रेलवे में सरकारी नौकरी पाने का सपना हर साल लाखों युवा देखते हैं। रेलवे ग्रुप D भर्ती भी सबसे ज्यादा आवेदन वाली भर्तियों में से एक है। लेकिन लिखित परीक्षा पास करने के बाद कई उम्मीदवारों के मन में एक सवाल आता है कि आखिर रेलवे ग्रुप D भर्ती में दौड़ (Running Test) क्यों कराई जाती है? आइये इसका जवाब समझते हैं, और जानते हैं चर्चा में क्यों है?
Railway Group D भर्ती में दौड़ निकालना क्यों जरूरी होता है? (image - chatgpt)
चर्चा में क्यों
दरअसल, रेलवे रिक्रूटमेंट सेल (आरआरसी) इलाहाबाद की ओर से ग्रुप-डी भर्ती के लिए शारीरिक दक्षता परीक्षा (पीईटी) का आयोजन किया गया, जिसमें पांच दिनों के दौरान 2814 अभ्यर्थियों ने भाग लिया। इनमें से 1693 अभ्यर्थी यानी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों में करीब 60.16 प्रतिशत सफल घोषित हुए। जबकि 39.84 प्रतिशत अभ्यर्थी असफल रहे। ये एक बड़ी भर्ती है, क्योंकि रेलवे में ग्रुप डी के इस बार 32438 पद भरे जाने हैं।
टाइम्स नाउ नवभारत पर ये भी पढ़ें: UPSSSC ने जारी किया PET 2026 का नोटिफिकेशन , वन टाइम रजिस्ट्रेशन होगा अनिवार्य
Railway Group D भर्ती में दौड़ क्यों होती है?
बता दें, रेलवे ग्रुप D के कई पद ऐसे होते हैं, जहां कर्मचारियों को शारीरिक रूप से फिट होना बेहद जरूरी होता है। इसी वजह से रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) लिखित परीक्षा के बाद फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (PET) आयोजित करता है, जिसमें दौड़ सबसे अहम है।
दौड़ कराने का उद्देश्य क्या है?
रेलवे ट्रैक का रखरखाव, पटरियों की जांच, सामान उठाना, आपातकालीन स्थिति में तेजी से काम करना और लंबे समय तक फील्ड में ड्यूटी करना जैसे काम ग्रुप D कर्मचारियों को करने पड़ सकते हैं। ऐसे में रेलवे यह सुनिश्चित करना चाहता है कि चयनित उम्मीदवार शारीरिक रूप से इन जिम्मेदारियों को निभाने में सक्षम हों। दौड़ के जरिए उम्मीदवार की सहनशक्ति (Stamina), फिटनेस और कार्य क्षमता का आकलन किया जाता है।
किन पदों पर होती है ज्यादा शारीरिक मेहनत?
ग्रुप D के तहत कई पदों पर नियुक्ति होती है, जैसे-
- ट्रैक मेंटेनर (Track Maintainer)
- असिस्टेंट (विभिन्न तकनीकी विभागों में)
- पॉइंट्समैन
- हेल्पर
- अन्य ग्रुप D पद
इनमें से कई पदों पर कर्मचारियों को खुले वातावरण में, अलग-अलग मौसम में और कई बार कठिन परिस्थितियों में भी काम करना पड़ता है। इसलिए अच्छी शारीरिक क्षमता जरूरी मानी जाती है। आखिर में ये भी जानें कि पुरुष और महिला उम्मीदवारों के लिए अलग-अलग शारीरिक मानक तय किए जाते हैं।
