं, मेरी भांजियों को कोई तकलीफ नहीं होने दूंगा...'ओरुनोदोई' स्कीम से 27 लाख गरीब महिलाओं को 1250 रु महीना देते हैं।

हिमंत बिस्वा सरमा की फैमिली भी है बहुमुखी (Vere tile)

हिमंत का जन्म (Himanta Biswa Sarma) 1 फरवरी 1969 को जोरहाट में हुआ। पिता कैलाश नाथ सरमा असम सरकार में अधिकारी थे। हिमंत ने कॉटन कॉलेज से पॉलिटिकल साइंस में MA किया, फिर गुवाहाटी यूनिवर्सिटी से LLB। कॉलेज टाइम में फुटबॉल खेलते थे। बाहर जनता उन्हें मामा-मामा बुलाती है पर CM हाउस के अंदर की कहानी अलग है। बेटा नंदिल बिस्वा सरमा शूटर है। पत्नी रिंकी भुयान सरमा 'News Live' की मालकिन हैं।

पत्नी रिनिकी भुयान जो हैं असम की 'मीडिया क्वीन?'

हिमंत बिस्वा सरमा ने 2001 में रिनिकी भुयान से शादी की थी। उनकी पत्नी रिनिकी भूइयां सरमा केवल एक मुख्यमंत्री की पत्नी नहीं हैं, बल्कि वे असम की एक सफल उद्यमी और 'मीडिया मुगल' मानी जाती हैं। वे 'प्राइड ईस्ट एंटरटेनमेंट' की सीएमडी हैं, जो उत्तर-पूर्व का सबसे बड़ा मीडिया हाउस है।उनके पास न्यूज चैनल (News Live) के साथ-साथ मनोरंजन और संगीत के कई लोकप्रिय चैनल्स का स्वामित्व है। उन्हें असम के सामाजिक और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक प्रभावशाली महिला के रूप में देखा जाता है।

हिमंत बिस्वा सरमा ने 2001 में रिनिकी भूइयां से शादी की थी

हिमंत बिस्वा सरमा ने 2001 में रिनिकी भूइयां से शादी की थी

नेशनल शूटर है हिमंत का बेटा नंदिल बिस्वा

नंदिल बिस्वा सरमा एक पेशेवर निशानेबाज (Shooter) हैं। उन्होंने कई प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है और कई पदक जीते हैं। वहीं बताते हैं कि बेटा नंदित राजनीति की चमक-धमक से दूर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करना पसंद करते हैं। हिमंत खुद भी शूटिंग से जुड़े रहे हैं। नंदिल अब बिजनेस संभालते हैं, पर शूटिंग का पैशन भी जारी है। वहीं हिमंत की एक बेटी भी है, सुकन्या सरमा पर वह मीडिया से दूर रहती हैं।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का परिवार

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का परिवार

छात्र राजनीति और कांग्रेस में प्रवेश से लेकर असम के CM तक

हिमंत ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (AASU) के एक सक्रिय छात्र नेता के रूप में की थी। इसके बाद वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई के सबसे करीबी और भरोसेमंद रणनीतिकार बन गए। कांग्रेस सरकार के दौरान उन्होंने असम के स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला।

राहुल गांधी से मिलने AICC ऑफिस में 3 घंटे इंतजार किया

अगस्त 2015 में हिमंत दिल्ली गए थे राहुल गांधी से मिलने AICC ऑफिस में 3 घंटे इंतजार किया था पर राहुल नहीं मिले। नाराज हिमंत अमित शाह से मिले। 23 अगस्त 2015 को कांग्रेस से इस्तीफा देकर 24 अगस्त 2015 को भाजपा जॉइन।जिसने पूर्वोत्तर की राजनीति का रुख पूरी तरह बदल दिया।भाजपा ने उन्हें नॉर्थ-ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (NEDA) का संयोजक बनाया। तब अमित शाह ने कहा- 'आज कांग्रेस ने अपना नॉर्थ-ईस्ट खो दिया'।

राहुल गांधी से मिलने AICC ऑफिस में 3 घंटे इंतजार किया था

राहुल गांधी से मिलने AICC ऑफिस में 3 घंटे इंतजार किया था

कहलाते हैं पूर्वोत्तर का राजनीतिक 'चाणक्य'

उनके नेतृत्व में भाजपा ने न केवल असम, बल्कि त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी अपनी सरकार बनाई या गठबंधन का हिस्सा बनी, इसी कारण उन्हें पूर्वोत्तर का राजनीतिक 'चाणक्य' कहा जाता है।

असम के मुख्यमंत्री पद तक का सफर

2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत के बाद, 10 मई 2021 को उन्होंने असम के 15वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। मुख्यमंत्री के रूप में वे अपने सख्त प्रशासन, सादगी और सीधे जनसंवाद के लिए जाने जाते हैं, जिसके कारण युवाओं के बीच वे 'मामा' के नाम से लोकप्रिय हैं।यह यात्रा दर्शाती है कि कैसे उन्होंने जमीनी स्तर की राजनीति से लेकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अमिट पहचान बनाई है।

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