कलम और पिस्तौल का अनूठा संगम... ब्रिटिश साम्राज्य की नींद उड़ाने वाले क्रांतिकारी, कौन थे रामप्रसाद बिस्मिल ?

रामप्रसाद बिस्मिल एक कवि , शायर, अनुवादक, बहुभाषी, इतिहासकार और साहित्यकार थे। स्वामी सोमदेव और अन्य क्रांतिकारियों के संपर्क में आने के बाद रामप्रसाद बिस्मिल के मन में अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकने की इच्छा जाग्रत हुई। बिस्मिल ने देश की आजादी के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्श की रूपरेखा बनाई थी, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी।

Ram Prasad Bismil kaun the : ''सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल में है, देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है..." भारत की स्वतंत्रता के लिए अंग्रेजी शासन की जड़ें हिला देने वाले महान क्रांतिकारियों में से एक नाम रामप्रसाद बिस्मिल का था। भारतीय स्वतंरत्रता आंदोलन की क्रांतिकारी धारा के वे प्रमुख सेनानी थे। उनका जन्म 11 जून 1897 को उत्तरप्रदेश के खिरनी बाग में हुआ था। कुछ समय के बाद रामप्रसाद बिस्मिल आध्यात्मिक लोगों को संपर्क में आए और उनके जीवन में काफी बदलाव आया। आज उनकी जयंती के मौके पर चलिये एक नजर डालते हैं भारत के इस महान स्वतंत्रता सेनानी की यात्रा पर और उनपर लिखे जा सकने वाले निबंध।

Ram Prasad Bismil

Ram Prasad Bismil

सिर्फ क्रांतिकारी ही नहीं बल्कि...

रामप्रसाद बिस्मिल एक कवि , शायर, अनुवादक, बहुभाषी, इतिहासकार और साहित्यकार थे। स्वामी सोमदेव और अन्य क्रांतिकारियों के संपर्क में आने के बाद रामप्रसाद बिस्मिल के मन में अंग्रेजी शासन को उखाड़ फेंकने की इच्छा जाग्रत हुई। बिस्मिल ने देश की आजादी के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से ऐतिहासिक काकोरी ट्रेन एक्श की रूपरेखा बनाई थी, जिसने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी।

क्या था काकोरी कांड ?

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में 9 अगस्त 1925 को घटित 'काकोरी कांड' ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ क्रांतिकारियों का एक बड़ा और सुनियोजित शंखनाद था। पंडित रामप्रसाद 'बिस्मिल' के नेतृत्व में 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) के जांबाज क्रांतिकारियों—जिनमें अशफाक उल्ला खां, चंद्रशेखर आजाद, राजेंद्र लाहिड़ी और रोशन सिंह शामिल थे। क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल होने के बाद रामप्रसाद बिस्मिल और अन्य साथियों ने उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में 1915-16 में मातृविधि की स्थापना की। क्रांतिकारी गतिविधियों के संचालन के लिए उस वक्त पैसे की काफी जरूरत होती थी। ऐसे में सभी क्रांतिकारियों ने मिलक सरकारी खजाना लूटने की योजना बनाई। 9 अगस्त साल 1925 को निर्धारित योजना के अनुसार राजेंद्र नाथ, चंद्रशेखर आजाद और रामप्रसाद बिस्मिल और अन्य सात क्रांतिकारियों ने काकोरी स्टेशन के पास सरकारी खजाना लूट लिया।

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