Why thousands of Indian MBBS graduates are unable to foreign licensing exams: भारत दुनिया के टॉप डॉक्टर्स तैयार करने के लिए जाना जाता है। यहां से MBBS की पढ़ाई करने वाले डॉक्टर्स की विदेशों में काफी डिमांड रहती है। दुनिया के हर देश में भारत के डॉक्टर मिल जाते हैं लेकिन अब भारतीय डॉक्टर्स के विदेश में प्रैक्टिस करने के सपने को ग्रहण लग गया है। दरअसल, हजारों भारतीय MBBS ग्रेजुएट्स, यूनाइटेड स्टेट्स मेडिकल लाइसेंसिंग एग्जामिनेशन (USMLE) और UK के प्रोफेशनल एंड लिंग्विस्टिक असेसमेंट्स बोर्ड (PLAB) टेस्ट जैसे विदेशी मेडिकल लाइसेंसिंग एग्जाम में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।
भारत से हर साल हजारों छात्र MBBS की पढ़ाई पूरी करने के बाद अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। बेहतर सैलरी, आधुनिक मेडिकल सिस्टम और रिसर्च के अवसर इसकी बड़ी वजह हैं। लेकिन हाल के दिनों में हजारों भारतीय MBBS ग्रेजुएट्स का यह सपना अधर में लटक गया है। इसकी वजह किसी परीक्षा का कठिन होना नहीं, बल्कि एक नियामकीय (रेगुलेटरी) प्रक्रिया है।
क्या है पूरा मामला
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेडिकल एजुकेशन (WFME) से भारतीय मेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया समय पर पूरी नहीं हो पाई है। इस अंतरराष्ट्रीय संस्था से मान्यता न मिलने के कारण विदेशी परीक्षा एजेंसियां भारतीय एमबीबीएस डिग्री धारकों के आवेदन स्वीकार नहीं कर रही हैं।
कहां फंसा पेंच
अमेरिका में मेडिकल लाइसेंसिंग से जुड़ी संस्था ECFMG (Educational Commission for Foreign Medical Graduates) ने 2024 से नियम लागू किया कि केवल उन्हीं मेडिकल कॉलेजों के छात्र USMLE जैसी परीक्षाओं में बैठ सकेंगे, जिनके कॉलेज को WFME (World Federation for Medical Education) से मान्यता प्राप्त हो या आवश्यक मानकों को पूरा किया गया हो। भारत के कई मेडिकल कॉलेजों में यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। इसी कारण हजारों भारतीय MBBS ग्रेजुएट विदेश की लाइसेंसिंग परीक्षाओं के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं।
विदेश में डॉक्टर बनने के लिए कौन-कौन सी परीक्षाएं देनी पड़ती हैं?
1. अमेरिका (USA) – USMLE
अगर कोई भारतीय डॉक्टर अमेरिका में प्रैक्टिस करना चाहता है तो उसे USMLE (United States Medical Licensing Examination) पास करनी होती है। इस परीक्षा के तीन चरण होते हैं।
- बेसिक मेडिकल साइंस की जांच
- क्लीनिकल नॉलेज का परीक्षण
- मरीजों के इलाज और क्लीनिकल निर्णय लेने की क्षमता का मूल्यांकन
इन परीक्षाओं के बाद ECFMG सर्टिफिकेशन और अमेरिका में रेजिडेंसी (Residency Match) पूरी करनी होती है। तभी डॉक्टर वहां स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकता है।
2. ब्रिटेन (UK) – PLAB/UKMLA
ब्रिटेन में काम करने के लिए पहले भारतीय डॉक्टरों को PLAB (Professional and Linguistic Assessments Board) परीक्षा पास करनी होती थी। अब UKMLA व्यवस्था लागू की जा रही है, हालांकि कई उम्मीदवारों के लिए PLAB ट्रांजिशन प्रक्रिया का हिस्सा बना हुआ है। इसमें दो चरण होते हैं—
- PLAB 1 – लिखित परीक्षा
- PLAB 2 – क्लीनिकल स्किल्स (OSCE)
इसके साथ अंग्रेजी भाषा की दक्षता (IELTS या OET) भी जरूरी होती है। सफल उम्मीदवारों को GMC (General Medical Council) में रजिस्ट्रेशन मिलता है, जिसके बाद वे NHS में काम कर सकते हैं।
3. ऑस्ट्रेलिया – AMC
ऑस्ट्रेलिया में मेडिकल प्रैक्टिस के लिए AMC (Australian Medical Council) की परीक्षा देनी होती है। इसमें लिखित और क्लीनिकल दोनों तरह की परीक्षाएं शामिल होती हैं। इसके बाद मेडिकल बोर्ड में रजिस्ट्रेशन और अस्पताल में प्रशिक्षण की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
4. कनाडा
कनाडा में डॉक्टर बनने के लिए मेडिकल लाइसेंसिंग परीक्षा के साथ-साथ प्रांतीय (Provincial) नियमों और रेजिडेंसी प्रक्रिया को पूरा करना पड़ता है। कई मामलों में प्रतिस्पर्धा काफी अधिक होती है।
भारतीय छात्रों के सामने सबसे बड़ी समस्या क्या है?
समस्या परीक्षा की कठिनाई नहीं, बल्कि पात्रता (Eligibility) की है। जिन मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई की है, अगर वे आवश्यक अंतरराष्ट्रीय मान्यता संबंधी शर्तें पूरी नहीं करते हैं, तो छात्र USMLE, PLAB या अन्य विदेशी लाइसेंसिंग परीक्षाओं के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे। ऐसे में डिग्री होने के बावजूद विदेश में करियर शुरू करने का रास्ता बंद हो जाता है।
NMC क्या कर रहा है?
जब तक भारत की नियामक प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक भारतीय छात्रों के लिए विदेशों में दाखिले और प्रैक्टिस के दरवाजे आंशिक रूप से बंद रहेंगे। इस समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) भारतीय मेडिकल कॉलेजों के लिए WFME से जुड़ी मान्यता प्रक्रिया को पूरा कराने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि यह प्रक्रिया अभी जारी है और सभी कॉलेज इसमें शामिल नहीं हो पाए हैं। जब तक यह काम पूरा नहीं होता, तब तक कई भारतीय MBBS ग्रेजुएट्स के लिए विदेश में डॉक्टर बनने का सपना इंतजार में रहेगा।