Times Now Navbharat Explainer: देश में हर साल करोड़ों छात्र कुछ बनने का सपना लेकर विभिन्न प्रवेश और भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। NEET, JEE, CUET, UGC-NET जैसी परीक्षाएं केवल छात्रों के भविष्य का फैसला नहीं करतीं, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता का भी पैमाना होती हैं। पिछले कुछ वर्षों में लगातार सामने आए पेपर लीक के मामले, परीक्षा प्रबंधन में दिखीं खामियों और रिजल्ट्स को लेकर उठे विवादों के बीच सरकार ने परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की बात कही है। लेकिन इसी बीच एक बड़ा सवाल सामने खड़ा है - जब व्यवस्था को संभालने वाले कई शीर्ष पद ही खाली हों, तो सुधारों की रफ्तार कैसे बढ़ेगी?
इन दिनों देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG चर्चा में है। MBBS, BDS और दूसरे मेडिकल कोर्सेज में एडमिशन के लिए आयोजित होने वाली इस महत्वपूर्ण प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता संदेह में है। 21 जून को होने वाली NEET परीक्षा पहले 3 मई को आयोजित की गई थी लेकिन 12 मई को पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। मामले की जांच भी सीबीआई को सौंपी गई थी। इसके बाद शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा कराने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठे।
NEET UG पेपर लीक विवाद और परीक्षा सुधारों के बीच, केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में चार वरिष्ठ अधिकारियों की नियुक्ति की। इसमें दो संयुक्त सचिव (ज्वाइंट सेक्रेटरी) और दो संयुक्त निदेशक (ज्वाइंट डायरेक्टर) स्तर के अधिकारी शामिल थे। सरकार ने 1998 बैच की भारतीय सांख्यिकी सेवा (ISS) अधिकारी अनुजा बापट (संयुक्त सचिव), 2004 बैच की भारतीय राजस्व सेवा (IRS - सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर) अधिकारी रुचिता विज (संयुक्त सचिव), 2013 बैच की भारतीय राजस्व सेवा (IRS - आयकर) अधिकारी आकाश जैन (संयुक्त निदेशक) और 2013 बैच की भारतीय लेखापरीक्षा एवं लेखा सेवा (IA&AS) अधिकारी आदित्य राजेंद्र भोजगड़िया (संयुक्त निदेशक) को नियुक्ति किया था।
एनटीए में कितने पद खाली
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी यानी एनटीए इस समय सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। एजेंसी को मजबूत करने के लिए बनाए गए टॉप एडमिनिस्ट्रेटिव पदों में से आधे अभी भी खाली पड़े हैं। NEET-UG 2024 पेपर लीक विवाद के बाद सरकार ने NTA में 16 नए सीनियर एडमिनिस्ट्रेटिव पद बनाने को मंजूरी दी थी लेकिन यह अक्टूबर 2024 से अभी तक भरे ही नहीं गए। इन पदों में 8 डायरेक्टर-लेवल के पद और 8 जॉइंट डायरेक्टर-लेवल के पद शामिल थे। यह रीस्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) ISRO के पूर्व चेयरमैन डॉ. के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक हाई-लेवल कमिटी की सिफारिशों के आधार पर की गई। इस कमिटी का गठन NTA की कामकाज और स्ट्रक्चर से जुड़ी कमियों की जांच करने के लिए किया गया था।
NTA में कितने पद खाली
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में संयुक्त निदेशक के कुल 8 पदों में से 5 पद भरे गए हैं, जबकि 3 पद अभी भी खाली हैं। दिसंबर 2024 में तीन संयुक्त निदेशकों ने कार्यभार संभाला था जिसमें अर्चना शुक्ला (भारतीय सांख्यिकी सेवा), अमित कुमार (भारतीय आपूर्ति सेवा), शिवानी (भारतीय रेलवे कार्मिक सेवा) के नाम शामिल हैं। हाल ही में आकाश जैन और आदित्य राजेंद्र भोजगढ़िया की नियुक्ति के बाद संयुक्त निदेशक स्तर के भरे हुए पदों की संख्या बढ़कर 5 हो गई है। इसके बावजूद 3 पद अब भी रिक्त हैं।
निदेशक (Director) की बाद करें तो कुल 8 पदों में से केवल 3 पदों पर नियुक्तियां हुई हैं, जबकि 5 पद खाली हैं। एनटीए में नए सृजित 16 वरिष्ठ पदों में से अब तक केवल 8 पदों पर ही नियुक्तियां हो पाई हैं। यह स्थिति केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं है, बल्कि छात्रों के भरोसे से भी जुड़ा मुद्दा है। हर परीक्षा के बाद यदि व्यवस्थाओं पर सवाल उठते हैं, तो इसका असर लाखों अभ्यर्थियों के मनोबल पर पड़ता है। ऐसे समय में संस्थानों का मजबूत और जवाबदेह नेतृत्व विश्वास बहाली का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है।
यूजीसी में उपाध्यक्ष का पद खाली
