मुख्यमंत्री : जानिए बिहार के अब तक के इकलौते मुस्लिम सीएम अब्दुल गफूर के बारे में

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार जोरों पर है। विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हम आपके लिए लेकर आए हैं स्पेशल मुख्यमंत्री सीरीज। इस सीरीज में आज बात बिहार के 13वें और अब तक के इकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री के बारे हैं। अब्दुल गफूर ने मुख्यमंत्री रहते नीतीश कुमार और लालू यादव पर लाठियां चलवाईं और बाद में नतीश के साथ समता पार्टी भी बनाई।

Bihar Assembly Election 2025: 'सिंहासन खाली करो कि जनता आती है', ये नारा तो आपको याद ही होगा। जेपी आंदोलन के दौरान यह नारा देश में हर तरफ गूंजता था। यही नारा और जेपी आंदोलन था, जिसके कारण प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की। बात बिहार विधानसभा चुनाव की हो रही है, ऐसे में आप भी सोच रहे होंगे कि ये जेपी आंदोलन और देश में आपातकाल की बात बीच में कहां से आ गई। असल में इस नारे, जेपी आंदोलन और देश में आपातकाल की जड़ में बिहार ही था। बिहार चुनाव पर हमारी 'मुख्यमंत्री' स्पेशल सीरीज में आज बात हो रही है, बिहार के 13वें और अब तक के इकलौते मुस्लिम मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के बारे में। अब्दुल गफूर के ही एक फैसले के कारण जेपी आंदोलन को हवा मिली और आगे चलकर देश में आपातकाल तक लग गया। इस बारे में भी आगे जानेंगे, चलिए समझते हैं अब्दुल गफूर के बारे में, जो 1 साल 283 दिन तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे।

13th CM of Bihar Abdul Ghafoor.

बिहार के 13वें मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर

कौन थे बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर?

बिहार के 13वें मुख्यमंत्री रहे अब्दुल गफूर का जन्म 18 मार्च 1918 को मौजूदा बिहार में गोपालगंज जिले के सरेया अख्तियार गांव में हुआ था। उनके पिता शेख वशीर अली एक छोटे किसान थे और मां गृहणी थी। उनकी शुरुआती पढ़ाई गोपालगंज में ही हुई और बाद में वह पटना आ गए। पटना से 10वीं करने के बाद परिवार ने उन्हें 1935 में आगे की पढ़ाई के लिए अलीगढ़ भेज दिया। यहां अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) से उन्होंने एमए और कानून की पढ़ाई की।

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