Stenography क्या है? जानिए कहां से और कैसे हुई थी इसकी अनोखी शुरुआत

What is Stenography: आपने अक्सर स्टेनोग्राफर की नौकरियां निकलते हुए देखी होगी। लेकिन क्या आप जानते हैं कि Stenography आखिर है क्या और इसकी शुरुआत कैसे हुई थी। टाइपिंग और वाइस टाइपिंग के इस दौर में भी किस वजह से बरकरार है इसका महत्व?

What is Stenography: आज के डिजिटल युग में भले ही कंप्यूटर और वॉयस टाइपिंग का जमाना हो, लेकिन प्रशासनिक और अदालती कामकाज में 'स्टेनोग्राफी' (Stenography) की भूमिका आज भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, जितनी पहले हुए करती थी। किसी वक्ता द्वारा बोले जा रहे लंबे-चौड़े भाषण या कोर्ट में हो रही बहस को पलक झपकाते ही कागज पर उतार देना किसी कला से कम नहीं है। स्टेनोग्राफी एक ऐसी ही विशेष लेखन शैली है, जिसकी मदद से कोई व्यक्ति सामान्य भाषा की तुलना में लगभग तीन से चार गुना तेजी से इसे लिख सकता है। इतना ही नहीं, इस भाषा को सिखने का कभी नुकसान नहीं है, क्योंकि सरकारी नौकरियों और निजी क्षेत्र में स्टेनोग्राफर के पद की हमेशा भारी मांग रहती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शब्दों को तेजी से कैद करने वाली इस विद्या का इतिहास कितना पुराना है? इसकी शुरुआत किसने की है और आधुनिक समय में इसका महत्व क्या है?

Stenography क्या है

Stenography क्या है

क्या है स्टेनोग्राफी?

सरल शब्दों में कहें तो स्टेनोग्राफी तेज गति से लिखने की एक कला या सांकेतिक प्रणाली (Shorthand Writing) है। स्टेनोग्राफी को हिंदी में 'आशुलिपि' कहा जाता है। इसमें सामान्य भाषा के लंबे-लंबे शब्दों, वाक्यों और ध्वनियों को छोटे-छोटे संकेतों को रेखाओं, बिंदुओं और कोणों में बदल दिया जाता है। इसमें एक सामान्य इंसान एक मिनट में औसतन 25 से 30 शब्द लिख पाता है, जबकि एक स्किल्ड स्टेनोग्राफर 80 से 120 शब्द या इससे भी अधिक लिख सकता है। बता दें कि स्टेनोग्राफर पहले बोले गए विचारों को शॉर्टहैंड सिंबल्स में नोट करता है और फिर बाद में उसे सामान्य भाषा में टाइप करके एक विस्तृत रिपोर्ट के तौर पर तैयार करता है।

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