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानीयूजीसी की गनर्विंग बॉडी में 12 लोग शामिल होते हैं। जिनमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और 10 सदस्य। UGC की वेबसाइट से मिली जानकारी के अनुसार, यूजीसी में फिलहाल उपाध्यक्ष का पद खाली है। भारत में उच्च शिक्षा का रेगूलेशन करने वाली संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के चेयरमैन का पद भी 2025 में लंबे समय तक खाली रहा था।
यूजीसी में नहीं है उपाध्यक्ष
UGC और AICTE जैसे संस्थान उच्च शिक्षा के नियमन और गुणवत्ता मानकों की जिम्मेदारी संभालते हैं। वहीं NTA देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं का संचालन करती है। इन संस्थानों में निर्णय लेने की प्रक्रिया जितनी तेज और प्रभावी होगी, उतना ही बेहतर परीक्षा प्रबंधन संभव हो सकेगा। लेकिन जब महत्वपूर्ण पद लंबे समय तक रिक्त रहते हैं, तो कई फैसले फाइलों में अटक जाते हैं या अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाते।
AICTE में कितने पद हैं खाली
अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी AICTE की बात करें तो उपाध्यक्ष का पद खाली है। सरकार ने इन संस्थाओं में बीते कुछ समय में महत्वपूर्ण नियुक्तियां जरूर की हैं, लेकिन तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की चर्चा तभी सार्थक होगी, जब संस्थानों में शीर्ष स्तर पर पर्याप्त और समयबद्ध नियुक्तियां की जाएं।
AICTE का कैसा है हाल
IITs में 35% से ज्यादा फैकल्टी पद खाली
देश के प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) में दाखिला पाने के लिए हर साल लाखों छात्र कड़ी मेहनत करते हैं। इस वर्ष भी 15 लाख से अधिक छात्रों ने JEE परीक्षा दी, जबकि 23 IITs की सीमित सीटों के लिए औसतन 80 छात्रों के बीच मुकाबला रहा है। लेकिन सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त आंकड़ों ने इन संस्थानों में शिक्षकों की भारी कमी की तस्वीर सामने रखी है। The Hindu द्वारा आरटीआई से जुटाए आंकड़ों के अनुसार, IITs समेत 79 केंद्रीय तकनीकी संस्थानों में स्वीकृत 20,279 फैकल्टी पदों में से 7,132 पद खाली हैं। यानी कुल 35.2 प्रतिशत शिक्षण पद अभी भी रिक्त हैं।
IIT में फैकल्टी की स्थिति क्या है?
20 वर्षों से IIT, NEET और बोर्ड परीक्षा के छात्रों को कोचिंग दे रहे अमित दीक्षित (M-tech, IIT-DELHI/GATE- AIR 1) ने टाइम्स नाउ नवभारत से बातचीत करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली की मजबूती केवल तकनीक और सुरक्षा प्रोटोकॉल से नहीं आती है, उसके पीछे एक ऐसे नेतृत्व का होना बेहद जरूरी है जिसके पास सिस्टम को फुलप्रूफ रखने की प्लानिंग हो। अगर किसी भी शैक्षिक संस्था में खाली पद हैं तो कम लोगों के कंधों पर ज्यादा काम होगा। ऐसी स्थिति में काम को करने के पीछे गंभीरता का अभाव देखने को मिलेगा। NTA के उदाहरण से अगर समझें तो जहां 16 लोगों की जरूरत है, वहां 4 या 8 लोग हैं। ऐसे में आप समझ सकते हैं कि कितना सतही काम हो रहा होगा। दूसरा, पहलू यह भी है कि ऐसे महत्वपूर्ण पदों के खाली होने से स्तर यानी लेयरिंग व्यवस्था नहीं बन पाती है। अगर लेयरिंग व्यवस्था नहीं होगी तो चीजें क्रॉस चेक नहीं हो पाती हैं जिससे कमियां रहने की संभावना काफी अधिक बढ़ जाती है।
IIT's में फैकल्टी की समस्या पर बात करते हुए अमित दीक्षित ने बताया कि एक नियम है कि एक टीचर एक सप्ताह में 15 घंटे ही पढ़ा सकता है। इसमें 4 घंटे प्रैक्टिकल लैब के भी हैं। अब समस्या है कि टीचर पर्याप्त ना होने की वजह से किसी टॉपिक के एक्सपर्ट फैकल्टी को दूसरा टॉपिक भी पढ़ाने के लिए कहा जाता है। इससे जो क्वालिटी निकलकर आनी चाहिए, वो नहीं आ पाती है। इसलिए जरूरी है कि फैकल्टी की कमी को जल्द से जल्द दूर कर हर टॉपिक के एक्सपर्ट भर्ती किए जाएं।
सवाल है कि क्या देश की प्रमुख शिक्षा और परीक्षा संस्थाओं में आज भी कई अहम पद रिक्त हैं? क्यों राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA), विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) और अन्य संस्थानों में नेतृत्व स्तर पर पूरी क्षमता से नियुक्तियां नहीं हो पाई हैं। कई जगह नियमित नियुक्तियों की जगह अतिरिक्त प्रभार या अंतरिम व्यवस्था के सहारे काम चल रहा है।
शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया लगातार जारी है, लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि फैकल्टी की कमी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जब कुर्सियां खाली हों, तो चुनौतियों और बढ़ जाती हैं। यही वजह है कि देश के परीक्षा तंत्र में नेतृत्व की कमी अब केवल प्रशासनिक मुद्दा नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ा राष्ट्रीय सवाल बन चुकी है।
