Loksabha Election 2024: लोकसभा चुनाव के लिए सियासी पारा गर्म है। पूरब से लेकर पश्चिम और उत्तर से लेकर दक्षिण तक चुनावी सरगर्मी जोरों पर है। नेताओं के ताबड़तोड़ दौरे चुनावी रंगत को चटखीला बना रहे हैं। सात चरणों में होने वाले चुनाव की पहली परीक्षा 16 अप्रैल को है। पहले और दूसरे चरण (26 अप्रैल) में ही पश्चिमी यूपी की 14 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। भाजपा और एनडीए के मिशन 370 और 400 के लिए एक-एक सीट काफी अहम है। पिछली बार यानी 2019 में यहां सपा और बसपा का गठबंधन भाजपा पर भारी पड़ा था। हालांकि, इस बार चुनावी समीकरण बदला हुआ है। रालोद भाजपा के साथ है। भाजपा इस क्षेत्र में 2014 वाला अपना प्रदर्शन दोहराना चाहती है। फिर भी चुनौती बड़ी है। इसी चुनावी चुनौती पर टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के आलोक कुमार राव ने पश्चिमी यूपी भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतेन्द्र शिशोदिया से विस्तार से बात की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश
यूपी पश्चिम के भाजपा अध्यक्ष सत्येंद्र सिसोदिया।
सवाल-पश्चिम क्षेत्र में इस बार भाजपा के लिए चुनौती कितनी बड़ी है?
जवाब-पश्चिम क्षेत्र में प्रथम चरण का चुनाव होने जा रहा रहा है। यहां लोकसभा की 14 सीटें हैं, 15वीं आंशिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जीत की हैट्रिक लगाने जा रहे हैं, इसे देखते हुए यह चुनाव हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण है। पश्चिम क्षेत्र की हवा पूरे यूपी में जाती है। 2014 की तरह 2019 के चुनाव परिणाम हमारे अनुकूल नहीं रहे। हमने 2014 में 14 सीटें बड़े अंतर से जीती थीं लेकिन 2019 में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन की वजह से हमें नुकसान उठाना पड़ा। इसके बावजूद हम 7 सीटें जीते। रामपुर को हमने उपचुनाव में जीता। मुझे पूरा भरोसा है कि 2024 के चुनाव में सभी 14 सीटें हम भारी अंतर से जीतेंगे।
सवाल-मेरठ में तीन बार के सांसद रहे राजेंद्र अग्रवाल का टिकट कट गया। अरुण गोविल को टिकट मिला है। विपक्ष उन्हें बाहरी उम्मीदवार बता रहा है?
जवाब-राजेंद्र अग्रवाल पुराने कार्यकर्ता हैं। वह तीन बार सांसद रहे। पार्टी ने यदि कोई बदलाव किया है तो उनकी दूसरी भूमिका भी तय की होगी। तीन-तीन बार चुनाव लड़ाने के लिए वे पार्टी का आभार व्यक्त करते रहे हैं। यह कहकर वह सिद्ध करते हैं कि एक कार्यकर्ता का भाव क्या होता है। अरुण गोविल जी एक स्वच्छ छवि के व्यक्ति है। देश, प्रदेश और मेरठ की जनता उनमें भगवान राम का स्वरूप देखती है। उनका जन्म मेरठ में हुआ। वह यहां पढ़े-लिखे तो वह बाहरी कैसे हैं।
सवाल-माफिया डॉन मुख्तार अंसारी की मौत पर विपक्ष सूबे की योगी सरकार पर आरोप लगा रहा है, क्या इसका चुनाव पर असर पड़ेगा?
