Which Union Territory Has its own High Court: भारतीय संविधान के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (Union Territories) का प्रशासनिक ढांचा अलग-अलग होता है। हर राज्य के पास अपना हाई कोर्ट है। लेकिन केंद्र शासित प्रदेशों की बात करें तो उनके पास आमतौर पर अपना अलग उच्च न्यायालय नहीं होता, वे किसी निकटतम राज्य के हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। लेकिन देश में एक ऐसी यूनियन टेरिटरी है, जिसके पास खुद का हाई कोर्ट है। यह किसी अन्य राज्य पर निर्भर नहीं करती है। अब आप सोच रहे होंगे, वह कौन-सा केंद्र शासित प्रदेश है। यूपीएससी प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों के लिहाज से यह जानना बेहद महत्वपूर्ण है कि किस यूनियन टेरिटरी के पास अपना खुद का समर्पित उच्च न्यायालय है और इसका संवैधानिक आधार क्या है।
देश की किस Union Territory का खुद का हाई कोर्ट है (Photo -AI)
किस यूनियन टेरिटरी का है अपना खुद का हाई कोर्ट?
भारत के सभी आठ केंद्र शासित प्रदेशों में से दिल्ली (National Capital Territory of Delhi) एकमात्र ऐसा केंद्र शासित प्रदेश (UT) है, जिसका अपना खुद का अलग और समर्पित उच्च न्यायालय (Delhi High Court) है। बता दें कि दिल्ली उच्च न्यायालय की स्थापना 31 अक्टूबर 1966 को 'दिल्ली उच्च न्यायालय अधिनियम, 1966' के तहत की गई थी। शुरुआत में इसमें मुख्य न्यायाधीश के अलावा तीन अन्य न्यायाधीश शामिल थे। दिल्ली हाई कोर्ट न केवल राजधानी के प्रशासनिक और कानूनी मामलों का निपटारा करता है, बल्कि यह देश के कई ऐतिहासिक और संवैधानिक निर्णयों का केंद्र भी रहा है।
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जम्मू-कश्मीर के पास भी है अपना हाई कोर्ट?
जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के पास भी अपना उच्च न्यायालय है, लेकिन वह 'जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय' के रूप में लद्दाख के साथ साझा किया जाता है, यानी इन दोनों यूटी का एक ही संयुक्त हाई कोर्ट है। इस लिहाज से कहा जाता है कि दिल्ली एकलौता यूटी है, जिसके पास अपनी हाई कोर्ट है और यह किसी अन्य यूटी के साथ संयुक्त नहीं है।
केंद्र शासित प्रदेशों के लिए हाई कोर्ट का संवैधानिक प्रावधान
संवैधानिक दृष्टि से अगर बात करें तो संविधान के भाग VIII में केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन का उल्लेख किया गया है। अगर आप यूपीएससी या देश की किसी बड़ी प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए इसके तहत आने वाले निम्नलिखित प्रमुख अनुच्छेदों पर ध्यान देना जरूरी है। इए एक नजर डालें -
आर्टिकल 241: यह अनुच्छेद संसद को यह अधिकार देता है कि वह कानून बनाकर किसी भी केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग से एक हाई कोर्ट का गठन करे या किसी मौजूदा राज्य के उच्च न्यायालय को उस केंद्र शासित प्रदेश का अधिकार क्षेत्र सौंप सकती है। बता दें कि इसी शक्ति का प्रयोग करते हुए संसद ने दिल्ली के लिए अलग हाई कोर्ट बनाया गया था।
आर्टिकल 230: इस आर्टिकल के तहत संसद कानून द्वारा किसी राज्य के उच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किसी केंद्र शासित प्रदेश तक कर सकती है या उसे वहां से हटा भी सकती है।
यूपीएससी अभ्यर्थियों के लिए क्यों जरूरी है यह विषय?
इंडियन पॉलिटी सब्जेक्ट में न्यायपालिका और संघ-राज्य संबंधों से जुड़े प्रश्न नियमित रूप से पूछे जाते हैं। इस तरह के प्रश्नों का दायरा केवल प्रारंभिक परीक्षा तक नहीं है, इससे संबंधित प्रश्न मुख्य परीक्षा में भी पूछे जाते हैं। अगर यूपीएससी प्रीलिम्स परीक्षा के प्रश्न पत्र देखें जाए तो आपको पता लगेगा कि उसमें अनुच्छेद, अधिकार क्षेत्र और विधाई शक्तियों से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं। जबकि मेन यानी मुख्य परीक्षा में केंद्र शासित प्रदेशों के विशेष दर्जे, शक्ति के पृथक्करण और प्रशासनिक जटिलताओं पर विश्लेषणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए उम्मीदवारों के लिए यह विषय जरूरी है।