जवाब-किसी को यदि लगता है कि कहीं कुछ गलत हुआ है तो उसे कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेना चाहिए। लेकिन आप देखेंगे कि कोरोना काल के बाद 20 -20 साल के युवाओं को दिल का दौरा पड़ने की घटनाएं सामने आई हैं। भाजपा के नेता कानून में विश्वास रखते हैं। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है, इसलिए उसे कुछ न कुछ कहना है। मुख्तार अंसारी या कोई भी व्यक्ति हो यदि वह दोषी है तो कानून अपना काम करेगा। हम कानूनी प्रकिया में विश्वास करने वाले लोग हैं। हम लोग साजिश में विश्वास नहीं करते। हम जनता के हितों और उसके कल्याण के लिए योजनाएं बनाने वाले लोग हैं।
सवाल-पिछली बार रालोद आपके साथ नहीं था, इस बार साथ आने से कितना फायदा होगा?
जवाब-राष्ट्रीय लोक दल जनता के बीच कार्य करने वाला दल है। पश्चिम की कुछ सीटों पर उसके कार्यकर्ता की बहुलता है। जहां उसकी बहुलता है वहां हमें लाभ मिलेगा और जहां हमारे कार्यकर्ता अधिक हैं वहां पर रालोद लाभान्वित होगा।
भाजपा का संगठन बहुत बड़ा है। हमारे पास बूथ तक की संरचना है। प्रत्येक बूथ पर हमारे 40 से 50 कार्यकर्ता हैं। दूसरे दल ईवीएम को केवल कोस सकते हैं। गठबंधन हमारा केवल रालोद से नहीं बल्कि अपना दल, निषाद पार्टी से भी है। राजभर के साथ भी है।
सवाल-ओम प्रकाश राजभर कितना टिकाऊ हैं, क्या आगे वह भाजपा के साथ रहेंगे?
जवाब-राजभर जी की भविष्य की क्या योजना है, मैं इस बारे में कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। आज वह हमारे साथ हैं। वह कब तक हमारे साथ हैं, यह उनकी व्यक्तिगत राय है लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि भाजपा गठबंधन धर्म निभाना जानती है। हम यह धर्म निश्चित रूप से यह धर्म निभाते रहेंगे।
सवाल-पश्चिमी यूपी किसान बहुल क्षेत्र है। अभी हरियाणा सीमा पर एमएसपी की कानूनी गांरटी के लिए उग्र प्रदर्शन देखने को मिला, क्या इसका असर चुनाव पर दिखेगा?
जवाब- किसान की जहां तक बात है। किसान किसी दल का नहीं है वह देश का है। पीएण मोदी ने किसानों के लिए जो किया है वह किसी से छिपा नहीं है। हम करोड़ों किसानों को सम्मान निधि दे रहे हैं। खाद रसायन खाद को हमने कंट्रोल मे रखा, सब्सिडी भी बढ़ाई।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी कीमत बहुत बढ़ी है।
सवाल-तीन कृषि कानूनों की वापसी के लिए किसान नेता राकेश टिकैत बहुत सक्रिय थे, लेकिन इस बार वह दूर रहे, इसकी वजह क्या है?
जवाब-पिछली बार इन किसान नेताओं ने कृषि कानूनों को लेकर किसानों को बरगलाया। लेकिन किसान अब इनकी असलियत समझ चुके हैं। इसके लिए वे इनसे नाराज भी हैं। कृषि बिल किसानों के हित में थे, लेकिन इन्होंने इसे लागू नहीं होने दिया। किसान ये समझ गए हैं कि ये कृषि कानून उनके हित में थे। इन लोगों ने उनके हितों पर डाका डालने का काम किया।
सवाल-भाजपा सरकार की कोई 5 उपलब्धियां बताइए।
जवाब-भाजपा सरकार की उपलब्धियां तो सैकड़ों हैं, फिर भी हमने गरीबों को सम्मान उन्हें छत दिया। महिलाओं को गैस सिलेंडर, शौचालय दिया। गरीबों को इलाज के लिए 5 लाख रुपए की गारंटी वाला आयुष्मान कार्ड है। सुरक्षा की गारंटी है। कहीं अगर कोई अप्रिय घटना हो भी जाती है तो प्रशासन कानूनी तौर पर और सख्ती से निपटता है।
